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बिजली बिल में सिक्योरिटी चार्ज बढ़ाने पर किया प्रदर्शन

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 07 Apr 2021 11:04 PM IST
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फरीदाबाद नगर निगम मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करते ज्वाइंट ट्रेड यूनियन के कार्यकर्ता ।
फरीदाबाद नगर निगम मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करते ज्वाइंट ट्रेड यूनियन के कार्यकर्ता । - फोटो : Faridabad

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फरीदाबाद। बिजली बिल में सिक्योरिटी चार्ज बढ़ाने और गांव खोरी में तोड़फोड़ के विरोध में ज्वाइंट ट्रेड यूनियन के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को नगर निगम कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अग्रिम खपत के नाम पर बिजली उपभोक्ताओं से अतिरिक्त चार्ज के रूप में पांच हजार रुपये की वसूली को लेना बंद करो, खोरी और जमाई कॉलोनी में तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक लगाओ के नारे लगाए। बाद में उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहरलाल के नाम उपायुक्त यशपाल यादव को ज्ञापन सौंपा और सरकार से सिक्योरिटी चार्ज वापिस लेने की मांग की।
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बुधवार सुबह ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक), सेंटर ऑफ ट्रेड यूनियन कांग्रेस (सीटू), इंडियन ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक), हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), इंडियन काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन (आईसीटीआईयू) और बैंकों के कार्यकर्ता नगर निगम मुख्यालय पर एकत्रित हुए। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व एटक के मिथलेश कुमार, सीटू के विजय झा, एचएमएस डीएन मिश्रा, इंटक के हुकम चंद बेनीवाल, आईसीटी यूके कामरेड जवाहरलाल ने संयुक्त रूप से किया। एटक के प्रधान आरएन सिंह ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम पर उपभोक्ताओं के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मीटर कनेक्शन के साथ ही बिजली विभाग ने सिक्योरिटी के नाम पर अतिरिक्त जमा राशि पहले ही ले रखी है। अब फिर से उपभोक्ताओं से यह राशि वसूली जा रही है। इसको बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सीटू के जिला उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह डंगवाल ने जिला प्रशासन पर गांव खोरी और जमाई कॉलोनी में तोड़फोड़ करने की निंदा की। उन्होंने कहा कि नगर निगम के अधिकारी पहले अरावली में बने अवैध फार्म हाउस पर कार्रवाई करें। कार्रवाई के नाम पर निगम को गरीब लोगों के ही घर दिखाई देते हैं। जिन आदेशों का निगम हवाला देता है वह सभी के लिए एक समान लागू होते हैं। सर्वोच्च न्यायालय और एनजीटी का फैसला सभी पर एक समान लागू होना चाहिए। निगम के अधिकारी तोड़फोड़ करने में दोहरे मानदंड अपना रहे हैं। उन्होंने किसान आंदोलन का भी समर्थन करते हुए सरकार से किसानों के खिलाफ बनाए गए तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग की।

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