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Faridabad News: फरीदाबाद की सूखी जमीन को मिलेगा नया जीवन, अरावली में बनेगी ग्रीन वॉल
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वन विभाग की जमीन से काफी मात्रा में हटाया जा चुका है अतिक्रमण
24,990 हेक्टेयर जमीन वेटलैंड के रूप में चिन्हित की गई है
100 किमी से अधिक भाग फरीदाबाद मे है
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। पर्यावरण संरक्षण को गति देने और अरावली की सूखी जमीन को फिर से हरा-भरा बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। ग्रीन वॉल इंडिया प्रोजेक्ट के तहत फरीदाबाद को फिर से हरा भरा किया जाएगा। इस परियोजना का लक्ष्य सूखी पड़ी जमीन पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण कर हरियाली को पुनर्जीवित करना है।
फरीदाबाद का भूगोल अरावली की तराई से गहराई से जुड़ा है। यहां वर्षों से लगातार खनन, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और शहरी विस्तार ने पहाड़ियों की हरियाली को नष्ट कर दिया। इसके चलते हजारों हेक्टेयर जमीन अब पूरी तरह बंजर हो चुकी है। जानकारी के अनुसार, हरियाणा में 24,990 हेक्टेयर जमीन वेटलैंड के रूप में चिन्हित की गई है। इनमें से बड़ा हिस्सा फरीदाबाद और गुरुग्राम के अरावली क्षेत्र का है। वहीं, दूसरी तरफ अरावली में बने अवैध अतिक्रमण को भी तेजी से हटाया जा रहा है। इसका लाभ आने वाले दिनों में पर्यावरण को मिलना शुरू हो जाएगा।
अब ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट के तहत इस बंजर भूमि को हरियाली से ढकने की योजना बनाई गई है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि फरीदाबाद में यह काम सबसे चुनौतीपूर्ण लेकिन असरदार साबित होगा, क्योंकि यहां की आबादी और औद्योगिक गतिविधियों के बीच हरित क्षेत्र लगातार सिमटता जा रहा है।
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यह परियोजना अफ्रीका की ग्रेट ग्रीन वॉल से प्रेरित है। केंद्र सरकार की तरफ से भारत में इसे अरावली की पहाड़ियों के साथ जोड़ा गया है। योजना के अनुसार, अरावली के दोनों सिरों में पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। इसका मकसद जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के साथ धूल प्रदूषण पर नियंत्रण करना और भूजल स्तर को सुधारना है।
फरीदाबाद में भी लाखों पौधे लगाने का लक्ष्य
अधिकारियों के मुताबिक, फरीदाबाद जिले में आने वाले सौ किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र को इस प्रोजेक्ट में प्राथमिकता दी गई है। यहां अगले कुछ वर्षों में लाखों पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे हरियाली दोबारा लौटने के साथ फरीदाबाद की नींव कही जाने वाली अरावली एक बार दोबारा से अपने रूप में दिखने लगेगी।
ग्रामीण स्तर पर मिलेगा रोजगार
ग्रीन वॉल परियोजना सिर्फ पर्यावरणीय पहल नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नया सहारा देगी। फरीदाबाद के गांवों में इस योजना के जरिये हजारों लोगों को पौधरोपण और रखरखाव के काम में रोजगार मिलेगा। वन विभाग स्थानीय पंचायतों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से कार्ययोजना तैयार कर रहा है।
भू-जल स्तर में होगा सुधार
अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना में न केवल पौधे लगाए जाएंगे, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखने के लिए विशेष इंतजाम भी होंगे। अरावली के पहाड़ी क्षेत्र में वर्षा जल संरक्षण संरचनाएं, चारागाह और मिट्टी कटाव रोकने के उपाय भी किए जाएंगे। इससे हरियाली लौटने के साथ भू-जल स्तर में भी काफी सुधार होगा।
प्रदूषण से भी मिलेगी बड़े स्तर पर राहत
फरीदाबाद देश के सबसे प्रदूषित शहरों में गिना जाता है। यहां धूल प्रदूषण और वायु गुणवत्ता की समस्या गंभीर है। विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली में हरियाली बढ़ने से शहर को सीधी राहत मिलेगी। वनस्पति से निकलने वाली ऑक्सीजन और धूल को रोकने वाली झाड़ियां हवा को साफ करने में मददगार होंगी। साथ ही गर्मियों में शहर के तापमान पर भी इसका असर देखने को मिलेगा।
बढ़ेगी भूमि की गुणवत्ता
परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे गंभीरता से लागू किया गया तो फरीदाबाद में पर्यावरणीय संतुलन काफी हद तक बहाल हो जाएगा। इस परियोजना से भू-जल स्तर बढ़ने के साथ कृषि योग्य भूमि में भी काफी सुधार होगा। जल स्तर बढ़ने से भूमि की गुणवत्ता में बदलाव देखने को मिलेगा।
लोगों की रहेगी अहम भूमिका
यह परियोजना काफी बड़े स्तर पर लागू की जा रही है। फरीदाबाद भी इस परियोजना वाले जिलों में शामिल किया गया है लेकिन जब तक लोग इसमें बढ़ चढ़ कर भाग नहीं लेंगे तब तक जमीनी स्तर पर अधिक असर नहीं दिखेगा। लोगों को नए पौधों का ध्यान रखने व पेड़ों के संरक्षण के लिए जागरूक होकर दूसरों को भी इसके लिए आगे लाना होगा।
इस प्रोजेक्ट को पहले गुरुग्राम व नूंह में शुरू किया जाएगा। इसके बाद फरीदाबाद में इसपर काम किया जाएगा। - सुरेंद्र डांगी डीएफओ फरीदाबाद
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24,990 हेक्टेयर जमीन वेटलैंड के रूप में चिन्हित की गई है
100 किमी से अधिक भाग फरीदाबाद मे है
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। पर्यावरण संरक्षण को गति देने और अरावली की सूखी जमीन को फिर से हरा-भरा बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। ग्रीन वॉल इंडिया प्रोजेक्ट के तहत फरीदाबाद को फिर से हरा भरा किया जाएगा। इस परियोजना का लक्ष्य सूखी पड़ी जमीन पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण कर हरियाली को पुनर्जीवित करना है।
फरीदाबाद का भूगोल अरावली की तराई से गहराई से जुड़ा है। यहां वर्षों से लगातार खनन, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और शहरी विस्तार ने पहाड़ियों की हरियाली को नष्ट कर दिया। इसके चलते हजारों हेक्टेयर जमीन अब पूरी तरह बंजर हो चुकी है। जानकारी के अनुसार, हरियाणा में 24,990 हेक्टेयर जमीन वेटलैंड के रूप में चिन्हित की गई है। इनमें से बड़ा हिस्सा फरीदाबाद और गुरुग्राम के अरावली क्षेत्र का है। वहीं, दूसरी तरफ अरावली में बने अवैध अतिक्रमण को भी तेजी से हटाया जा रहा है। इसका लाभ आने वाले दिनों में पर्यावरण को मिलना शुरू हो जाएगा।
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अब ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट के तहत इस बंजर भूमि को हरियाली से ढकने की योजना बनाई गई है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि फरीदाबाद में यह काम सबसे चुनौतीपूर्ण लेकिन असरदार साबित होगा, क्योंकि यहां की आबादी और औद्योगिक गतिविधियों के बीच हरित क्षेत्र लगातार सिमटता जा रहा है।
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यह परियोजना अफ्रीका की ग्रेट ग्रीन वॉल से प्रेरित है। केंद्र सरकार की तरफ से भारत में इसे अरावली की पहाड़ियों के साथ जोड़ा गया है। योजना के अनुसार, अरावली के दोनों सिरों में पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। इसका मकसद जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के साथ धूल प्रदूषण पर नियंत्रण करना और भूजल स्तर को सुधारना है।
फरीदाबाद में भी लाखों पौधे लगाने का लक्ष्य
अधिकारियों के मुताबिक, फरीदाबाद जिले में आने वाले सौ किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र को इस प्रोजेक्ट में प्राथमिकता दी गई है। यहां अगले कुछ वर्षों में लाखों पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे हरियाली दोबारा लौटने के साथ फरीदाबाद की नींव कही जाने वाली अरावली एक बार दोबारा से अपने रूप में दिखने लगेगी।
ग्रामीण स्तर पर मिलेगा रोजगार
ग्रीन वॉल परियोजना सिर्फ पर्यावरणीय पहल नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नया सहारा देगी। फरीदाबाद के गांवों में इस योजना के जरिये हजारों लोगों को पौधरोपण और रखरखाव के काम में रोजगार मिलेगा। वन विभाग स्थानीय पंचायतों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से कार्ययोजना तैयार कर रहा है।
भू-जल स्तर में होगा सुधार
अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना में न केवल पौधे लगाए जाएंगे, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखने के लिए विशेष इंतजाम भी होंगे। अरावली के पहाड़ी क्षेत्र में वर्षा जल संरक्षण संरचनाएं, चारागाह और मिट्टी कटाव रोकने के उपाय भी किए जाएंगे। इससे हरियाली लौटने के साथ भू-जल स्तर में भी काफी सुधार होगा।
प्रदूषण से भी मिलेगी बड़े स्तर पर राहत
फरीदाबाद देश के सबसे प्रदूषित शहरों में गिना जाता है। यहां धूल प्रदूषण और वायु गुणवत्ता की समस्या गंभीर है। विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली में हरियाली बढ़ने से शहर को सीधी राहत मिलेगी। वनस्पति से निकलने वाली ऑक्सीजन और धूल को रोकने वाली झाड़ियां हवा को साफ करने में मददगार होंगी। साथ ही गर्मियों में शहर के तापमान पर भी इसका असर देखने को मिलेगा।
बढ़ेगी भूमि की गुणवत्ता
परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे गंभीरता से लागू किया गया तो फरीदाबाद में पर्यावरणीय संतुलन काफी हद तक बहाल हो जाएगा। इस परियोजना से भू-जल स्तर बढ़ने के साथ कृषि योग्य भूमि में भी काफी सुधार होगा। जल स्तर बढ़ने से भूमि की गुणवत्ता में बदलाव देखने को मिलेगा।
लोगों की रहेगी अहम भूमिका
यह परियोजना काफी बड़े स्तर पर लागू की जा रही है। फरीदाबाद भी इस परियोजना वाले जिलों में शामिल किया गया है लेकिन जब तक लोग इसमें बढ़ चढ़ कर भाग नहीं लेंगे तब तक जमीनी स्तर पर अधिक असर नहीं दिखेगा। लोगों को नए पौधों का ध्यान रखने व पेड़ों के संरक्षण के लिए जागरूक होकर दूसरों को भी इसके लिए आगे लाना होगा।
इस प्रोजेक्ट को पहले गुरुग्राम व नूंह में शुरू किया जाएगा। इसके बाद फरीदाबाद में इसपर काम किया जाएगा। - सुरेंद्र डांगी डीएफओ फरीदाबाद