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Faridabad News: पीयूसी सर्टिफिकेट बनवाने की समयसीमा 30 सितंबर तक बढ़ाई
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अन्य मुद्दों पर कोई राहत नहीं मिलने से उद्यमी परेशान
संवाद न्यूज एजेंस
फरीदाबाद। जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण से जुड़े कड़े नियमों और जटिल प्रक्रियाओं ने उद्यमियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विशेषकर सभी औद्योगिक इकाइयों के लिए पीयूसी (प्रदूषण नियंत्रण) सर्टिफिकेट अनिवार्य किए जाने के बाद से उद्यमी ज्यादा परेशान हैं। हालांकि, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने उद्यमियों की मांग पर सर्टिफिकेट बनवाने की अब 30 सितंबर कर दी है, लेकिन अन्य गंभीर मुद्दों पर अब तक कोई राहत नहीं मिलने से उद्यमी परेशान हैं।
बीते 15 जुलाई को फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एफआईए) के एक प्रतिनिधिमंडल ने सीपीसीबी के अधिकारियों से मुलाकात की थी। इस दौरान बैठक में उद्यमियों ने सर्टिफिकेट की समय सीमा 31 अक्टूबर तक बढ़ाने का आग्रह किया था। बोर्ड ने आंशिक राहत देते हुए समय सीमा 30 सितंबर तय कर दी, लेकिन उद्योगों की अन्य प्रमुख मांगों पर बोर्ड की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है।
उद्यमियों की मुख्य समस्याएं और मांगें
भारी लागत और मनमानी : उद्योगों को अपनी इकाइयों का प्रदूषण सर्टिफिकेट बनवाने के लिए 1 से 2 लाख रुपये तक का भारी खर्च उठाना पड़ रहा है। अधिकृत जांच एजेंसियों की संख्या बेहद कम होने के कारण उद्यमियों को मनमाने दाम चुकाने पड़ रहे हैं।
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जटिल प्रक्रिया : उद्यमियों की मांग है कि वाहनों की तर्ज पर उद्योगों के लिए भी प्रदूषण जांच और सर्टिफिकेट बनवाने की प्रक्रिया को पूरी तरह सरल और सुगम बनाया जाए।
ओसीएम और रिपोर्टिंग का बोझ : एसोसिएशन ने ओसीएम (ओवरहालिंग, कॉस्ट और अनुपालन लागत) के भारी-भरकम मूल्यों को कम करने तथा वित्तीय पर्याप्तता रिपोर्टिंग की जटिल प्रक्रिया को आसान बनाने की पुरजोर मांग की है।
जिले में छोटी-बड़ी 36 हजार से अधिक इकाइयां हैं
बता दें कि जिले में छोटी-बड़ी 36 हजार से अधिक इकाइयां हैं। इनमें से करीब 20 हजार इकाइयों को अलग-अलग प्रकार से प्रदूषण के कठिन नियमों के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है। फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के उद्यमियों का कहना है कि एक तरफ जहां वैश्विक मंदी और अन्य व्यावसायिक चुनौतियां पहले ही उद्योगों की कमर तोड़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रदूषण अनुपालन से जुड़े महंगे और जटिल नियम व्यवसाय को चलाना मुश्किल कर रहे हैं।
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संवाद न्यूज एजेंस
फरीदाबाद। जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण से जुड़े कड़े नियमों और जटिल प्रक्रियाओं ने उद्यमियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विशेषकर सभी औद्योगिक इकाइयों के लिए पीयूसी (प्रदूषण नियंत्रण) सर्टिफिकेट अनिवार्य किए जाने के बाद से उद्यमी ज्यादा परेशान हैं। हालांकि, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने उद्यमियों की मांग पर सर्टिफिकेट बनवाने की अब 30 सितंबर कर दी है, लेकिन अन्य गंभीर मुद्दों पर अब तक कोई राहत नहीं मिलने से उद्यमी परेशान हैं।
बीते 15 जुलाई को फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एफआईए) के एक प्रतिनिधिमंडल ने सीपीसीबी के अधिकारियों से मुलाकात की थी। इस दौरान बैठक में उद्यमियों ने सर्टिफिकेट की समय सीमा 31 अक्टूबर तक बढ़ाने का आग्रह किया था। बोर्ड ने आंशिक राहत देते हुए समय सीमा 30 सितंबर तय कर दी, लेकिन उद्योगों की अन्य प्रमुख मांगों पर बोर्ड की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है।
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उद्यमियों की मुख्य समस्याएं और मांगें
भारी लागत और मनमानी : उद्योगों को अपनी इकाइयों का प्रदूषण सर्टिफिकेट बनवाने के लिए 1 से 2 लाख रुपये तक का भारी खर्च उठाना पड़ रहा है। अधिकृत जांच एजेंसियों की संख्या बेहद कम होने के कारण उद्यमियों को मनमाने दाम चुकाने पड़ रहे हैं।
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जटिल प्रक्रिया : उद्यमियों की मांग है कि वाहनों की तर्ज पर उद्योगों के लिए भी प्रदूषण जांच और सर्टिफिकेट बनवाने की प्रक्रिया को पूरी तरह सरल और सुगम बनाया जाए।
ओसीएम और रिपोर्टिंग का बोझ : एसोसिएशन ने ओसीएम (ओवरहालिंग, कॉस्ट और अनुपालन लागत) के भारी-भरकम मूल्यों को कम करने तथा वित्तीय पर्याप्तता रिपोर्टिंग की जटिल प्रक्रिया को आसान बनाने की पुरजोर मांग की है।
जिले में छोटी-बड़ी 36 हजार से अधिक इकाइयां हैं
बता दें कि जिले में छोटी-बड़ी 36 हजार से अधिक इकाइयां हैं। इनमें से करीब 20 हजार इकाइयों को अलग-अलग प्रकार से प्रदूषण के कठिन नियमों के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है। फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के उद्यमियों का कहना है कि एक तरफ जहां वैश्विक मंदी और अन्य व्यावसायिक चुनौतियां पहले ही उद्योगों की कमर तोड़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रदूषण अनुपालन से जुड़े महंगे और जटिल नियम व्यवसाय को चलाना मुश्किल कर रहे हैं।