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कांग्रेस ने सत्ता बचाने के लिए संविधान को किया कमजोर : मनोहर लाल
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आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर आयोजित संविधान हत्या दिवस एवं लोकतंत्र रक्षा सेनानी सम्मान कार्यक्रम में बोले केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सेक्टर-12 स्थित सेंट्रल पार्क में आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर आयोजित संविधान हत्या दिवस एवं लोकतंत्र रक्षा सेनानी सम्मान कार्यक्रम में केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल ने 25 जून 1975 को भारतीय लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला बताते हुए कहा कि कांग्रेस ने सत्ता बचाने के लिए संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया। वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने इसे भारतीय लोकतंत्र पर लगा ऐसा काला धब्बा बताया, जिसे इतिहास कभी नहीं भुला सकता।
कार्यक्रम में लोकतंत्र रक्षा सेनानियों और उनके परिजनों का सम्मान किया गया। मनोहर लाल ने कहा कि आपातकाल के दौरान प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई, नागरिक अधिकारों का हनन हुआ और हजारों लोगों को जेलों में डाल दिया गया। उन्होंने कहा कि उस दौर को याद रखना इसलिए जरूरी है ताकि आने वाली पीढ़ियां लोकतंत्र और संविधान के महत्व को समझ सकें। उन्होंने कहा कि आपातकाल का एक सकारात्मक पहलू यह भी रहा कि इससे जनता को लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति का एहसास हुआ और 1977 में पहली बार केंद्र में गैर-कांग्रेसी सरकार बनी।
कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि सत्ता के अहंकार में नागरिक स्वतंत्रताओं और अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत रहता है जब सत्ता स्वयं को संविधान से ऊपर न समझे। जिला अध्यक्ष पंकज पूजन रामपाल ने कहा कि कांग्रेस ने न कभी जनादेश का सम्मान किया और न विपक्ष की गरिमा बनाए रखी। कार्यक्रम संयोजक धनेश अदलखा ने कहा कि तत्कालीन सरकार ने अपनी सत्ता बचाने के लिए संविधान की आत्मा को आघात पहुंचाया।
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इस अवसर पर जगराम गुप्ता, महावीर भारद्वाज, उत्तम राज, सोहन लाल गोगिया, कृष्ण मुखी, सुनील ग्रोवर, रवि भूषण खत्री और अरविंद सूद सहित कई लोकतंत्र सेनानियों ने अपने अनुभव साझा किए। मनोहर लाल और कृष्णपाल गुर्जर ने लोकतंत्र सेनानियों को प्रशस्ति पत्र और शॉल भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल, विधायक सतीश फागना, विधायक मूलचंद शर्मा, महापौर प्रवीण बत्रा जोशी समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और नागरिक उपस्थित रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सेक्टर-12 स्थित सेंट्रल पार्क में आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर आयोजित संविधान हत्या दिवस एवं लोकतंत्र रक्षा सेनानी सम्मान कार्यक्रम में केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल ने 25 जून 1975 को भारतीय लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला बताते हुए कहा कि कांग्रेस ने सत्ता बचाने के लिए संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया। वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने इसे भारतीय लोकतंत्र पर लगा ऐसा काला धब्बा बताया, जिसे इतिहास कभी नहीं भुला सकता।
कार्यक्रम में लोकतंत्र रक्षा सेनानियों और उनके परिजनों का सम्मान किया गया। मनोहर लाल ने कहा कि आपातकाल के दौरान प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई, नागरिक अधिकारों का हनन हुआ और हजारों लोगों को जेलों में डाल दिया गया। उन्होंने कहा कि उस दौर को याद रखना इसलिए जरूरी है ताकि आने वाली पीढ़ियां लोकतंत्र और संविधान के महत्व को समझ सकें। उन्होंने कहा कि आपातकाल का एक सकारात्मक पहलू यह भी रहा कि इससे जनता को लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति का एहसास हुआ और 1977 में पहली बार केंद्र में गैर-कांग्रेसी सरकार बनी।
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कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि सत्ता के अहंकार में नागरिक स्वतंत्रताओं और अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत रहता है जब सत्ता स्वयं को संविधान से ऊपर न समझे। जिला अध्यक्ष पंकज पूजन रामपाल ने कहा कि कांग्रेस ने न कभी जनादेश का सम्मान किया और न विपक्ष की गरिमा बनाए रखी। कार्यक्रम संयोजक धनेश अदलखा ने कहा कि तत्कालीन सरकार ने अपनी सत्ता बचाने के लिए संविधान की आत्मा को आघात पहुंचाया।
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इस अवसर पर जगराम गुप्ता, महावीर भारद्वाज, उत्तम राज, सोहन लाल गोगिया, कृष्ण मुखी, सुनील ग्रोवर, रवि भूषण खत्री और अरविंद सूद सहित कई लोकतंत्र सेनानियों ने अपने अनुभव साझा किए। मनोहर लाल और कृष्णपाल गुर्जर ने लोकतंत्र सेनानियों को प्रशस्ति पत्र और शॉल भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल, विधायक सतीश फागना, विधायक मूलचंद शर्मा, महापौर प्रवीण बत्रा जोशी समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और नागरिक उपस्थित रहे।