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Faridabad News: वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका पर चर्चा
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सतत विकास के लिए उभरती जैव प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जेसी बोस विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए के जीवन विज्ञान विभाग ने सतत विकास के लिए उभरते जैव प्रौद्योगिकी पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। यह संगोष्ठी जलवायु, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता जैसे वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका का पता लगाने के लिए है।
नई दिल्ली के पैनासिया बायोटेक लिमिटेड के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. अमूल्या पांडा उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि रहे। राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक प्रो. सचिन तियोटिया ने तेजी से प्रगति और जैविक विज्ञान में नवीन, स्वदेशी समाधानों को बढ़ावा देने के मिशन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह संगोष्ठी अंतर-अनुशासनिक सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है, जो अकादमिया, उद्योग और नीति को जोड़कर सतत जैव प्रौद्योगिकीय प्रगति को गति प्रदान करता है।
कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने जैव प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी क्षमता पर जोर दिया, जो संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक है। उन्होंने कहा कि व्यवधान आपूर्ति शृंखलाओं को तोड़ते हैं, खाद्य एवं ऊर्जा की कमी को गहराते हैं और लाखों लोगों के विस्थापन का कारण बनते हैं। इसके पुनर्बहाली के लिए जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका अहम हो जाती है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का जैव प्रौद्योगिकी के साथ क्रांतिकारी एकीकरण को वैश्विक संकटों जैसे जलवायु परिवर्तन, खाद्य असुरक्षा और स्वास्थ्य कमजोरियों का सामना करने के लिए एक आधारशिला के रूप में रेखांकित किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जेसी बोस विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए के जीवन विज्ञान विभाग ने सतत विकास के लिए उभरते जैव प्रौद्योगिकी पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। यह संगोष्ठी जलवायु, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता जैसे वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका का पता लगाने के लिए है।
नई दिल्ली के पैनासिया बायोटेक लिमिटेड के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. अमूल्या पांडा उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि रहे। राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक प्रो. सचिन तियोटिया ने तेजी से प्रगति और जैविक विज्ञान में नवीन, स्वदेशी समाधानों को बढ़ावा देने के मिशन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह संगोष्ठी अंतर-अनुशासनिक सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है, जो अकादमिया, उद्योग और नीति को जोड़कर सतत जैव प्रौद्योगिकीय प्रगति को गति प्रदान करता है।
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कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने जैव प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी क्षमता पर जोर दिया, जो संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक है। उन्होंने कहा कि व्यवधान आपूर्ति शृंखलाओं को तोड़ते हैं, खाद्य एवं ऊर्जा की कमी को गहराते हैं और लाखों लोगों के विस्थापन का कारण बनते हैं। इसके पुनर्बहाली के लिए जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका अहम हो जाती है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का जैव प्रौद्योगिकी के साथ क्रांतिकारी एकीकरण को वैश्विक संकटों जैसे जलवायु परिवर्तन, खाद्य असुरक्षा और स्वास्थ्य कमजोरियों का सामना करने के लिए एक आधारशिला के रूप में रेखांकित किया।
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