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बदलते मौसम में फसल के प्रति सावधान रहे किसान
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farmers will be alert during weather changing
बल्लभगढ़। मौसम खुश्क रहने, दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी होने और उत्तर पश्चिमी हवाएं चलने से रात्रि तापमान में हल्की गिरावट होने की संभावना है। वहीं, 21 और 22 फरवरी को पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव के कारण आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। इससे दिन के तापमान में हल्की कमी हो सकती है। मौसम को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को अपनी फसल के प्रति सजग रहने सलाह दी है।
कृषि विकास अधिकारी लक्ष्मण बताते हैं कि फसलों, सब्जियों और फलदार पौधों में आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई करें। वहीं, अनुकूल मौसम बने रहने की संभावना को ध्यान में रखते हुए गेहूं, चने, सरसों की फसलों एवं सब्जियों में कीटों और रोगों की निगरानी करते रहें। अगर गेहूं की फसल में पत्तों के ऊपरी हिस्से पीले और कुछ जले हुए दिखाई देने लगे तो यह पोटेशियम की कमी के लक्षण हो सकते हैं। इसके लिए एक से डेढ़ किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटास को 100-125 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ गेहूं की फसल में स्प्रे करें। मौसम में हो रहे बदलाव के कारण सरसों में सफेद रतुआ बीमारी बढ़ने की संभावना है।
इसमें तने और पत्तियों पर सफेद अथवा पीले क्रीम रंग के कील से प्रकट होते हैं। तने और फूल बेढंगे आकार के हो जाते हैं। जिन्हें स्टेग हेड कहते हैं। इस रोग के लक्षण नजर आते ही 600 ग्रा. मेन्कोजैब (डाइथेन या इन्डोफिल एम-45) को 250 से 300 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।
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कृषि विकास अधिकारी लक्ष्मण बताते हैं कि फसलों, सब्जियों और फलदार पौधों में आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई करें। वहीं, अनुकूल मौसम बने रहने की संभावना को ध्यान में रखते हुए गेहूं, चने, सरसों की फसलों एवं सब्जियों में कीटों और रोगों की निगरानी करते रहें। अगर गेहूं की फसल में पत्तों के ऊपरी हिस्से पीले और कुछ जले हुए दिखाई देने लगे तो यह पोटेशियम की कमी के लक्षण हो सकते हैं। इसके लिए एक से डेढ़ किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटास को 100-125 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ गेहूं की फसल में स्प्रे करें। मौसम में हो रहे बदलाव के कारण सरसों में सफेद रतुआ बीमारी बढ़ने की संभावना है।
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इसमें तने और पत्तियों पर सफेद अथवा पीले क्रीम रंग के कील से प्रकट होते हैं। तने और फूल बेढंगे आकार के हो जाते हैं। जिन्हें स्टेग हेड कहते हैं। इस रोग के लक्षण नजर आते ही 600 ग्रा. मेन्कोजैब (डाइथेन या इन्डोफिल एम-45) को 250 से 300 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।
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