फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Faridabad News ›   'Even if you have to stay on the border, don't return to Afghanistan'

‘चाहे सीमा पर रहना पड़े, अफगानिस्तान मत लौटना’

Tue, 17 Aug 2021 06:44 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 17 Aug 2021 06:44 PM IST
विज्ञापन
'Even if you have to stay on the border, don't return to Afghanistan'
डॉक्टर मुनीरा कुरेशी । - फोटो : Faridabad
फरीदाबाद (मूर्ति दलाल)। अफगान मूल की 27 वर्षीय एमबीबीएस डॉक्टर मुनीरा कुरैशी अपने इलाज के लिए फरीदाबाद आई थीं। वह अब अपने ही घर जाने के नाम पर खौफजद़ा है। वह सोमवार को वतन वापसी के लिए तैयार थीं लेकिन एक रात पहले रविवार को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर तालिबान ने कब्जा कर लिया। घरवालों ने बेटी से फोन कर कहा, चाहे देश की सीमा पर रहना पड़े लेकिन वापस घर मत आना। यहां हालात बहुत खराब हैं।
विज्ञापन

घरवालों ने उन्हें बताया कि लोग घरों में कैद हैं। तुम हमारे लिए दुआ करो। घरवालों से हुई बातचीत को बताते हुए डॉक्टर की आंखें नम थीं। हाथ कांप रहे थे। वह बस ऊपर वाले से महफूज भविष्य की दुआएं करती हैं, यह भी नियति को मंजूर न हुआ। वह दूसरे देश में हैं लेकिन तालिबान का डर है।
विज्ञापन

मुनीरा खुद दिल की मरीज हैं। इलाज के लिए 15 दिन पहले फरीदाबाद आईं थीं। यहां के मेट्रो हार्ट इंस्टीट्यूट में उनका इलाज जारी है। अब 12 दिन बाद वीजा मान्यता खत्म हो जाएगी। इस बीच उनके देश में आतंकी संगठन का कब्जा उन्हें सोने नहीं दे रहा। कार्डिक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट डॉ. निधि नेगी बताती हैं कि वह अपनी मरीज के लिए चिंतित हैं। डॉक्टर मुनीरा के दिल की धड़कने सामान्य नहीं हैं। परेशानी इस बात की है कि चिंता और भावनाओं के हावी होने पर उनकी समस्या और बढ़ जाती है। ऐसे में घर और पूरे देश पर आतंकी संगठन का कब्जा परेशानी को दोगुना कर देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

डॉक्टर भाई की वर्दी उतरवाकर भगाया, हेड देश छोड़कर भागे
मुनीरा बताती हैं कि रविवार रात भाई का फोन आया। वह भी मुनीरा की तरह डॉक्टर है। भाई ने कहा कि रविवार को उनके संस्थान हेड ने कहा वर्दी उतारो। घर जाओ। अब काम पर वापस मत आना। अब तुम किसी संस्थान के लिए काम नहीं करते। यहां तालिबान ने कब्जा कर लिया है। इसलिए सभी कर्मचारियों का डेटाबेस रिकॉर्ड डिलीट कर दिया गया है। ऐसा कह कर संस्थान हेड उसी समय देश छोड़कर भाग गए। वह एक सरकारी संस्थान में कार्यरत थे।
‘वी-विल नॉट फॉरगिव यू बाइडन’
बीते तीन साल से सरकारी डॉक्टर के रूप में सेवाएं दे रहीं मुनीरा बीते दो दिन से सोशल मीडिया पर अपनी आवाज उठा रही हैं। मुनीरा (27) अन्य अफगानियों के लिए लगातार आवाज उठा रही हैं। अफगानी लोगों की आवाज बनकर ‘वी-विल नॉट फॉरगिव यू बाइडन’ ट्रेंड में है। मुनीरा जैसे अन्य अफगानिस्तान मूल के लोग तालिबानी कब्जे के लिए अमेरिका को दोषी मानते हैं। बतौर सरकारी कर्मचारी उन्हें एक महीने के लिए डिफेंस ट्रेनिंग दी गई थी। प्रशिक्षण अफगानी और अमेरिकी सेनाओं से मिला। अफगान में अंदरखाने लोग चर्चा कर रहे हैं कि देश की सेना ने अमेरिका के इशारे पर हथियार डाले हैं।

भारत सरकार से मदद की गुहार
अफगान मूल की बिटिया का कहना है कि वह हर साल भारत आती है। भारत की सरकार और लोग उसे पसंद हैं। उसके देश में भी लोग भारत की तारीफ करते हैं। अब उन्हें पड़ोसी मुल्क के नाते मदद चाहिए। बुरे हालातों में भारत में फंसे अफगानी मूल के लोगों को मदद चाहिए। अन्य देश तालिबानी आतंक को रोकने के लिए एकजुट हों। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मदद की गुहार लगाएं, सभी देश एकजुट होकर अफगानियों की मदद करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed