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पराली को जलाने की बजाय आय का साधन बनाएं किसान: डीसी
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उपायुक्त ने ने अधिकारियों को पराली प्रबंधन की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए बैठक में दिए निर्देशअमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सुप्रीम कोर्ट व राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के निर्देशानुसार सरकार पराली जलाने वाले किसानों पर सख्त है। उपायुक्त (डीसी) विक्रम सिंह ने कहा कि किसान सरकार का साथ दें पराली न जलाएं। पराली को जलाने के बजाय इसे आय का साधन बनाएं। अगर कहीं पर पराली जलाने संबंधित सूचना आती है तो पराली जलाने वाले व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उपायुक्त ने मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की वीडियो कॉन्फ्रेंस उपरांत पराली प्रबंधन के बारे में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग व अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक लेते हुए निर्देश दिए। डीसी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि जिले में पराली जलाने से संबंधित कोई घटना सामने नहीं आनी चाहिए। इस कार्य में किसी भी प्रकार की कोताही व लापरवाही सहन नहीं की जाएगी । कोताही व लापरवाही करने वाले संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश दिए कि कहीं भी कोई किसान पराली जलाता है तो उसे ऐसा करने से रोकें और उन्हें पराली जलाने से होने वाले नुकसान से अवगत कराए। यदि कोई खेत में पराली जलाता हुआ पकड़ा जाता है तो उस पर जुर्माना सहित एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करें।
पराली जलाने से मिट्टी का स्वास्थ्य प्रभावित होता है
डीसी ने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी का स्वास्थ्य प्रभावित होता है, जिससे फसल उत्पादन में कमी आ सकती है। इसके विपरीत, किसान पराली को बेचकर या उससे विभिन्न उत्पाद बनाकर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं। पराली का सही प्रबंधन न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। सही तरीके से पराली का उपयोग करने से वायु प्रदूषण की समस्या से बचा जा सकता है, जो पराली जलाने के कारण उत्पन्न होती है। इसके अलावा, इसे संसाधन के रूप में अपनाने से जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
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फरीदाबाद। सुप्रीम कोर्ट व राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के निर्देशानुसार सरकार पराली जलाने वाले किसानों पर सख्त है। उपायुक्त (डीसी) विक्रम सिंह ने कहा कि किसान सरकार का साथ दें पराली न जलाएं। पराली को जलाने के बजाय इसे आय का साधन बनाएं। अगर कहीं पर पराली जलाने संबंधित सूचना आती है तो पराली जलाने वाले व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उपायुक्त ने मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की वीडियो कॉन्फ्रेंस उपरांत पराली प्रबंधन के बारे में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग व अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक लेते हुए निर्देश दिए। डीसी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि जिले में पराली जलाने से संबंधित कोई घटना सामने नहीं आनी चाहिए। इस कार्य में किसी भी प्रकार की कोताही व लापरवाही सहन नहीं की जाएगी । कोताही व लापरवाही करने वाले संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश दिए कि कहीं भी कोई किसान पराली जलाता है तो उसे ऐसा करने से रोकें और उन्हें पराली जलाने से होने वाले नुकसान से अवगत कराए। यदि कोई खेत में पराली जलाता हुआ पकड़ा जाता है तो उस पर जुर्माना सहित एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करें।
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पराली जलाने से मिट्टी का स्वास्थ्य प्रभावित होता है
डीसी ने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी का स्वास्थ्य प्रभावित होता है, जिससे फसल उत्पादन में कमी आ सकती है। इसके विपरीत, किसान पराली को बेचकर या उससे विभिन्न उत्पाद बनाकर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं। पराली का सही प्रबंधन न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। सही तरीके से पराली का उपयोग करने से वायु प्रदूषण की समस्या से बचा जा सकता है, जो पराली जलाने के कारण उत्पन्न होती है। इसके अलावा, इसे संसाधन के रूप में अपनाने से जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
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