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Faridabad News: नशे की लत से मुक्ति के लिए अस्पताल में काउंसलिंग और इलाज एक ही जगह
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बीके अस्पताल की मुख्य इमारत में स्थानांतरित हुआ एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी सेंटर
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए जिला नागरिक अस्पताल ने उपचार व्यवस्था को और आसान बना दिया है। अस्पताल का एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी (एटीएफ) सेंटर अब मुख्य बिल्डिंग के स्तनपान कक्ष में संचालित किया जा रहा है। इसके पहले अस्पताल परिसर में कोविड महामारी के समय बने आइसोलेशन कंटेनर वार्ड में एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी संचालित की जा रही थी। जानकारी के अभाव में लोगों को भटकना पड़ता था। वर्तमान में केंद्र में प्रतिदिन औसतन पांच से सात लोग नशा छोड़ने के लिए परामर्श और इलाज लेने पहुंच रहे हैं। यहां प्रशिक्षित चिकित्सकों और काउंसलरों की देखरेख में पंजीकरण से लेकर दवा और फॉलोअप तक की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
यदि कोई व्यक्ति स्वयं नशा छोड़ने की इच्छा से अस्पताल पहुंचता है या परिजन उसे लेकर आते हैं तो सबसे पहले काउंटर पर उसका पंजीकरण कराया जाता है। इसके बाद मरीज को ओपीडी के कमरा संख्या-3 में भेजा जाता है। यहां चिकित्सक डॉ. ऋषभ मरीज की जांच कर यह आकलन करते हैं कि नशे की लत कितनी गंभीर है। इसके आधार पर उपचार शुरू किया जाता है और जरूरत के अनुसार मरीज को काउंसलिंग के लिए भेजा जाता है।
काउंसलिंग की व्यवस्था अस्पताल के स्तनपान कक्ष में की गई है, जहां प्रशिक्षित काउंसलर मरीज और उसके परिजनों से विस्तार से बातचीत कर नशा छोड़ने के लिए मानसिक रूप से तैयार करते हैं। मरीजों को नियमित दवा, व्यवहार में बदलाव और समय-समय पर फॉलोअप की भी सुविधा दी जाती है, ताकि उपचार का सकारात्मक परिणाम मिल सके।
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अस्पताल के चिकित्सकों और काउंसलरों को राष्ट्रीय नशा मुक्ति उपचार केंद्र, एम्स की ओर से विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। यह केंद्र नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटांसेज (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत संचालित नशा मुक्ति कार्यक्रम का हिस्सा है। कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. मनोज बजाज इसकी निगरानी कर रहे हैं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, वर्तमान में करीब 250 मरीज इस केंद्र से जुड़े हुए हैं। इनमें नियमित उपचार लेने वाले मरीजों के साथ फॉलोअप के लिए आने वाले लोग भी शामिल हैं।
नशे की लत एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य बीमारी है। समय पर इलाज, नियमित दवा और लगातार काउंसलिंग से मरीज सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है। मरीजों और उनके परिजनों को बिना किसी संकोच के अस्पताल आकर विशेषज्ञों से परामर्श लेना चाहिए। हमारा प्रयास है कि हर जरूरतमंद को एक ही स्थान पर बेहतर और सहज उपचार उपलब्ध कराया जाए।
- डॉ. मनोज बजाज, नोडल अधिकारी, एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी सेंटर
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए जिला नागरिक अस्पताल ने उपचार व्यवस्था को और आसान बना दिया है। अस्पताल का एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी (एटीएफ) सेंटर अब मुख्य बिल्डिंग के स्तनपान कक्ष में संचालित किया जा रहा है। इसके पहले अस्पताल परिसर में कोविड महामारी के समय बने आइसोलेशन कंटेनर वार्ड में एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी संचालित की जा रही थी। जानकारी के अभाव में लोगों को भटकना पड़ता था। वर्तमान में केंद्र में प्रतिदिन औसतन पांच से सात लोग नशा छोड़ने के लिए परामर्श और इलाज लेने पहुंच रहे हैं। यहां प्रशिक्षित चिकित्सकों और काउंसलरों की देखरेख में पंजीकरण से लेकर दवा और फॉलोअप तक की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
यदि कोई व्यक्ति स्वयं नशा छोड़ने की इच्छा से अस्पताल पहुंचता है या परिजन उसे लेकर आते हैं तो सबसे पहले काउंटर पर उसका पंजीकरण कराया जाता है। इसके बाद मरीज को ओपीडी के कमरा संख्या-3 में भेजा जाता है। यहां चिकित्सक डॉ. ऋषभ मरीज की जांच कर यह आकलन करते हैं कि नशे की लत कितनी गंभीर है। इसके आधार पर उपचार शुरू किया जाता है और जरूरत के अनुसार मरीज को काउंसलिंग के लिए भेजा जाता है।
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काउंसलिंग की व्यवस्था अस्पताल के स्तनपान कक्ष में की गई है, जहां प्रशिक्षित काउंसलर मरीज और उसके परिजनों से विस्तार से बातचीत कर नशा छोड़ने के लिए मानसिक रूप से तैयार करते हैं। मरीजों को नियमित दवा, व्यवहार में बदलाव और समय-समय पर फॉलोअप की भी सुविधा दी जाती है, ताकि उपचार का सकारात्मक परिणाम मिल सके।
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अस्पताल के चिकित्सकों और काउंसलरों को राष्ट्रीय नशा मुक्ति उपचार केंद्र, एम्स की ओर से विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। यह केंद्र नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटांसेज (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत संचालित नशा मुक्ति कार्यक्रम का हिस्सा है। कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. मनोज बजाज इसकी निगरानी कर रहे हैं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, वर्तमान में करीब 250 मरीज इस केंद्र से जुड़े हुए हैं। इनमें नियमित उपचार लेने वाले मरीजों के साथ फॉलोअप के लिए आने वाले लोग भी शामिल हैं।
नशे की लत एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य बीमारी है। समय पर इलाज, नियमित दवा और लगातार काउंसलिंग से मरीज सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है। मरीजों और उनके परिजनों को बिना किसी संकोच के अस्पताल आकर विशेषज्ञों से परामर्श लेना चाहिए। हमारा प्रयास है कि हर जरूरतमंद को एक ही स्थान पर बेहतर और सहज उपचार उपलब्ध कराया जाए।
- डॉ. मनोज बजाज, नोडल अधिकारी, एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी सेंटर