{"_id":"6515bbf75c183bd479093068","slug":"complaint-of-hearing-loss-in-school-children-faridabad-news-c-26-1-fbd1004-14270-2023-09-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: स्कूली बच्चों में कम सुनने की शिकायत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: स्कूली बच्चों में कम सुनने की शिकायत
Thu, 28 Sep 2023 11:16 PM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
Updated Thu, 28 Sep 2023 11:16 PM IST
विज्ञापन
534 छात्रों में 98 बच्चों में कम सुनने की मिली शिकायत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। पहले बुजुर्गों में कम सुनाई के मामले देखे जाते थे, लेकिन बढ़ती सुविधाओं के बीच अब स्कूली बच्चाें में भी कम सुनाई की बीमारी सामने आने लगी है। इसका खुलासा स्वास्थ्य विभाग की ओर 18 से 24 सितंबर तक चलाए गए अभियान के दौरान हुआ है। इस दौरान जिले के पांच राजकीय स्कूलों के 534 छात्रों का कान जांच किया गया। इनमें से 98 बच्चों में कम सुनने की शिकायत पाई गई है। इसका मुख्य वजह मोबाइल पर ज्यादा देर बात करना, ईयर फोन का इस्तेमाल, ध्वनि प्रदूषण, तेज आवाज में गाना सुनने के साथ सर्दी-खांसी से लगातार संक्रमित होना पाया गया है।
स्कूल हेल्थ के डॉ. अर्जुन ने छात्रों से बातचीत के आधार पर बताया कि करीब 98 बच्चों में कम सुनने की शिकायत मिली है। उन्हें बीके अस्पताल में जांच के लिए बुलाया गया है। जांच के दौरान अगर किसी बच्चे को सर्जरी भी जरूरत होगी तो उसे भी कराई जाएगी। वहीं, बच्चों को सुनने की मशीन भी दी जाएगी। राष्ट्रीय बधिरता निवारण और नियंत्रण कार्यक्रम (एनपीपीसीडी) की नोडल अधिकारी डाॅ. सीमा ने बताया कि बच्चों का मुफ्त जांच किया जाएगा। अगर किसी प्रकार की समस्या आती है तो उसकी जांच एम्स और पीजीआई रोहतक में भी रेफर किया जा सकता है। स्कूली बच्चे मौज मस्ती में तेज आवाज में गाना सुनते है। वहीं, कुछ बच्चे ईयर फोन का इस्तेमाल लगातार करते है। तेज आवाज में सुनने से कान के पर्दे पर दुष्प्रभाव पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार कान के सुनने की क्षमता 25 से 60 डेसीबल तक आवाज होती है।
वर्जन
राजकीय स्कूलों में पढ़ने वाले 18 वर्ष तक के बच्चों के कान का जांच किया गया था। इनमें से करीब 20 से 25 फीसदी बच्चों में कम सुनने की शिकायत मिली है।
- डॉ. रश्मी बतरा, उप सिविल सर्जन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। पहले बुजुर्गों में कम सुनाई के मामले देखे जाते थे, लेकिन बढ़ती सुविधाओं के बीच अब स्कूली बच्चाें में भी कम सुनाई की बीमारी सामने आने लगी है। इसका खुलासा स्वास्थ्य विभाग की ओर 18 से 24 सितंबर तक चलाए गए अभियान के दौरान हुआ है। इस दौरान जिले के पांच राजकीय स्कूलों के 534 छात्रों का कान जांच किया गया। इनमें से 98 बच्चों में कम सुनने की शिकायत पाई गई है। इसका मुख्य वजह मोबाइल पर ज्यादा देर बात करना, ईयर फोन का इस्तेमाल, ध्वनि प्रदूषण, तेज आवाज में गाना सुनने के साथ सर्दी-खांसी से लगातार संक्रमित होना पाया गया है।
स्कूल हेल्थ के डॉ. अर्जुन ने छात्रों से बातचीत के आधार पर बताया कि करीब 98 बच्चों में कम सुनने की शिकायत मिली है। उन्हें बीके अस्पताल में जांच के लिए बुलाया गया है। जांच के दौरान अगर किसी बच्चे को सर्जरी भी जरूरत होगी तो उसे भी कराई जाएगी। वहीं, बच्चों को सुनने की मशीन भी दी जाएगी। राष्ट्रीय बधिरता निवारण और नियंत्रण कार्यक्रम (एनपीपीसीडी) की नोडल अधिकारी डाॅ. सीमा ने बताया कि बच्चों का मुफ्त जांच किया जाएगा। अगर किसी प्रकार की समस्या आती है तो उसकी जांच एम्स और पीजीआई रोहतक में भी रेफर किया जा सकता है। स्कूली बच्चे मौज मस्ती में तेज आवाज में गाना सुनते है। वहीं, कुछ बच्चे ईयर फोन का इस्तेमाल लगातार करते है। तेज आवाज में सुनने से कान के पर्दे पर दुष्प्रभाव पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार कान के सुनने की क्षमता 25 से 60 डेसीबल तक आवाज होती है।
विज्ञापन
वर्जन
राजकीय स्कूलों में पढ़ने वाले 18 वर्ष तक के बच्चों के कान का जांच किया गया था। इनमें से करीब 20 से 25 फीसदी बच्चों में कम सुनने की शिकायत मिली है।
- डॉ. रश्मी बतरा, उप सिविल सर्जन