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क्राइम ब्रांच डीएलएफ करेगी अमित हत्याकांड की जांच
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फरीदाबाद। वर्ष 2019 में गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड पर दिल्ली निवासी अमित यादव की गोली मारकर हत्या मामले की जांच अब क्राइम ब्रांच डीएलएफ करेगी। हालांकि इस मामले में केस उसी समय दर्ज हो गया था। क्राइम ब्रांच ने केस की जांच भी की थी, लेकिन इसमें कुछ बड़ा सुराग हाथ नही लग सका था। अब नए सिरे से जांच की जाएगी।
27 अगस्त 2019 को दिल्ली के रजोकरी निवासी अमित यादव की गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अमित का शव उसकी कार में ही बरामद हुआ था। अमित की हत्या उसके साथ वाली सीट पर बैठकर गोली मारकर की गई थी। इस मामले में अमित के पिता ईश्वर सिंह ने हत्यारे का सुराग देने वाले को पांच लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा भी की थी। पुलिस ने हत्या मामले में की गई जांच में सट्टेबाजी के नेटवर्क से पूछताछ शुरू की थी। परिजनों के मुताबिक अमित के पास एक लाख रुपये थे, लेकिन गाड़ी से वे भी गायब मिले थे। जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया गया था। पुलिस शुरू से यही मान रही है कि हत्या की किसी जानने वाले ने ही की है। पुलिस अभी तक इस मामले में पांच सौ से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है, लेकिन कोई नतीजा नही निकला।
इससे पहले की पुलिस कुछ और आगे बढ़ती कोरोना संक्रमण के कारण जांच रुक गई। उस समय क्राइम ब्रांच डीएलएफ के प्रभारी संजीव कुमार थे। उन्होंने इस केस में काफी मेहनत भी की थी, लेकिन केस ठंडे बस्ते में ही चला गया। इधर परिजन लगातार इस प्रयास में हैं कि उन्हें न्याय मिले। इसके लिए उन्होंने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से केस की जांच की मांग की। क्राइम ब्रांच डीएलएफ नए सिरे से इस मामले की जांच में जुट गई है।
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27 अगस्त 2019 को दिल्ली के रजोकरी निवासी अमित यादव की गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अमित का शव उसकी कार में ही बरामद हुआ था। अमित की हत्या उसके साथ वाली सीट पर बैठकर गोली मारकर की गई थी। इस मामले में अमित के पिता ईश्वर सिंह ने हत्यारे का सुराग देने वाले को पांच लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा भी की थी। पुलिस ने हत्या मामले में की गई जांच में सट्टेबाजी के नेटवर्क से पूछताछ शुरू की थी। परिजनों के मुताबिक अमित के पास एक लाख रुपये थे, लेकिन गाड़ी से वे भी गायब मिले थे। जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया गया था। पुलिस शुरू से यही मान रही है कि हत्या की किसी जानने वाले ने ही की है। पुलिस अभी तक इस मामले में पांच सौ से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है, लेकिन कोई नतीजा नही निकला।
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इससे पहले की पुलिस कुछ और आगे बढ़ती कोरोना संक्रमण के कारण जांच रुक गई। उस समय क्राइम ब्रांच डीएलएफ के प्रभारी संजीव कुमार थे। उन्होंने इस केस में काफी मेहनत भी की थी, लेकिन केस ठंडे बस्ते में ही चला गया। इधर परिजन लगातार इस प्रयास में हैं कि उन्हें न्याय मिले। इसके लिए उन्होंने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से केस की जांच की मांग की। क्राइम ब्रांच डीएलएफ नए सिरे से इस मामले की जांच में जुट गई है।
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