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Faridabad News: बाढ़ के पानी से घरों में आईं दरारें, बीमारियों का खतरा बढ़ा

Tue, 09 Sep 2025 10:39 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 09 Sep 2025 10:39 PM IST
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Cracks appeared in houses due to flood water
यमुना का जलस्तर घटने से गांवों में पानी कम तो हो गया लेकिन मुसीबतें नहीं
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घरों में रखा फर्नीचर व अनाज खराब
मोहित शुक्ला


फरीदाबाद। यमुना का जलस्तर घटने से गांवों में पानी उतर रहा है। इसके साथ ही कई परेशानियां सामने आ रही हैं। पानी में डूबने के कारण लोगों के घरों में दरारें आनी शुरू हो गई हैं। इसके अलावा गाद और कीचड़ की सफाई भी बड़ी समस्या बनी हुई है।
घरों में रखा फर्नीचर व अनाज खराब हो गया है। फसल खराब होने पर मुआवजे के लिए आवेदन लिए जा रहे हैं। जिन गांवों में पानी पूरी तरह या आंशिक रूप से निकल चुका है, वहां अब लोगों के सामने मकानों की क्षति, सामान के खराब होने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं खड़ी हो गई हैं। कई घरों की दीवारों में दरारें आ चुकी हैं, नींव कमजोर हो गई है और वहां रहना खतरनाक साबित हो सकता है। मंझावली, बसंतपुर, दयालपुर, छायंसा, अटाली, कौराली सहित कई गांवों से घरों के टूटने और दरारें पड़ने की बात सामने आ रही है।
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बसंतपुर गांव में तो बाढ़ का पानी उतरने के बाद एक घर में सांप निकलने का मामला सामने आया। इससे ग्रामीणों में डर और बढ़ गया है। ग्रामीण बताते हैं कि पानी भराव की वजह से सांप-बिच्छू और अन्य जहरीले कीड़े अब घरों और खेतों में शरण ले रहे हैं। बाढ़ ने लोगों का रोजमर्रा का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जिन घरों में कई दिनों तक पानी भरा रहा, वहां रखा लकड़ी का फर्नीचर पूरी तरह खराब हो गया है। कपड़े, किताबें और बच्चों की पढ़ाई का सामान भी पानी में भीगकर नष्ट हो गया है। सबसे बड़ी समस्या अनाज और राशन खराब होने की है। ग्रामीण बताते हैं कि कई बोरे गेहूं, चावल और दाल पानी में सड़ गए हैं। अब रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। दयालपुर के किसानों का कहना है कि पानी उतरने के बाद घर में सिर्फ गंदगी और टूटी दीवारें बची हैं। हमारा राशन, लकड़ी का सामान और यहां तक कि बच्चों की किताबें तक खराब हो गईं। सरकार से मांग है कि हमें सिर्फ फसल का ही नहीं, घरों के नुकसान का भी मुआवजा मिले।
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सेफ हाउस से लौट रहे लोग

प्रशासन द्वारा बाढ़ के दौरान बनाए गए सेफ हाउस अब खाली होने लगे हैं। जिन घरों में रहने लायक स्थिति बन रही है, वहां लोग धीरे-धीरे लौट रहे हैं। हालांकि कई लोग अभी भी अपने रिश्तेदारों के घरों में शरण लिए हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि घरों की मरम्मत और सफाई में समय लगेगा, इसलिए पूरी तरह से लौटने में कुछ हफ्ते और लग सकते हैं। बाढ़ का असर सिर्फ घरों और सामान तक ही सीमित नहीं है। दूषित पानी के कारण बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार गांवों का दौरा कर रही हैं। लोग बुखार, त्वचा रोग और डायरिया जैसी समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं। डॉक्टर घर-घर जाकर स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं और जरूरतमंदों को दवाइयां उपलब्ध करा रहे हैं।


फसल खराब होने पर लिए जा रहे आवेदन

दूसरी तरफ प्रशासन ने किसानों से फसल नुकसान का ब्यौरा लेने के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। खेतों में खड़ी धान की फसलें व सब्जियां बर्बाद हो चुकी हैं। किसान अब मुआवजे की उम्मीद में सरकारी टीमों से संपर्क कर रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी मांग रखी है कि घरों की क्षति को लेकर भी सरकार मुआवजे की व्यवस्था करे, क्योंकि बाढ़ ने उनका आर्थिक ढांचा पूरी तरह हिला दिया है। प्रशासनिक अधिकारी कहते हैं कि राहत और पुनर्वास का काम लगातार जारी है। जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य जांच, मुआवजा आवेदन और गांवों की सफाई पर फोकस किया है। अधिकारियों का कहना है कि हर गांव में टीमें जाकर लोगों की समस्याओं का समाधान कर रही हैं और प्रभावित परिवारों की पूरी मदद की जा रही है।

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पानी उतरना शुरू हो गया है लेकिन अब लोगों को नई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। फसलों का मुआवजा भी समय पर नहीं मिलेगा। -इंद्र
घरों में दरारें आ रही हैं। लोगों का काफी नुकसान हुआ है। घरों को ठीक करने के लिए भी सहायता दी जानी चाहिए। -बृजलाल
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