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हड़ताल पर रहे डॉक्टर, दवा-परामर्श को भटकते रहे बच्चे-बुजुर्ग-महिलाएं
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फरीदाबाद सिविल अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा हड़ताल करने पर खाली पड़ा पंजीकरण काउंटर ।
- फोटो : Faridabad
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फरीदाबाद। बीके सिविल अस्पताल सहित पूरे जिले में बृहस्पतिवार को सरकारी डॉक्टर हड़ताल पर रहे। हड़ताल के कारण इलाज ही नहीं मरीजों को दवा और परामर्श भी उपलब्ध नहीं हो सका। आक्रोशित मरीज दवा के लिए अस्पताल परिसर में भटकते रहे। ज्यादातर मरीजों में बुजुर्ग दंपती, महिलाएं व बच्चे थे। दूरदराज इलाकों से अपने मर्ज का इलाज कराने पहुंचे यह मरीज समझ नहीं पा रहे थे कि बिना पूर्व सूचना के हड़ताल क्यों हो गई। कुछ मरीज ऐसे भी थे जो बुधवार जांच के बाद आगे के इलाज के लिए बृहस्पतिवार को अस्पताल पहुंचे थे।
एक साल की बच्ची के शरीर पर छाले, खुजली से लाल पड़ चुके पैर की शिकायत लेकर बच्ची को दिखाने के लिए बीके अस्पताल पहुंची उसकी मां विमला बेहद परेशान थी। विमला ने बताया कि उसका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। बच्ची को रातोंरात यह अजीब समस्या हो गई। सरकारी अस्पताल पहुंची तो पता चला डॉक्टरों की हड़ताल है। विमला अपनी बच्ची को लेकर अस्पताल में इलाज के लिए भटकती रही।
नंगला से गले की सूजन का इलाज कराने आए दिलेर सिंह ने बताया कि बुधवार दोपहर वह बीके सिविल अस्पताल से दांत दर्द की दवा लेकर गया था। दवा खाई तो देर रात पूरे मुंह पर सूजन आ गई। बृहस्पतिवार को अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टरों की हड़ताल थी। ओल्ड फरीदाबाद से बीके सिविल अस्पताल में इलाज कराने बुजुर्ग दंपती मानचंद और शकुंतला भी पहुंचे थे। शकुंतला ने बताया कि मानचंद को पैर की चमड़ी में अजीब तरह की खुजली है। इससे पूरे पैर की चमड़ी काली पड़ चुकी है। बुधवार डॉक्टरों ने मानचंद को दवा दी थी। उससे आराम नहीं हुआ। अब दोबारा जांच के लिए पहुंचे तो डॉक्टरों की हड़ताल मिली।
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दंपती ने बताया कि किराए के रुपये मांग कर वह सरकारी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे थे। जोड़ों के दर्द से परेशान, चलने में असमर्थ दो बुजुर्ग महिलाएं भी इस दौरान सरकारी कार्यशैली पर सवाल उठाती नजर आई। सेक्टर-23 से आई गीता मिश्रा और संध्या पांडे ने बताया कि दोनों के पैर के जोड़ काफी दर्द करते हैं। हालत ऐसी थी कि चलने के लिए एक दूसरे को सहारा दे रही थी। गीता मिश्रा ने बताया कि वह बुधवार को भी अस्पताल में इलाज के लिए आई थी। इस दौरान कुछ जांच के लिए लिखा गया था। इसलिए उसे अगले दिन बृहस्पतिवार को बुलाया गया तो वह संध्या पांडे को भी इलाज के लिए साथ ले आई। गीता ने बताया कि दोनों जब अस्पताल पहुंचे तो ओपीडी में ताला जड़ा था मालूम हुआ डॉक्टर हड़ताल पर हैं।
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एक साल की बच्ची के शरीर पर छाले, खुजली से लाल पड़ चुके पैर की शिकायत लेकर बच्ची को दिखाने के लिए बीके अस्पताल पहुंची उसकी मां विमला बेहद परेशान थी। विमला ने बताया कि उसका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। बच्ची को रातोंरात यह अजीब समस्या हो गई। सरकारी अस्पताल पहुंची तो पता चला डॉक्टरों की हड़ताल है। विमला अपनी बच्ची को लेकर अस्पताल में इलाज के लिए भटकती रही।
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नंगला से गले की सूजन का इलाज कराने आए दिलेर सिंह ने बताया कि बुधवार दोपहर वह बीके सिविल अस्पताल से दांत दर्द की दवा लेकर गया था। दवा खाई तो देर रात पूरे मुंह पर सूजन आ गई। बृहस्पतिवार को अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टरों की हड़ताल थी। ओल्ड फरीदाबाद से बीके सिविल अस्पताल में इलाज कराने बुजुर्ग दंपती मानचंद और शकुंतला भी पहुंचे थे। शकुंतला ने बताया कि मानचंद को पैर की चमड़ी में अजीब तरह की खुजली है। इससे पूरे पैर की चमड़ी काली पड़ चुकी है। बुधवार डॉक्टरों ने मानचंद को दवा दी थी। उससे आराम नहीं हुआ। अब दोबारा जांच के लिए पहुंचे तो डॉक्टरों की हड़ताल मिली।
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दंपती ने बताया कि किराए के रुपये मांग कर वह सरकारी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे थे। जोड़ों के दर्द से परेशान, चलने में असमर्थ दो बुजुर्ग महिलाएं भी इस दौरान सरकारी कार्यशैली पर सवाल उठाती नजर आई। सेक्टर-23 से आई गीता मिश्रा और संध्या पांडे ने बताया कि दोनों के पैर के जोड़ काफी दर्द करते हैं। हालत ऐसी थी कि चलने के लिए एक दूसरे को सहारा दे रही थी। गीता मिश्रा ने बताया कि वह बुधवार को भी अस्पताल में इलाज के लिए आई थी। इस दौरान कुछ जांच के लिए लिखा गया था। इसलिए उसे अगले दिन बृहस्पतिवार को बुलाया गया तो वह संध्या पांडे को भी इलाज के लिए साथ ले आई। गीता ने बताया कि दोनों जब अस्पताल पहुंचे तो ओपीडी में ताला जड़ा था मालूम हुआ डॉक्टर हड़ताल पर हैं।