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Faridabad News: पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बना रहे दुर्गा की मूर्ति
Wed, 25 Sep 2024 11:01 PM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
Updated Wed, 25 Sep 2024 11:01 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। सेक्टर-16 स्थित कालीबाड़ी मंदिर परिसर में आगामी शारदीय दुर्गा पूजा 2024 के लिए पिछले तीन महीनों से मंदिर प्रशासन तैयारी में जुटा हुआ है। दस दौरान सदस्य नए विषयों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे। महासचिव एके पंडित ने बताया कि इस वर्ष वह 36वां उत्सव मना रहे है। मूर्तिकार पांचू गोपाल पाल तीन महीने से मूर्ति तैयार करने में लगा हुए हैं। दुर्गा पूजा पंडाल के साथ-साथ मुख्य मूर्तियां पर्यावरण के अनुकूल सामग्री जैसे मिट्टी, बांस, कपड़े और बायोडिग्रेडेबल रंगों से बनाई गई है।
बारिश के मौसम को देखते हुए एक वॉटर प्रूफ पंडाल बनाया जा रहा है। अध्यक्ष डॉ. प्राणजीत भौमिक ने कहा इस थीम के पीछे का विचार पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ भारत की विरासत को संरक्षित करने का संदेश देना भी है। अभिजित गांगुली ने बताया कि यह उत्सव 1 अक्टूबर को महालया अमावस्या पूजा के साथ शुरू होगा और 12 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन समाप्त होगा। इस दौरान महिला कार्यकर्ता का विशेष योगदान रहेगा। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है, हालांकि यह एक फसल उत्सव भी है, जो देवी को पूरे जीवन और सृजन के पीछे मातृ शक्ति के रूप में मानता है। मां दुर्गा ने आकार बदलने वाले असुर, राक्षस महिषासुर से नौ दिनों तक युद्ध किया और आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी को उसका वध किया। हिंदू धर्म में दुर्गा पूजा में नौ दिनों तक नौ देवियों दुर्गा की पूजा की जाती है और दसवें दिन विजयादशमी मनाई जाती है।
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बल्लभगढ़। सेक्टर-16 स्थित कालीबाड़ी मंदिर परिसर में आगामी शारदीय दुर्गा पूजा 2024 के लिए पिछले तीन महीनों से मंदिर प्रशासन तैयारी में जुटा हुआ है। दस दौरान सदस्य नए विषयों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे। महासचिव एके पंडित ने बताया कि इस वर्ष वह 36वां उत्सव मना रहे है। मूर्तिकार पांचू गोपाल पाल तीन महीने से मूर्ति तैयार करने में लगा हुए हैं। दुर्गा पूजा पंडाल के साथ-साथ मुख्य मूर्तियां पर्यावरण के अनुकूल सामग्री जैसे मिट्टी, बांस, कपड़े और बायोडिग्रेडेबल रंगों से बनाई गई है।
बारिश के मौसम को देखते हुए एक वॉटर प्रूफ पंडाल बनाया जा रहा है। अध्यक्ष डॉ. प्राणजीत भौमिक ने कहा इस थीम के पीछे का विचार पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ भारत की विरासत को संरक्षित करने का संदेश देना भी है। अभिजित गांगुली ने बताया कि यह उत्सव 1 अक्टूबर को महालया अमावस्या पूजा के साथ शुरू होगा और 12 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन समाप्त होगा। इस दौरान महिला कार्यकर्ता का विशेष योगदान रहेगा। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है, हालांकि यह एक फसल उत्सव भी है, जो देवी को पूरे जीवन और सृजन के पीछे मातृ शक्ति के रूप में मानता है। मां दुर्गा ने आकार बदलने वाले असुर, राक्षस महिषासुर से नौ दिनों तक युद्ध किया और आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी को उसका वध किया। हिंदू धर्म में दुर्गा पूजा में नौ दिनों तक नौ देवियों दुर्गा की पूजा की जाती है और दसवें दिन विजयादशमी मनाई जाती है।
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