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Faridabad News: नेहरू कॉलोनी में फिर हो सकती है तोड़फोड़, लोगों में बढ़ी चिंता
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आशियाने टूटने के बाद में खुले आसमान के नीचे सोते नेहरू कॉलोनी के निवासी। फाइल फोटो।
खुले आसमान के नीचे रात गुजार रहे हैं तोड़फोड़ से प्रभावित लोग
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। नेहरू कॉलोनी में नगर निगम की ओर से अवैध कब्जों पर की गई तोड़फोड़ के बाद अब एक बार फिर कार्रवाई की आशंका से लोगों में डर का माहौल है। जिन परिवारों के मकान पहले ही टूट चुके हैं उनमें से कई अब भी खुले आसमान के नीचे या मलबे के बीच रात गुजार रहे हैं। वहीं जिन हिस्सों में अभी कार्रवाई नहीं हुई है वहां रहने वाले लोग भी अपने घरों को लेकर चिंतित हैं।
कॉलोनी में अब भी कई परिवार अपने उजड़े आशियाने के मलबे के बीच खाट डालकर रात बिता रहे हैं। दिनभर की तपती गर्मी, बरसात और रात में मच्छरों व असुरक्षा के बीच गुजर रही जिंदगी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए हालात सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जबकि खुले में रहने के कारण बुजुर्ग स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दिनों तक प्रशासन की ओर से पोर्टेबल शौचालय की व्यवस्था की गई थी लेकिन अब वह सुविधा भी हटा ली गई है। ऐसे में महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। लोगों का कहना है कि सिर पर छत नहीं है और अब बुनियादी सुविधाएं भी खत्म हो गई हैं।
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करीब 300 मकानों पर चल चुका है बुलडोजर
गौरतलब है कि नगर निगम ने नेहरू कॉलोनी में करीब 300 मकानों को ध्वस्त किया था। प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने के लिए यह अभियान चलाया गया। कब्जा हटने के बाद फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) यहां सड़क चौड़ीकरण, ग्रिल लगाने और ग्रीन बेल्ट विकसित करने का कार्य करेगा।
आगे कार्रवाई की आशंका बरकरार
सूत्रों के अनुसार नगर निगम की ओर से नेहरू कॉलोनी में आगे भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। इसी आशंका के चलते लोग लगातार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मिलकर कार्रवाई रोकने तथा पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
छह लोगों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया
स्थानीय लोगों के अनुसार कॉलोनी के छह लोगों ने अपने मकानों को लेकर अदालत का रुख किया था। लोगों का कहना है कि मामले में सुनवाई हो चुकी है और अब वे विस्तृत आदेश की प्रति मिलने का इंतजार कर रहे हैं। आदेश की प्रति उपलब्ध होने के बाद ही आगे की कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। इसी बीच कॉलोनी के अन्य लोगों में भी संभावित कार्रवाई को लेकर चिंता बनी हुई है।
हमने वर्षों की मेहनत और पाई-पाई जोड़कर अपना घर बनाया था, लेकिन नगर निगम ने एक ही दिन में उसे तोड़ दिया। अब हमारे सिर पर छत नहीं है और हम सड़क पर रहने को मजबूर हैं।- गणेश
घर टूटने के बाद मजबूरी में खुले आसमान के नीचे रहना पड़ रहा है। रहने के लिए कोई दूसरी व्यवस्था नहीं है। अब परिवार का भविष्य सबसे बड़ी चिंता है।- राकेश
घर टूटने के बाद किराये के मकान में रहना पड़ रहा है। महंगाई के दौर में घर का खर्च चलाना मुश्किल है, ऊपर से किराया अलग देना पड़ रहा है।- अमित शर्मा
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। नेहरू कॉलोनी में नगर निगम की ओर से अवैध कब्जों पर की गई तोड़फोड़ के बाद अब एक बार फिर कार्रवाई की आशंका से लोगों में डर का माहौल है। जिन परिवारों के मकान पहले ही टूट चुके हैं उनमें से कई अब भी खुले आसमान के नीचे या मलबे के बीच रात गुजार रहे हैं। वहीं जिन हिस्सों में अभी कार्रवाई नहीं हुई है वहां रहने वाले लोग भी अपने घरों को लेकर चिंतित हैं।
कॉलोनी में अब भी कई परिवार अपने उजड़े आशियाने के मलबे के बीच खाट डालकर रात बिता रहे हैं। दिनभर की तपती गर्मी, बरसात और रात में मच्छरों व असुरक्षा के बीच गुजर रही जिंदगी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए हालात सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जबकि खुले में रहने के कारण बुजुर्ग स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दिनों तक प्रशासन की ओर से पोर्टेबल शौचालय की व्यवस्था की गई थी लेकिन अब वह सुविधा भी हटा ली गई है। ऐसे में महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। लोगों का कहना है कि सिर पर छत नहीं है और अब बुनियादी सुविधाएं भी खत्म हो गई हैं।
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करीब 300 मकानों पर चल चुका है बुलडोजर
गौरतलब है कि नगर निगम ने नेहरू कॉलोनी में करीब 300 मकानों को ध्वस्त किया था। प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने के लिए यह अभियान चलाया गया। कब्जा हटने के बाद फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) यहां सड़क चौड़ीकरण, ग्रिल लगाने और ग्रीन बेल्ट विकसित करने का कार्य करेगा।
आगे कार्रवाई की आशंका बरकरार
सूत्रों के अनुसार नगर निगम की ओर से नेहरू कॉलोनी में आगे भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। इसी आशंका के चलते लोग लगातार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मिलकर कार्रवाई रोकने तथा पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
छह लोगों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया
स्थानीय लोगों के अनुसार कॉलोनी के छह लोगों ने अपने मकानों को लेकर अदालत का रुख किया था। लोगों का कहना है कि मामले में सुनवाई हो चुकी है और अब वे विस्तृत आदेश की प्रति मिलने का इंतजार कर रहे हैं। आदेश की प्रति उपलब्ध होने के बाद ही आगे की कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। इसी बीच कॉलोनी के अन्य लोगों में भी संभावित कार्रवाई को लेकर चिंता बनी हुई है।
हमने वर्षों की मेहनत और पाई-पाई जोड़कर अपना घर बनाया था, लेकिन नगर निगम ने एक ही दिन में उसे तोड़ दिया। अब हमारे सिर पर छत नहीं है और हम सड़क पर रहने को मजबूर हैं।- गणेश
घर टूटने के बाद मजबूरी में खुले आसमान के नीचे रहना पड़ रहा है। रहने के लिए कोई दूसरी व्यवस्था नहीं है। अब परिवार का भविष्य सबसे बड़ी चिंता है।- राकेश
घर टूटने के बाद किराये के मकान में रहना पड़ रहा है। महंगाई के दौर में घर का खर्च चलाना मुश्किल है, ऊपर से किराया अलग देना पड़ रहा है।- अमित शर्मा

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