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Faridabad News: मोबाइल का अधिक इस्तेमाल याददाश्त कर रहा कमजोर
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भागदौड़ भरी जिंदगी में बच्चों को समय नहीं दे पा रहे अभिभावक, हाथों में थमा देते हैं मोबाइल
भारती दुबे
फरीदाबाद। भागदौड़ भरी जिंदगी में सभी इतना व्यस्त है कि बच्चों के साथ समय बिताने का समय ही नहीं है। अपने कार्य को पूरा करने के चक्कर में अभिभावक बच्चों के हाथों में मोबाइल थमा देते हैं, जिसका असर उनकी याददाश्त पर पड़ रहा है। छोटे बच्चे अपना सामान एक जगह रखकर भूल रहे हैं। इसके साथ ही पढ़ा हुआ और माता- पिता की कही हुई बात भी उन्हें याद नहीं रहती।
विशेषज्ञों की मानें तो ऐसा मोबाइल और लैपटॉप के अधिक इस्तेमाल से हो रहा है। छोटे बच्चे स्कूल से आते ही रात तक मोबाइल चलाते रहते हैं। इतना ही नहीं, बच्चों की आदत इतनी खराब हो चुकी है कि वे खाना भी तभी खाते हैं, जब उनके पास मोबाइल होता है। कई अभिभावकों का कहना है कि बिना मोबाइल के बच्चे खाना ही नहीं खाते हैं।
पढ़ाई में हो रहे कमजोर, बढ़ रहा चिड़चिड़ापन
निजी अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. तौसीफ ने बताया कि अस्पताल में आठ से दस बच्चे ऐसे पहुंच रहे हैं जो चीजों को रखकर भूल जाते हैं और स्कूल में पढ़ा हुआ याद नहीं रहता है। अभिभावक अस्पताल में बच्चों में चिड़चिड़ापन व हिंसक होने की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। इन सभी दिक्कतों का मुख्य कारण मोबाइल और लैपटॉप है। जिसकी वजह से याददाश्त कमजोर होने की परेशानी बढ़ती जा रही है। ऐसे में बच्चों का खास ख्याल रखने की आवश्यकता है।
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पांच से 14 साल तक के बच्चे अधिक प्रभावित
डॉ. तौसीफ ने बताया कि बच्चे स्कूल से आने के बाद सारा दिन मोबाइल में यू-ट्यूब चलाने और वीडियो गेम्स खेलने में निकाल रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा पांच से 14 साल तक के बच्चे शामिल हैं। मोबाइल की ब्लू लाइट सीधा उनकी आखों और दिमाग पर असर कर रही है। इससे बच्चों की आंखों की रोशनी भी कमजोर हो रही है और कम उम्र में ही छोटे बच्चे चश्मे लगा रहे हैं।
विशेषज्ञों ने अभिभावकों को दी चेतावनी
विशेषज्ञों ने उन अभिभावकों को चेतावनी दी है जो अपनी कार्यों में अधिक व्यस्त होने के कारण बच्चों को मोबाइल पकड़ा देते हैं। शुरूआत में सब सही लगता है लेकिन बाद में बच्चों को मोबाइल की आदत हो जाती है। इसका प्रभाव न केवल दिमाग और आंखों पर पड़ता है बल्कि आने वाले समय में घातक हो सकता है। कई बार वीडियो गेम्स खेलने के चक्कर में बच्चों को भविष्य में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि छोटे बच्चों को मोबाइल से दूर रखें।
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भारती दुबे
फरीदाबाद। भागदौड़ भरी जिंदगी में सभी इतना व्यस्त है कि बच्चों के साथ समय बिताने का समय ही नहीं है। अपने कार्य को पूरा करने के चक्कर में अभिभावक बच्चों के हाथों में मोबाइल थमा देते हैं, जिसका असर उनकी याददाश्त पर पड़ रहा है। छोटे बच्चे अपना सामान एक जगह रखकर भूल रहे हैं। इसके साथ ही पढ़ा हुआ और माता- पिता की कही हुई बात भी उन्हें याद नहीं रहती।
विशेषज्ञों की मानें तो ऐसा मोबाइल और लैपटॉप के अधिक इस्तेमाल से हो रहा है। छोटे बच्चे स्कूल से आते ही रात तक मोबाइल चलाते रहते हैं। इतना ही नहीं, बच्चों की आदत इतनी खराब हो चुकी है कि वे खाना भी तभी खाते हैं, जब उनके पास मोबाइल होता है। कई अभिभावकों का कहना है कि बिना मोबाइल के बच्चे खाना ही नहीं खाते हैं।
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पढ़ाई में हो रहे कमजोर, बढ़ रहा चिड़चिड़ापन
निजी अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. तौसीफ ने बताया कि अस्पताल में आठ से दस बच्चे ऐसे पहुंच रहे हैं जो चीजों को रखकर भूल जाते हैं और स्कूल में पढ़ा हुआ याद नहीं रहता है। अभिभावक अस्पताल में बच्चों में चिड़चिड़ापन व हिंसक होने की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। इन सभी दिक्कतों का मुख्य कारण मोबाइल और लैपटॉप है। जिसकी वजह से याददाश्त कमजोर होने की परेशानी बढ़ती जा रही है। ऐसे में बच्चों का खास ख्याल रखने की आवश्यकता है।
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पांच से 14 साल तक के बच्चे अधिक प्रभावित
डॉ. तौसीफ ने बताया कि बच्चे स्कूल से आने के बाद सारा दिन मोबाइल में यू-ट्यूब चलाने और वीडियो गेम्स खेलने में निकाल रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा पांच से 14 साल तक के बच्चे शामिल हैं। मोबाइल की ब्लू लाइट सीधा उनकी आखों और दिमाग पर असर कर रही है। इससे बच्चों की आंखों की रोशनी भी कमजोर हो रही है और कम उम्र में ही छोटे बच्चे चश्मे लगा रहे हैं।
विशेषज्ञों ने अभिभावकों को दी चेतावनी
विशेषज्ञों ने उन अभिभावकों को चेतावनी दी है जो अपनी कार्यों में अधिक व्यस्त होने के कारण बच्चों को मोबाइल पकड़ा देते हैं। शुरूआत में सब सही लगता है लेकिन बाद में बच्चों को मोबाइल की आदत हो जाती है। इसका प्रभाव न केवल दिमाग और आंखों पर पड़ता है बल्कि आने वाले समय में घातक हो सकता है। कई बार वीडियो गेम्स खेलने के चक्कर में बच्चों को भविष्य में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि छोटे बच्चों को मोबाइल से दूर रखें।