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गुर्जर महोत्सव : समाज की समृद्ध संस्कृति को जानने पहुंच रहे लोग
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दूसरे दिन कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला की पुस्तक का हुआ विमोचन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मोहा मन
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। गुर्जर आर्ट एंड कल्चरल ट्रस्ट द्वारा आयोजित तीन दिवसीय गुर्जर महोत्सव के दूसरे दिन भी गुर्जर समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं को जानने के लिए लोग पहुंचे। गुर्जर महोत्सव में 15 राज्यों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। मंगलवार को कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की पुस्तक का विमोचन किया गया। वहीं इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को पूर्वजों की कई ऐसी परंपराएं और रीति-रिवाज के बारे में बताना है जो आज विलुप्त हो चुकी हैं।
मेला परिसर में गुर्जर समाज की विरासत को दर्शाया गया। जिसमें विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हरियाणी खानों का भी मजा लिया गया। इस महोत्सव में गुर्जर समाज के अलावा अन्य वर्ग के लोग भी आकर जानकारी जुटा रहे हैं। सबसे ज्यादा लोगों को माकोड़ा गांव से आए रिंकू भाटी द्वारा बनाई गई गोल एवं त्रिभुज चारपाई आकर्षित कर रही थी। इसके अलावा इस महोत्सव में गांव में इस्तेमाल होने वाली सभी महत्वपूर्ण चीजों को दर्शाया गया। जिसमें हैंडपंप, चाखी (हाथ वाली चक्की) आदि है।
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कच्छी घोड़ी का डांस रहा सबसे पसंदीदा
गुर्जर महोत्सव में कच्छी घोड़ी का नृत्य भी लोगों को काफी भा रहा था। कलाकार नृत्य में नकली घोड़ों पर सवारी करते हुए, हाथों में तलवार पकड़े हुए थे। इसके अलावा हरियाणवी गीतों की थाप पर घोड़ा भी डांस करते हुए नजर आ रहा था। जिसको देख लोगों ने घोड़े के साथ गीतों पर समूह के साथ डांस करना शुरू कर दिया। इसके अलावा महोत्सव में जगह जगह सेल्फी प्वाइंट बनाए गए हैं। जहां महोत्सव में आई महिलाओं के साथ बच्चे भी सेल्फी लेते हुए नजर आए। वहीं हरियाणा की संस्कृति पगड़ी के बिना अधूरी होती है। इसलिए पुरुषों के साथ महिलाएं भी पगड़ी बंधवाने में पीछे नहीं थी।
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देसी खाने का लिया जायका
जहां एक ओर संस्कृति को दर्शाया जा रहा था वहीं हरियाणा का खाना जैसे बाजरे की रोटी, चूल्हे पर बना खाना, लस्सी, दाल आदि का भी लोगों ने काफी लुप्त उठाया। इसे अलावा गुर्जर महोत्सव में विभिन्न तरह के पकवान भी मिल रहे हैं, जिनका लोग जमकर आनंद ले रहे हैं।
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सांस्कृतिक विविधता की झलक
महोत्सव में कश्मीर से कन्याकुमारी तक के गुर्जर समाज के लोकगीत, लोक नृत्य, पारंपरिक परिधान, खानपान और आभूषण प्रदर्शित किए गए। विशेष आकर्षण के रूप में गुर्जर सांस्कृतिक प्रदर्शनी, रागिनी कला और पारंपरिक व्यंजन प्रस्तुत किए गए। प्रदर्शनी के जरिए गुर्जर जाति की समृद्ध इतिहास और विरासत को भी प्रदर्शित किया गया। महोत्सव के दौरान गुर्जर समाज के इतिहास, कला और सांस्कृतिक विरासत की झलक झांकी और प्रदर्शनी के माध्यम से पेश की गई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। गुर्जर आर्ट एंड कल्चरल ट्रस्ट द्वारा आयोजित तीन दिवसीय गुर्जर महोत्सव के दूसरे दिन भी गुर्जर समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं को जानने के लिए लोग पहुंचे। गुर्जर महोत्सव में 15 राज्यों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। मंगलवार को कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की पुस्तक का विमोचन किया गया। वहीं इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को पूर्वजों की कई ऐसी परंपराएं और रीति-रिवाज के बारे में बताना है जो आज विलुप्त हो चुकी हैं।
मेला परिसर में गुर्जर समाज की विरासत को दर्शाया गया। जिसमें विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हरियाणी खानों का भी मजा लिया गया। इस महोत्सव में गुर्जर समाज के अलावा अन्य वर्ग के लोग भी आकर जानकारी जुटा रहे हैं। सबसे ज्यादा लोगों को माकोड़ा गांव से आए रिंकू भाटी द्वारा बनाई गई गोल एवं त्रिभुज चारपाई आकर्षित कर रही थी। इसके अलावा इस महोत्सव में गांव में इस्तेमाल होने वाली सभी महत्वपूर्ण चीजों को दर्शाया गया। जिसमें हैंडपंप, चाखी (हाथ वाली चक्की) आदि है।
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कच्छी घोड़ी का डांस रहा सबसे पसंदीदा
गुर्जर महोत्सव में कच्छी घोड़ी का नृत्य भी लोगों को काफी भा रहा था। कलाकार नृत्य में नकली घोड़ों पर सवारी करते हुए, हाथों में तलवार पकड़े हुए थे। इसके अलावा हरियाणवी गीतों की थाप पर घोड़ा भी डांस करते हुए नजर आ रहा था। जिसको देख लोगों ने घोड़े के साथ गीतों पर समूह के साथ डांस करना शुरू कर दिया। इसके अलावा महोत्सव में जगह जगह सेल्फी प्वाइंट बनाए गए हैं। जहां महोत्सव में आई महिलाओं के साथ बच्चे भी सेल्फी लेते हुए नजर आए। वहीं हरियाणा की संस्कृति पगड़ी के बिना अधूरी होती है। इसलिए पुरुषों के साथ महिलाएं भी पगड़ी बंधवाने में पीछे नहीं थी।
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देसी खाने का लिया जायका
जहां एक ओर संस्कृति को दर्शाया जा रहा था वहीं हरियाणा का खाना जैसे बाजरे की रोटी, चूल्हे पर बना खाना, लस्सी, दाल आदि का भी लोगों ने काफी लुप्त उठाया। इसे अलावा गुर्जर महोत्सव में विभिन्न तरह के पकवान भी मिल रहे हैं, जिनका लोग जमकर आनंद ले रहे हैं।
सांस्कृतिक विविधता की झलक
महोत्सव में कश्मीर से कन्याकुमारी तक के गुर्जर समाज के लोकगीत, लोक नृत्य, पारंपरिक परिधान, खानपान और आभूषण प्रदर्शित किए गए। विशेष आकर्षण के रूप में गुर्जर सांस्कृतिक प्रदर्शनी, रागिनी कला और पारंपरिक व्यंजन प्रस्तुत किए गए। प्रदर्शनी के जरिए गुर्जर जाति की समृद्ध इतिहास और विरासत को भी प्रदर्शित किया गया। महोत्सव के दौरान गुर्जर समाज के इतिहास, कला और सांस्कृतिक विरासत की झलक झांकी और प्रदर्शनी के माध्यम से पेश की गई।

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