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Faridabad News: मेडिकल कॉलेज में सफल हुई पहली रोबोटिक नेफरेक्टोमी सर्जरी

Wed, 01 Oct 2025 12:09 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 01 Oct 2025 12:09 AM IST
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First robotic nephrectomy surgery successful in medical college
टीबी की वजह से 20 साल के युवक की बाई किडनी ने काम करना कर दिया था बंद
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। एनआईटी-3 नंबर स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल की ओर से सोमवार को रोबोटिक सर्जरी में एक नया मुकाम हासिल किया गया है। डॉक्टरों की टीम ने एक मरीज का रोबोटिक नेफरेक्टोमी (गुर्दा निकालना) सफलतापूर्वक किया।
वैसे तो रोबोटिक सर्जरी पहले भी कई बार हो चुकी है लेकिन यह इस तरह का केस पहली बार आया है। क्योंकि मरीज छोटे कद का तपेदिक का रोगी था। उस वजह से उसकी बाइ किडनी ने काम करना बंद कर दिया था। यूरोलॉजी विभाग के डॉ. निशांत गुरनानी ने बताया कि उनके पास ईएसआईसी नोएडा से 20 साल का विकास रेफर होकर आया था। वह मरीज टीबी की बीमारी से ग्रस्त था। उसका टीबी का इलाज नोएडा अस्पताल से चल रहा था। टीबी की वजह से मरीज की बाई किडनी ने काम करना बंद कर दिया था और उसमें मवाद भरा हुआ था (पियो नेफ्रोटिक जीयूटीबी। जोकि चिपकी हुई थी। ऐसी स्थिति में फटने और व्यापक संक्रमण का उच्च जोखिम होता है।
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मात्र 4 सेमी का लगा चीरा
यूरोलॉजी विभाग के डॉ. निशांत गुरनानी ने बताया कि परंपरागत रूप से ऐसे मामलों में खुली सर्जरी, महत्वपूर्ण रक्त हानि और आधान की आवश्यकता होती है। हालांकि, रोबोटिक तकनीक से किडनी को केवल 200 मिली लीटर रक्त हानि के साथ केवल 4 सेंटीमीटर का चीरा लगाकर किडनी को निकाला गया। जिससे न्यूनतम इनवेसिव यूरोलॉजी सर्जरी में एक बड़ी सफलता मिली। उन्होंने बताया कि आम सर्जरी में कम से कम 10 से 12 सेंटीमीटर का चीरा लगता है और उसमें खून भी काफी बहता है।
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एनेस्थीसिया टीम का अहम योगदान
डॉ. रश्मि तनेजा और मानसी के नेतृत्व में एनेस्थीसिया टीम ने सर्जरी के दौरान होने वाली जटिलताओं के प्रबंधन और एक सुरक्षित परिणाम सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि मरीज की हाइट कम होने की वजह से टीम को बेहोश करने में परेशानी हो रही थी। उन्होंने बताया कि यह सर्जरी करीब साढ़े तीन घंटे तक चली। मरीज को बुधवार को भर्ती किया गया था। सोमवार को उसका ऑपरेशन किया गया। डीन डॉ. चव्हाण कालिदास दत्तात्रेय ने बताया कि बीमित व्यक्तियों (आईपी) को अत्याधुनिक सर्जिकल देखभाल प्रदान करने की दिशा में ईएसआईसी फरीदाबाद की यात्रा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है।
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