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Faridabad News: पुलिस के बयानों के आधार पर नहीं दी जा सकती सजा
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मारपीट व एससी/एसटी एक्ट मामले में चार दोषमुक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। पुलिस के सामने दिए गए बयानों के आधार पर किसी आरोपी को दोषी ठहराकर सजा नहीं दी जा सकती, खासकर जब मुख्य गवाह अदालत में अपने बयान से मुकर जाए। इसी आधार पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट लोकेंद्र गुप्ता की अदालत ने मारपीट और एससी-एसटी अधिनियम से जुड़े करीब सात साल पुराने मामले में चार आरोपियों विरकी भीम, राजेंद्र व सोनू को दोषमुक्त करार कर दिया।
अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि घायलों और शिकायतकर्ता ने आरोपियों को हमलावर मानने से ही इन्कार कर दिया। ऐसे में अभियोजन आरोप साबित नहीं कर सका। मामले के अनुसार, 29 अप्रैल 2019 को गाजियाबाद निवासी शिकायतकर्ता मनोज कुमार ने थाना सदर बल्लभगढ़ में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया था कि वह और उसका भाई बहबलपुर गांव में शादी समारोह में आए थे, जहां विरकी और उसके बेटों (भीम, राजेंद्र व सोनू) ने उन पर लाठी-डंडों व धारदार हथियारों से हमला किया व गाड़ी में तोड़फोड़ की थी।
पुलिस ने 30 अप्रैल 2019 को आरोपियों को गिरफ्तार किया था और 21 जून 2019 को अदालत में चालान पेश किया था। जिसके बाद एक जुलाई 2019 को आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं और एससी/एसटी एक्ट में आरोप तय किए गए थे। अदालत में घायल दीपक, आकाश, हेमंत और शिकायतकर्ता मनोज कुमार ने अभियोजन का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि उन्हें चोट शादी समारोह के दौरान लगी थी लेकिन हमला किसने किया, इसकी जानकारी नहीं है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। पुलिस के सामने दिए गए बयानों के आधार पर किसी आरोपी को दोषी ठहराकर सजा नहीं दी जा सकती, खासकर जब मुख्य गवाह अदालत में अपने बयान से मुकर जाए। इसी आधार पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट लोकेंद्र गुप्ता की अदालत ने मारपीट और एससी-एसटी अधिनियम से जुड़े करीब सात साल पुराने मामले में चार आरोपियों विरकी भीम, राजेंद्र व सोनू को दोषमुक्त करार कर दिया।
अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि घायलों और शिकायतकर्ता ने आरोपियों को हमलावर मानने से ही इन्कार कर दिया। ऐसे में अभियोजन आरोप साबित नहीं कर सका। मामले के अनुसार, 29 अप्रैल 2019 को गाजियाबाद निवासी शिकायतकर्ता मनोज कुमार ने थाना सदर बल्लभगढ़ में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया था कि वह और उसका भाई बहबलपुर गांव में शादी समारोह में आए थे, जहां विरकी और उसके बेटों (भीम, राजेंद्र व सोनू) ने उन पर लाठी-डंडों व धारदार हथियारों से हमला किया व गाड़ी में तोड़फोड़ की थी।
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पुलिस ने 30 अप्रैल 2019 को आरोपियों को गिरफ्तार किया था और 21 जून 2019 को अदालत में चालान पेश किया था। जिसके बाद एक जुलाई 2019 को आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं और एससी/एसटी एक्ट में आरोप तय किए गए थे। अदालत में घायल दीपक, आकाश, हेमंत और शिकायतकर्ता मनोज कुमार ने अभियोजन का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि उन्हें चोट शादी समारोह के दौरान लगी थी लेकिन हमला किसने किया, इसकी जानकारी नहीं है।
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