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Faridabad News: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों को पूरा नहीं करते निगम के एसटीपी

Sat, 29 Jul 2023 10:44 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 29 Jul 2023 10:44 PM IST
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Corporation's STPs do not meet the rules of pollution control board
एचएसपीसीबी ने एसटीपी से शोधित पानी की गुणवत्ता सुधारने को कहा
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निगम पर लाखों रुपये का जुर्माना हर माह लग रहा




अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। नगर निगम के सीवर शोधन संयंत्र (एसटीपी) हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के अनुसार पानी शोधित नहीं कर रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार शोधित पानी की बायोलॉजिकल ऑक्सीडेशन डिमांड (बीओडी) 10 चाहिए जबकि निगम के एसटीपी पुराने मानक (30) को भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं। निगम के शोधित पानी की बीओडी करीब 70-100 रहती है।
नगर निगम के शहर के सीवर शोधन के लिए मिर्जापुर में 45 व प्रतापगढ़ में 50 और बादशाहपुर में 45 एमएलडी के एसटीपी हैं। इसमें तीनों संयंत्र वर्तमान मानक के अनुसार सीवर के पानी को शोधित नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि पुराने मानक के अनुसार शोधित पानी की बीओडी 30 होनी चाहिए, लेकिन ऐसा भी नहीं हो पा रहा है। एचएसपीसीबी ने अप्रैल में प्रतापगढ़ गांव के 50 एमएलडी के सीवर शोधन संयंत्र से शोधित पानी के नमूने लिए थे। इसमें शोधित पानी में बीओडी 188 मिली थी। यदि पुराने के बात करें तो 30 होनी चाहिए थी। वहीं, नई गाइड लाइंस के अनुसार दस बीओडी होनी चाहिए। इसी प्रकार अन्य संयंत्र भी पुराने मानक को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में प्रदूषण बोर्ड निगम को लाखों रुपये का जुर्माना हर माह लगा रहा है। इससे यमुना नदी में गंदा पानी जाता है।
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प्रदूषण बोर्ड के अनुसार शोधित पानी में बीओडी 10, सीओडी 50, टीएचएस 100 और पीएच 6.5-8 होना चाहिए, इसके लिए सभी विभागों को कदम उठाने को कहा गया है। इसके लिए अतिरिक्त उपकरण लगाने होंगे। हालांकि पुराने मानक में बीओडी 30, सीओडी 250, टीएचएस 100, पीएच 6.5-9 है। निगम का कहना हैं कि मिर्जापुर और प्रतापगढ़ पुराने प्लांट है। ऐसे में अब नए प्लांट शुरू होने पर ही तय मानक के अनुसार पानी का शोधन हो सकेगा। इसमें मिर्जापुर गांव में 80 एमलएडी और प्रतापगढ़ गांव में 100 एमएलडी का एसटीपी बन रहा है। नगर निगम के कार्यकारी अभियंता नितिन कादियान ने बताया कि 80 व 100 एमएलडी के एसटीपी स्केवेंशियल बैच रिएक्टर (एसबीआर) टेक्नोलॉजी पर काम करेंगे। इससे शोधित पानी की गुणवत्ता बेहतर रहेगी।
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बीओडी स्तर 10 होना जरूरी

सीवर के पानी की बीओडी 300 तक होती है। आम तौर पर गंदे पानी को शोधित कर 30 तक लाया जाता है। इसके बाद इसे नाले में डाल दिया जाता है। एचएसपीसीबी शोधित पानी को 10 बीओडी चाहता है। सीवर के शोधित पानी में दो बातों को देखा जाता है। पहला बीओडी और दूसरा सीओडी होता है। बीओडी ऑक्सीजन की मात्रा है जो एरोबिक स्थितियों के तहत कार्बनिक पदार्थों को विघटित करते हुए बैक्टीरिया द्वारा खपत होती है। सीओडी पानी में कुल कार्बनिक पदार्थों के रासायनिक ऑक्सीकरण के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा है। बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड जितनी ज्यादा होगी, पानी की ऑक्सीजन उतनी तेजी से खत्म होगी और बाकी जीवों पर उतना ही खराब असर पड़ेगा। पानी के संपर्क में आने से चर्म रोग होते हैं। हवा भी दूषित होती है।



सीवर शोधित पानी को और बेहतर करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। मिर्जापुर और प्रतापगढ़ के एसटीपी में आधुनिक तकनीक का प्रयोग होगा। इससे नए मानक को लागू किया जा सकेगा।

-नितिन कादियान, कार्यकारी अभियंता नगर निगम







निगम के एसटीपी से शोधित पानी की बीओडी को दस तक लाने के निर्देश हैं। ऐसा नहीं करने पर निगम को हर माह प्रति एसटीपी पांच लाख का जुर्माना लगाया जा रहा है। इसके लिए निगम जरूरी कदम उठा रहा है। इससे यमुना नदी को दूषित होने से रोका जा सकेगा।



-दिनेश कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी एचएसपीसीबी
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