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Faridabad News: तीन दिन थमेगा भारी वाहनों का पहिया, दिल्ली सीमा पर ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से फरीदाबाद में सप्लाई प्रभावित होने के आसार

Wed, 20 May 2026 11:54 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 20 May 2026 11:54 PM IST
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Heavy vehicles will be halted for three days, with transporters' strike at the Delhi border likely to impact supplies in Faridabad.
तीन दिन थमेगा भारी वाहनों का पहिया, दिल्ली सीमा पर ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से फरीदाबाद में सप्लाई प्रभावित होने के आसार
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। राजधानी दिल्ली में बुधवार से शुरू हो रही ट्रांसपोर्टरों की तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल का असर फरीदाबाद समेत एनसीआर के कई शहरों में दिखाई देने की संभावना है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर 21 से 23 मई तक भारी मालवाहक वाहनों की आवाजाही सीमित रखने का फैसला लिया गया है। इसके चलते फरीदाबाद, गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद से दिल्ली जाने वाले हजारों ट्रकों की आवाजाही प्रभावित रहेगी।

ट्रांसपोर्ट संगठनों का दावा है कि इस दौरान करीब 20 हजार से अधिक भारी वाहन दिल्ली में प्रवेश नहीं करेंगे। इनमें निर्माण सामग्री, औद्योगिक सामान, किराना और दैनिक उपयोग की वस्तुएं लेकर जाने वाले ट्रक शामिल हैं। हड़ताल का असर फल, सब्जी और डेयरी उत्पादों की सप्लाई पर भी पड़ सकता है, जिससे आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
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ऑल इंडिया गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील अत्री और ऑल फरीदाबाद ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रधान सुरेश शर्मा ने बताया कि दिल्ली में प्रवेश करने वाले मालवाहक वाहनों के चालकों और संचालकों को लंबे समय से कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि बिना स्पष्ट कारण के वाहनों के चालान काटे जा रहे हैं और विभिन्न नियमों के नाम पर ट्रांसपोर्ट कारोबारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ाया जा रहा है।
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ट्रांसपोर्ट संगठनों की प्रमुख मांगों में बीएस-6 वाहनों पर लगाए गए ग्रीन टैक्स को समाप्त करना, बीएस-4 वाहनों के दिल्ली प्रवेश पर लगी रोक हटाना तथा कथित मनमाने चालानों पर रोक लगाना शामिल है। संगठनों का कहना है कि मौजूदा नियमों के कारण ट्रांसपोर्ट व्यवसाय लगातार घाटे में जा रहा है और छोटे ऑपरेटर सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

फल-सब्जी और दूध की सप्लाई पर भी असर

ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अनुसार दिल्ली में रोजाना विभिन्न राज्यों से बड़ी मात्रा में फल, सब्जियां और दूध पहुंचता है। अकेले करीब आठ हजार वाहन प्रतिदिन इन आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई करते हैं। हड़ताल के दौरान इन वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित रह सकती है। ऐसे में मंडियों में आवक कम होने और कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।


व्यापारियों का कहना है कि यदि हड़ताल लंबी चली तो इसका असर एनसीआर की थोक मंडियों और खुदरा बाजारों पर भी दिखाई दे सकता है। वहीं आम लोगों को रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के लिए अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ सकती है।
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