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Faridabad News: महंगाई और निर्यात में गिरावट से डाई उद्योग संकट में

Sun, 07 Jun 2026 12:21 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jun 2026 12:21 AM IST
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Dye industry in trouble due to inflation and decline in exports
ऑयल बॉक्स से लेकर कार्बाइड और शीट मेटल तक के बाद बढ़े
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गौरव मिश्रा



फरीदाबाद। वैश्विक मंदी और निर्यात में आ रही गिरावट के बीच फरीदाबाद का डाई उद्योग बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है। कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी और एकदम से बढ़ी कर्मचारियों की सैलरी ने स्थानीय उद्यमियों की परेशानी और बढ़ा दी है।



उद्यमियों का कहना है कि ऑयल बॉक्स से लेकर कार्बाइड और शीट मेटल जैसी बुनियादी चीजों के दाम पिछले कुछ समय में 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं, जिससे उत्पादन लागत को संभालना अब उनके बस से बाहर होता जा रहा है।
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उद्यमियों के अनुसार, वैश्विक परिस्थितियों के कारण विदेशी ऑर्डर पहले ही न के बराबर मिल रहे हैं, रही-सही कसर घरेलू बाजार में बढ़ी महंगाई ने पूरी कर दी है। आंकड़ों पर नजर डालें, तो डाई बनाने में इस्तेमाल होने वाली हर छोटी-बड़ी चीज के दाम आसमान छू रहे हैं।
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इनमें जो ऑयल बॉक्स पहले 100 में उपलब्ध था, उसकी कीमत अब बढ़कर 150 हो चुकी है। इसके अलावा सबसे बड़ा झटका कार्बाइड की कीमतों से लगा है। पहले 1200 में मिलने वाला एक कार्बाइड बॉक्स अब लगभग ढाई गुना महंगा होकर 2800 का हो चुका है।



शीट मेटल के दाम 60 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 75 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। वहीं 500 में मिलने वाला कार्टिज हीटर अब 750 में मिल रहा है। बता दें कि कार्बाइड का उपयोग डाई की उम्र बढ़ाने, प्रोडक्शन की रफ्तार तेज करने और हर बार बिल्कुल सटीक साइज का प्रोडक्ट बनाने के लिए किया जाता है। वहीं कार्टिज हीटर्स का उपयोग धातु या प्लास्टिक को मनचाहा आकार देते समय डाई के तापमान को पूरी तरह नियंत्रित और स्थिर रखने के लिए किया जाता है।



कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाना मजबूरी, मार्जिन हुआ खत्म



कच्चे माल की मार के साथ-साथ उद्यमियों पर कुशल कारीगरों और कर्मचारियों को रोके रखने का भी भारी दबाव है। कर्मचारियों की सैलरी, जो पिछले वर्ष तक 10 से 12 हजार के बीच थी, उसे महज एक साल के भीतर बढ़ाकर 15 से 18 हजार रुपये तक करना पड़ा है।



उद्यमियों का कहना है कि इसके कारण हर तरफ से समस्याएं झेल रहे हैं। उन्होंने सरकार और संबंधित विभागों से इस दिशा में हस्तक्षेप करने और कच्चे माल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए नीति बनाने की मांग की है। बता दें कि जिले में करीब 100 औद्योगिक इकाइयां हैं, जो कि डाई बनाने का कार्य करती हैं।



बातचीत



एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार ठप है, तो दूसरी तरफ घरेलू स्तर पर उत्पादन लागत दोगुनी हो चुकी है। इस स्थिति में कंपनियों का लाभ मार्जिन पूरी तरह खत्म हो रहा है।-ब्रिजेश




कच्चे माल के दाम तो बढ़े ही हैं, साथ ही निर्यात भी बेहद मुश्किल हो रहा है। इससे व्यापार करने में बड़ी परेशानी आ रही है। पहले की तरह निर्यात होने लगे तो कम से कम इससे उबर सकते हैं।- दीपक रावत
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