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प्रशासनिक प्रबंधन में समन्वयक बन रही हिंदी

Mon, 16 Aug 2021 10:45 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 16 Aug 2021 10:45 PM IST
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Hindi becoming a coordinator in administrative management
फरीदाबाद। हिंदी भाषा सफलता की परिचायक हो सकती है। सफलता की राह आसान बना सकती है। इसका उदाहरण जिले के तीन वरिष्ठ पदों पर आसीन प्रशासनिक अधिकारी हैं। बनारस मूल से जिले के बल्लभगढ़ उपमंडल की अधिकारी अपराजिता, पीएमओ सविता और उप शिक्षा अधिकारी ने अमर उजाला से हुए संवाद में कहा कि वह हिंदी के साथ स्वयं को सहज मानते हैं। किसी भी अन्य भाषा में पकड़ मजबूत करने से पहले वह हिंदी को आत्मसात करने में भरोसा रखते हैं।
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वह मानते हैं कि हिंदी में संवाद व कार्य प्रशासनिक बागडोर को आसान बनाता है। लोगों तक सीधा जोड़ता है। सामाजिक समरसता लाता है। आज भी अपने 90 प्रतिशत कार्यों में हिंदी व्यवहार में लाते हैं। यह संस्कृति से जोड़े रखती है।
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पेशे से डॉक्टर लेकिन हिंदी पसंद अधिकारी
बीके नागरिक अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) डॉ. सविता यादव बताती हैं कि भाषा आपके व्यक्ति की परिचायक होती है। आप जिस भाषा में सहज होंगे वह आपकी संस्कृति की झलक होगी। बतौर पेशा डॉक्टरी की पढ़ाई अंग्रेजी में करने के बाद भी वह हिंदी में निपुण हैं। डॉ सविता कहती हैं कि वह जिले के नागरिक अस्पताल की प्रशासक बनी तो यह हिंदी भाषा ही है जिसने उन्हें लोगों से जोड़ा। बतौर डॉक्टर आप कागज कलम से कुछ भी लिखें लेकिन सरकारी अस्पताल के मरीज हिंदी में सहज होते हैं। प्रशासनिक अधिकारी बनने पर यही लोग समस्या लेकर आप तक पहुंचते हैं। ऐसे में उनकी समस्या सुनने और समाधान के लिए उनकी भाषा में संवाद जरूरी है। यह हिंदी के साथ ही संभव हो पाया।
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घर आंगन व गलियों में गूंजती है हिंदी
आईएसएस अपराजिता मूलरूप से यूपी के बनारस की रहने वाली हैं। इन दिनों जिले के बल्लभगढ़ उपमंडल में बतौर प्रशासनिक अधिकारी तैनात हैं। हिंदी भाषा से जुड़ाव को घर-आंगन और गलियों में गूंजने वाली भाषा कहती हैं। एसडीएम अपराजिता बताती हैं कि वह द्विभाषी हैं। बावजूद इसके हिंदी में इतनी सहज हैं जितना अपनों के बीच कोई बच्चा। वह कहती हैं कि प्रशासनिक कार्यभार संभालने के बाद हिंदी का महत्व और बढ़ गया। ज्यादातर लोगों के साथ हिंदी में ही संवाद करती हैं। वह मानती हैं कि प्रशासनिक अधिकारी यदि लोगों के बीच का ही व्यक्ति होता है। उनके कार्यालय में संवाद और पत्राचार में दिन के अधिकतर काम हिंदी भाषा से ही पूरे होते हैं। यह उनकी और उनके समाज की भाषा है।

पत्राचार में हिंदी के शब्दों का चलाया जादू
जिला शिक्षा विभाग में उप शिक्षा अधिकारी पद पर कार्यरत आनंद सिंह अब प्रशासनिक समन्वयक है। शिक्षक से पदोन्नत होकर विभागीय कार्यों की बागडोर संभाल रहे हैं। आनंद बताते हैं कि अब तक कई जिलों में कार्य किया। ज्यादातर लोग द्विभाषीय उलझन में रहते हैं। ऐसे में आनंद हिंदी को एकमात्र अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में बल देने में जुटे हैं। वह मानते हैं, सधे हुए शब्द आपके व्यवहार-आचार और संस्कार के साथ पत्राचार को सहज बनाते हैं। हिंदी को वह इसी रूप में बढ़ावा देते हैं। पत्राचार हिंदी में करते हैं।
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