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बैंक कर्मी बन खाते से उड़ाए ग्यारह लाख रुपये, मकान खरीदने के लिए लिया था लोन
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फरीदाबाद। साइबर ठगों ने बैंक कर्मी बनकर एक युवक से करीब साढ़े ग्यारह लाख रुपये ठग लिए। पीड़ित ने यह रकम मकान खरीदने के लिए बैंक से लोन ली थी। साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
बल्लभगढ़ के विजय नगर निवासी विजेंद्र सिंह ने बताया कि वे आईएमटी गुरुग्राम स्थित एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। वह अपने लिए एक प्लॉट खरीदना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने बैंक से नौ लाख 92 हजार का पर्सनल लोन लिया था। किसी कारण से उनके प्लॉट की खरीद नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने लोन राशि बैंक में वापस करनी चाही। जिसके लिए उन्होंने गूगल से बैंक का कस्टमर केयर नंबर निकाला और उस पर कॉल किया, लेकिन नंबर नहीं लग सका। कुछ देर बाद उनके पास एक फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को बैंक कर्मी बताया।
विजेंद्र ने कहा कि उसे लोन की राशि वापिस करनी है। साइबर ठग ने पीड़ित को क्विक सपोर्ट के नाम से एक एप डाउनलोड करने के लएि कहा। इसके बाद उसने बैंक की एप्लीकेशन डलवा कर उसे कुछ कोड भी दिए। कुछ देर में ही विजेंद्र के खाते से नौ लाख 92 हजार रुपये निकल गए। पीड़ित ने बताया कि उसके खाते में कंपनी ने दिवाली का बोनस भी डाला हुआ था। इसके अलावा उसका क्रेडिट कार्ड भी बैंक से जुड़ा हुआ था। साइबर ठग ने उनके क्रेडिट कार्ड से भी एक लाख 40 हजार रुपये निकाल लिए। उसने मामले की सूचना बैंक को दी और अपना खाता और कार्ड बंद करवाया।
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आरोप है कि उसने पुलिस को इसकी सूचना दे दी थी, लेकिन पांच महीने तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, साइबर थाना प्रभारी बसंत कुमार का कहना है कि मामले की शिकायत आने के बाद टीम पहले तथ्यों की जांच करती है। बैंक व अन्य जगह से मामले की पुष्टि के बाद केस दर्ज किया जाता है। इसमें कई बार समय लग जाता है। पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है।
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बल्लभगढ़ के विजय नगर निवासी विजेंद्र सिंह ने बताया कि वे आईएमटी गुरुग्राम स्थित एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। वह अपने लिए एक प्लॉट खरीदना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने बैंक से नौ लाख 92 हजार का पर्सनल लोन लिया था। किसी कारण से उनके प्लॉट की खरीद नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने लोन राशि बैंक में वापस करनी चाही। जिसके लिए उन्होंने गूगल से बैंक का कस्टमर केयर नंबर निकाला और उस पर कॉल किया, लेकिन नंबर नहीं लग सका। कुछ देर बाद उनके पास एक फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को बैंक कर्मी बताया।
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विजेंद्र ने कहा कि उसे लोन की राशि वापिस करनी है। साइबर ठग ने पीड़ित को क्विक सपोर्ट के नाम से एक एप डाउनलोड करने के लएि कहा। इसके बाद उसने बैंक की एप्लीकेशन डलवा कर उसे कुछ कोड भी दिए। कुछ देर में ही विजेंद्र के खाते से नौ लाख 92 हजार रुपये निकल गए। पीड़ित ने बताया कि उसके खाते में कंपनी ने दिवाली का बोनस भी डाला हुआ था। इसके अलावा उसका क्रेडिट कार्ड भी बैंक से जुड़ा हुआ था। साइबर ठग ने उनके क्रेडिट कार्ड से भी एक लाख 40 हजार रुपये निकाल लिए। उसने मामले की सूचना बैंक को दी और अपना खाता और कार्ड बंद करवाया।
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आरोप है कि उसने पुलिस को इसकी सूचना दे दी थी, लेकिन पांच महीने तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, साइबर थाना प्रभारी बसंत कुमार का कहना है कि मामले की शिकायत आने के बाद टीम पहले तथ्यों की जांच करती है। बैंक व अन्य जगह से मामले की पुष्टि के बाद केस दर्ज किया जाता है। इसमें कई बार समय लग जाता है। पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है।