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Faridabad News: पांच साल में 25 प्रतिशत तक बढ़े फैटी लिवर के मामले

Sat, 03 Oct 2026 12:04 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 03 Oct 2026 12:04 AM IST
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Fatty liver cases have risen by up to 25 percent in five years.
बीके अस्पताल में रोजाना 20 से अधिक मरीज पहुंच रहे
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गलत खानपान और शारीरिक निष्क्रियता बन रही प्रमुख वजह



संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों का असर अब लोगों के लिवर पर भी पड़ रहा है। पिछले पांच वर्षों में नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) के मामलों में करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी बताई जा रही है।
खास बात यह है कि अब केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि युवा और सामान्य वजन वाले लोगों में भी फैटी लिवर की समस्या सामने आ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार अधिक तला-भुना और जंक फूड, अत्यधिक मीठे पेय पदार्थ, शारीरिक गतिविधि की कमी और बढ़ता वजन इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। बीके अस्पताल में फैटी लिवर के लक्षणों के साथ प्रतिदिन करीब 20 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. योगेश गुप्ता के अनुसार, पेट संबंधी परेशानी या अन्य लक्षण लेकर आने वाले मरीजों को जरूरत के अनुसार अल्ट्रासाउंड की सलाह दी जाती है। जांच में कई मरीजों में फैटी लिवर की समस्या सामने आती है। उपचार और जरूरी सलाह देने के बाद मरीजों को घर भेज दिया जाता है। अब कम उम्र के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है।
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ग्रेटर फरीदाबाद स्थित निजी अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. रामचंद्र सोनी के अनुसार, फैटी लिवर के लिए केवल शराब का सेवन ही जिम्मेदार नहीं है। ऐसे कई मरीज सामने आ रहे हैं जो शराब नहीं पीते, लेकिन उनके लिवर में फैट जमा पाया जा रहा है। 30 से 40 वर्ष की उम्र के कुछ मरीजों का वजन सामान्य होने के बावजूद फैटी लिवर की समस्या सामने आई है। शुरुआती अवस्था में इसके स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, इसलिए कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं।
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नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी



विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार थकान, कमजोरी, पेट के दाहिने हिस्से में भारीपन या दर्द, भूख कम लगना और मतली जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लंबे समय तक समस्या रहने पर लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और गंभीर मामलों में सिरोसिस जैसी स्थिति का खतरा बढ़ सकता है।



ऐसे रखें लिवर का ध्यान



नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधि करें।

संतुलित और घर का बना भोजन प्राथमिकता से लें।

जंक फूड, तला-भुना भोजन और मीठे पेय पदार्थों का सेवन सीमित करें।

वजन को नियंत्रित रखें।

जरूरत के अनुसार समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं।
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