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बिना व्हीलचेयर प्रमाणपत्र के लिए भटक रहे दिव्यांग, स्वास्थ्य विभाग की ओल्ड बिल्डिंग में गोद में उठाए दिखे परिजन

Wed, 08 Jun 2022 10:36 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jun 2022 10:36 PM IST
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Divyang wandering without wheelchair certificate, relatives seen in the old building of Health Department
फरीदाबाद बीके नागरिक अस्पताल में गोद में उठाकर ले जाते तीमारदार । - फोटो : Faridabad
फरीदाबाद। स्वास्थ्य विभाग से दिव्यांगता प्रमाण पत्र लेने के लिए शारीरिक-मानसिक रूप से परेशान लोग अव्यवस्था की मार झेलने को मजबूर हैं। चलने में अक्षम लोगों के लिए न तो व्हीलचेयर की व्यवस्था है और न ही कोई सहायक उनकी मदद के लिए मौजूद है। बुधवार को प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आए ज्यादातर दिव्यांग स्वास्थ्य विभाग की अव्यवस्था के कारण इधर-उधर भटकते नजर आए।
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स्वास्थ्य विभाग की ओल्ड बिल्डिंग में बुधवार को दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पहुंचे लोगों में एक ऐसा दिव्यांग भी शामिल था, जो चल नहीं सकता था। उसके पड़ोस में रहने वाले एक रिक्शा चालक ने उसे किसी तरह स्वास्थ्य विभाग के गेट पर छोड़ दिया। यहां आकर उसे पता चला कि दिव्यांगों की सहायता के लिए कोई सहायक या व्हीलचेयर मौजूद नहीं है। ऐसे में रिक्शा चालक ने दिव्यांग को गोद में उठाकर डॉक्टर के कमरे तक पहुंचाया। इसी तरह अपनी बारी का इंतजार कर रहे लोगों में कई खामियां बताकर खाली हाथ ही लौटा दिया गया। मौजूद दिव्यांग व उनके परिजनों ने बताया कि कई बार डॉक्टर से परामर्श के अनुसार जांच के लिए इतने चक्कर काटने पड़ते हैं कि प्रमाण पत्र मिलने में ही कई माह लग जाते हैं। उधर, कई लोगों ने बताया कि डॉक्टर कक्ष तक पहुंचने के लिए भी दो से तीन सप्ताह तक विभाग के चक्कर काटने पड़ते हैं। कभी डॉक्टर जल्दी उठ जाते हैं तो कभी कागजी खामियां बताकर फिर से आने के लिए कह दिया जाता है। सेक्टर-17 निवासी मकसूदन ने बताया कि वह चल फिर नहीं सकती है। बड़ी मुश्किल से उसका नंबर आया। वह अपनी बारी के लिए पिछले तीन महीने से अस्पताल के चक्कर काट रही है।
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दिव्यांगों के कक्ष में पंखा न पेयजल
कमरा नंबर दस के बाहर कार्ड बनवाने के लिए पहुंचे दिव्यांगों के लिए कुर्सी और पंखे की कोई व्यवस्था नहीं थी। गर्मी में बेहाल दिव्यांग और उनके परिजन फर्श पर बैठे नजर आए। ऐसे में कई दिव्यांग प्यास पर काबू कर डॉक्टरसे जांच के लिए अपनी बारी का इंतजार करते रहे। यहां महिला दिव्यांगों के लिए बने शौचालयों पर ताले लटके मिले।
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दिव्यांग पड़ोसी के लिए काट रहा हूं चक्कर
पड़ोस में रहने वाले शिव सिंह के दोनों पैर काम नहीं करते हैं। कार्ड बनवाने के लिए जैसे-तैसे अस्पताल पहुंचते हैं। वह पिछले दो महीने से अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। डॉक्टर हर बार एक नई जांच लिख देते हैं। सोनू ने बताया कि व्हील चेयर मांगने पर कर्मचारी धमकाकर वापस भेज देते हैं।
प्रमाणपत्र के लिए मंत्री तक से लगाई गुहार
बेटी 13 साल की है और बोलने में असमर्थ है। कार्ड बनवाने के लिए पिछले एक महीने से अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। ऐसे में कैबिनेट मंत्री मूलचंद शर्मा से गुहार लगाई। उन्होंने लिखित में आश्वासन के साथ अधिकारियों से जल्द प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश दिए। इसके बावजूद भटकने को मजबूर हैं। - संजीत पांडे, सेक्टर-22

पहले से बढ़ाई गई हैं सुविधा
पहले केवल एक सप्ताह में एक दिन ही डॉक्टर प्रमाण पत्र बनाते थे। अब सप्ताह में तीन दिन यह काम किया जा रहा है। इसके लिए दो डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। दिव्यांगों की मदद के लिए और काम किए जाएंगे। - डॉ विनय गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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