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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी उजड़ रही अरावली की गोद

Fri, 04 Jun 2021 10:46 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 04 Jun 2021 10:46 PM IST
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Even after the order of the Supreme Court, the lap of Aravali is getting destroyed
फरीदाबाद। कोरोना काल में पर्यावरण के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ी है। मौजूदा हालात ऐसे रहे कि लोगों को ऑक्सीजन तक के लिए भटकना पड़ा और कई मामलों में मरीजों की मौत हो गई। ऐसे में लोगों के जहन में पर्यावरण के प्रति सजगता आई है। वहीं अरावली में कई अवैध फार्म हाउस के अलावा छोटे-मोटे निर्माण कार्य भी लगातार चल रहे हैं। पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट (पीएलपीए) लागू होने के कारण अरावली में निर्माण तो दूर पेड़ की सूखी टहनी को भी उठाकर ले जाना जुर्म है। मगर पुलिस प्रशासन की लापरवाही के कारण सुप्रीम कोर्ट के आदेश भी बेअसर साबित हो रहे हैं। एनजीटी ने वन क्षेत्र के पुनरुद्धार करने का निर्देश दिया है, लेकिन कांत एंकलेव, खोरी गांव की तोड़फोड़ के बावजूद संरक्षण नहीं हो रहा है।
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पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट (पीएलपीए) संशोधित बिल पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। हाल ही में वन क्षेत्र की अधिसूचित जमीन पर बसे खोरी गांव में तोड़फोड़ की गई। इससे सैकड़ों लोगों के घर तो उजड़े लेकिन भूमाफियाओं पर कार्रवाई शून्य ही रही। वहीं, रायसीना से गुजराज तक फैली अरावली पर्वत श्रृंखला के अंतर्गत हरियाणा के पांच जिले फरीदाबाद, गुरुग्राम, मेवात, रेवाड़ी व महेंद्रगढ़ पड़ते हैं। वन क्षेत्र का अहम हिस्सा होने के बावजूद इसका दोहन हो रहा है। फरीदाबाद और गुरुग्राम के अंतर्गत अरावली का दायरा दिल्ली सीमा पर स्थित असोला भाटी से शुरू होकर फरीदाबाद के सूरजकुंड, बड़खल, मांगर बणी, पाली से होते हुए गुरुग्राम के दमदमा तक है। अरावली में ढाक, कतीरा, इंद्र जोउ, धोउ सहित कई तरह के पेड़ पौधों की अलग अलग किस्म मौजूद है। इसके अलावा अरावली में दुलर्भ वनस्पतियां मौजूद हैं। अरावली भूजल स्तर बढ़ाने का सबसे बड़ा स्रोत है। पर्यावरणविद मानते हैं कि हर रसाल राजस्थान की तरफ से आने वाली धूल भरी आंधी को भी अरावली की श्रंखलाएं ही रोकती है। वहीं इस समय जो शुद्ध हवा दिल्ली एनसीआर को मिल रही है वह भी अरावली ही देती है। बावजूद इसके अवैध कब्जे अरावली की गोद को उजाड़ रहे हैं।
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क्षेत्रवार वन क्षेत्र माप-स्कावर किलोमीटर में (फॉरेस्ट रिपोर्ट 2019)
जिला भौगोलिक क्षेत्र सघन वन वन क्षेत्र तुलनात्मक (भौगोलिक) वन क्षेत्र
फरीदाबाद 741 00 79.9 10
पलवल 1359 00 13 1.03
गुरुग्राम 1258 00 116 9.24
मेवात 1507 00 111 7.38
पेड़-पौधे ही देंगे ऑक्सीजन, वन क्षेत्र नहीं बढ़ा
फोरेस्ट सर्वे रिपोर्ट के अनुसार जिले 7000 हेक्टेयर में वन क्षेत्र है। इसमें फॉरेस्ट और ट्री एरिया लगभग कुल भौगोलिक क्षेत्र का 9 फीसदी है। वन क्षेत्र में विस्तार के लिए व्यापक काम करना होता है, ऐसा प्रयास अभी नहीं किया गया। जिले में पौधे लगाकर हरियाली बढ़ाने की दिशा में कार्य करने की तैयारी है। इसके लिए आगामी समय में पौधे लगाने की तैयारी है। - राजकुमार , जिला वन अधिकारी
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एनजीटी ने वर्ष 2018 में आदेश दिया कि तीन स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के लिए वन क्षेत्र बचाने की जरूरत है। इसमें आइडेंटिफाई, अवैध कब्जे मुक्त करो और जंगल का पुनरुद्धार करो। पीएलपीए 27 फरवरी 2019 को संशोधन राज्य सरकार ने किया। लेकिन दो दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्टे का ऑर्डर दे दिया। हालांकि सरकार अपने स्तर पर बंब फेंक चुका है, वह फटा नहीं। अधिकारियों को चाहिए कि इस वन क्षेत्र को बचाएं इससे मौजूदा समय में ऑक्सीजन की कमी जैसी समस्या से बचा जा सकता है। - चेतन अग्रवाल, पर्यावरणविद
सुझाव-
1. अरावली वनक्षेत्र में रहने वाले लोगों को पुनरस्थापित कर दूसरे रिहायशी क्षेत्र में जगह मुहैया करा वन क्षेत्र को बचाए।
2. अरावली वन क्षेत्र में 250 से अधिक औषधि पौधों की पहचान हो चुकी है। इनका संरक्षण कर एक बहुत बड़े नुकसान से मानव जाति को बचाया जा सकता है।
बिगड़े पारिस्थितिकी तंत्र के कारण पांच गावों का पानी इंसान तो क्या जानवरों के पीने लायक नहीं बचा। एनजीटी ने नजफगढ़ नाले के रिनोवेट करने के आदेश दिए हैं। साथ ही बरसाती नाले को कम न करने के आदेश दिए हैं। बीते कई सालों से इसके लिए हम प्रयास कर रहे थे। नगर निगम और जीएमडीए को एनजीटी ने आदेश दिए हैं कि 900 एकड़ के करीब पानी के जोहड़ को रीस्टोर करें। अब हाल ही में अरावली में वन्य जीवों से निकलने के लिए अंडरपास की डिमांड के लिए कई बार पत्राचार किया। बीते दो साल से इस कार्य में जुटे हैं। इस सप्ताह उम्मीद है कि इसे मंजूरी मिल जाएगी। - वैशाली राणा, पर्यावरणविद

सुझाव :
1. हर सोसायटी को रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को सक्रिय रखे।
2. कूड़े को जलाना अंतिम विकल्प होना चाहिए, इसकी रीसाइकलिंग पर जोर होना चाहिए।
3. हरियाली को बढ़ावा देने के लिए हर सेक्टर में लघु वन क्षेत्र की तर्ज पर ग्रीन बेल्ट विकसित की जानी चाहिए। यह पहले से नियमों में है।
सर्वे कर बना दिया था प्रोजेक्ट, नहीं चढ़ा सिरे
अरावली में वर्ष 2000 से पहले लगातार खनन हुआ। खनन के कारण पहाड़ धरातल में समा गए और जमीन से पानी निकल आया। अरावली में इस समय लगभग 50 से अधिक छोटी बड़ी झीलें मौजूद हैं, जिनका पानी बिल्कुल साफ है। इन झीलों को पर्यटन के लिहाज से इस्तेमाल करने के लिए वर्ष 2017 में सरकार ने ईको टूरिजम की संभावनाएं तलाशने को लेकर काम शुरू किया था। हरियाणा वन विकास निगम को सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया। वन विभाग ने अरावली पहाड़ में बनी झीलों का सर्वे किया और प्रोजेक्ट बना कर सरकार को सौंप दिया। इस परियोजना में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए झीलों में बोटिंग के अलावा जंगल सफारी, एडवेंचर कैंप आदि का आयोजन करने का प्रस्ताव था। वन विभाग के सूत्रों के अनुसार परियोजना तैयार करके सरकार के पास भेज दी गई थी, मगर सरकार ने उस पर कोई निर्णय नहीं लिया। इसी तरह बड़खल झील के जीर्णोद्धार का काम आज तक लंबित है।
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