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Faridabad News: छांयसा गांव में हेपिटाइटिस सी के आठ पॉजिटिव मरीज मिले
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-पलवल दौरे पर आईं स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने समीक्षा बैठक कर ली स्थिति की जानकारी
-स्वास्थ्य टीम ने 180 मरीजों की जांच की
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। सोमवार को भी रोग ग्रस्त गांव छांयसा में हेपिटाइटिस-सी के आठ मरीज और मिले। रविवार को इस रोग के 12 और शनिवार को 14 मरीज मिले थे। इस तरह प्रतिदिन हेपिटाइटिस-सी के मरीजों की पहचान हो रही है। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हेपेटाइटिस-सी के 180 मरीजों के टेस्ट किए जिनमें से आठ पॉजिटिव मिले। उनका इलाज शुरू कर दिया गया है।
पीएचसी छांयसा के इंचार्ज मेडिकल अफसर देवेंद्र जाखड़ ने बताया कि अधिकतर मरीज एक दूसरे के कांटेक्ट में थे। उन्होंने बताया कि विभाग की टीम ने सोमवार को 258 घरों में जाकर डोर-टू-डोर सर्वेक्षण और स्क्रीनिंग किया। 35 ओटी टेस्ट किए गए जिनमें से चार पॉजिटिव मिले हैं। मलेरिया के लिए 18 ब्लड स्लाइड तैयार की गईं। इसके अलावा गांव में लगाई गई विशेष ओपीडी में 204 मरीज आए। जिनके स्वास्थ्य का परीक्षण किया गया। हेपिटाइटिस-बी के 180 टेस्ट किए गए जिनमें से सात पॉजिटिव मिले। वहीं, 24 मरीजों को वैक्सीन लगाई गईं। वायरल बुखार के 15 टेस्ट किए गए। उन्होंने बताया कि गांव छांयसा में अब स्थिति नियंत्रण में है।
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आरती राव ने की समीक्षा बैठक--
स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने छांयसा गांव की स्थिति की समीक्षा की है। उन्होंने जिला सिविल सर्जन ने सत्येंद्र वशिष्ठ एवं जिला उपायुक्त हरीश कुमार वशिष्ठ से गांव में हो रही मौतों की जानकारी ली। इस बारे में स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने कहा कि छांयसा गांव में 11 केस सुनने को मिल रहे थे, लेकिन जब स्वास्थ्य विभाग व डीसी ने गांव का दौरा किया तो वहां सात मामले सामने आए है। जिनमें चार बच्चे व तीन बड़े है, जिनकी मौत हेपेटाइटिस बी व सी के कारण हुई बताई गई है। यह बीमारी गांव में किस वजह से बढ़ रही है, इसकी जांच की जा रही है।-- -- -- -- -- -- -- -- -- -
एक सुई दूसरे को लगाने से फैलती है बीमारी
यह बीमारी एक दूसरे को एक सुईं से इंजेक्शन लगाने से भी फैलती है। उन्होंने कहा कि गांवों में छोलाछाप डॉक्टर होते है, कहीं इन्हीं छोलाछाप डॉक्टरों ने तो इंजेक्शन नहीं लगाया है। इसके अलावा गांव के पीने के पानी की भी जांच कराई जा रही है। जरूरत पड़ने वे स्वयं भी गांव का दौरा कर लोगों से मिलेंगी, फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में जांच करने में जुटी हुई है।
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-स्वास्थ्य टीम ने 180 मरीजों की जांच की
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। सोमवार को भी रोग ग्रस्त गांव छांयसा में हेपिटाइटिस-सी के आठ मरीज और मिले। रविवार को इस रोग के 12 और शनिवार को 14 मरीज मिले थे। इस तरह प्रतिदिन हेपिटाइटिस-सी के मरीजों की पहचान हो रही है। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हेपेटाइटिस-सी के 180 मरीजों के टेस्ट किए जिनमें से आठ पॉजिटिव मिले। उनका इलाज शुरू कर दिया गया है।
पीएचसी छांयसा के इंचार्ज मेडिकल अफसर देवेंद्र जाखड़ ने बताया कि अधिकतर मरीज एक दूसरे के कांटेक्ट में थे। उन्होंने बताया कि विभाग की टीम ने सोमवार को 258 घरों में जाकर डोर-टू-डोर सर्वेक्षण और स्क्रीनिंग किया। 35 ओटी टेस्ट किए गए जिनमें से चार पॉजिटिव मिले हैं। मलेरिया के लिए 18 ब्लड स्लाइड तैयार की गईं। इसके अलावा गांव में लगाई गई विशेष ओपीडी में 204 मरीज आए। जिनके स्वास्थ्य का परीक्षण किया गया। हेपिटाइटिस-बी के 180 टेस्ट किए गए जिनमें से सात पॉजिटिव मिले। वहीं, 24 मरीजों को वैक्सीन लगाई गईं। वायरल बुखार के 15 टेस्ट किए गए। उन्होंने बताया कि गांव छांयसा में अब स्थिति नियंत्रण में है।
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आरती राव ने की समीक्षा बैठक
स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने छांयसा गांव की स्थिति की समीक्षा की है। उन्होंने जिला सिविल सर्जन ने सत्येंद्र वशिष्ठ एवं जिला उपायुक्त हरीश कुमार वशिष्ठ से गांव में हो रही मौतों की जानकारी ली। इस बारे में स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने कहा कि छांयसा गांव में 11 केस सुनने को मिल रहे थे, लेकिन जब स्वास्थ्य विभाग व डीसी ने गांव का दौरा किया तो वहां सात मामले सामने आए है। जिनमें चार बच्चे व तीन बड़े है, जिनकी मौत हेपेटाइटिस बी व सी के कारण हुई बताई गई है। यह बीमारी गांव में किस वजह से बढ़ रही है, इसकी जांच की जा रही है।
एक सुई दूसरे को लगाने से फैलती है बीमारी
यह बीमारी एक दूसरे को एक सुईं से इंजेक्शन लगाने से भी फैलती है। उन्होंने कहा कि गांवों में छोलाछाप डॉक्टर होते है, कहीं इन्हीं छोलाछाप डॉक्टरों ने तो इंजेक्शन नहीं लगाया है। इसके अलावा गांव के पीने के पानी की भी जांच कराई जा रही है। जरूरत पड़ने वे स्वयं भी गांव का दौरा कर लोगों से मिलेंगी, फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में जांच करने में जुटी हुई है।