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Faridabad News: लावारिस कुत्तों के काटने से मौत पर मिलेगा 5 लाख तक का मुआवजा

Sat, 17 Jan 2026 12:50 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 17 Jan 2026 12:50 AM IST
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Compensation up to Rs 5 lakh will be given in case of death due to dog bite.
फरीदाबाद जिला प्रशासन ने दयालु-II योजना के तहत उच्च स्तरीय जिला स्तरीय समिति का गठन किया
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अमर उजाला ब्यूरो

फरीदाबाद। शहर और ग्रामीण इलाकों में लावारिस कुत्तों व पशुओं के हमलों से हो रही मौतों और गंभीर चोटों के मामलों को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई की शुरुआत हो गई है। अदालत के आदेशों के बाद फरीदाबाद जिला प्रशासन ने दयालु-II योजना के तहत एक उच्च स्तरीय जिला स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) कर रहे हैं। इसका उद्देश्य पीड़ित परिवारों को त्वरित और पारदर्शी मुआवजा उपलब्ध कराना, विभागों की जवाबदेही तय करना और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए उपाय करना है। योजना के तहत लावारिस पशु या कुत्ते के काटने से मौत पर परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी।

फरीदाबाद में लावारिस पशुओं और कुत्तों के हमलों से जुड़े मामलों में अदालत की सख्ती के बाद प्रशासन ने अपनी कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। अब ऐसे हादसों को केवल दुर्घटना मानकर टालने के बजाय जिम्मेदारी तय करने और पीड़ित को राहत देने पर फोकस किया जा रहा है। जिला स्तरीय समिति को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि मुआवजे के मामलों में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और सभी दावे तय समय सीमा में निपटाए जाएं।
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एडीसी की अध्यक्षता में बना विभागों का साझा मंच

इस समिति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सभी प्रमुख विभागों को एक ही मंच पर लाया गया है। अतिरिक्त उपायुक्त के नेतृत्व में पुलिस विभाग, नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी समिति का हिस्सा हैं। समिति की बैठक में यह साफ किया गया कि हर विभाग की भूमिका तय होगी
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- पुलिस घटना की पुष्टि और रिपोर्ट समय पर देगी।

- स्वास्थ्य विभाग मेडिकल सर्टिफिकेट और उपचार से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराएगा।

- नगर निगम संबंधित क्षेत्र में आवारा पशुओं की स्थिति और जिम्मेदारी तय करेगा।

- इस समन्वय से अब मुआवजे की फाइलें एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर भटकने के बजाय एक ही प्रक्रिया में आगे बढ़ेंगी।

उम्र के अनुसार मिलेगी सहायता राशि
दयालु-II योजना के तहत मुआवजे की राशि को उम्र और क्षति के आधार पर तर्कसंगत तरीके से तय किया गया है। 0 से 40 वर्ष की आयु में यदि लावारिस पशु या कुत्ते के हमले से मृत्यु होती है तो परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी। 40 से 60 वर्ष की आयु में मृत्यु होने पर 2 से 3 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाएगा। 70 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता की स्थिति में पीड़ित को उसकी उम्र के अनुसार पूरी सहायता राशि मिलेगी जबकि इससे कम दिव्यांगता पर प्रतिशत के हिसाब से राहत दी जाएगी। जबकि कुत्ते के काटने पर चोट लगने पर भी 10 हजार तक का मुआवजा मिलेगा वहीं काटने के दौरान खाल खींच जाने पर यह राशि बढ़ जाएगी। यह प्रावधान उन परिवारों के लिए एक बड़ा सहारा साबित होगा, जिनकी आजीविका ऐसे हादसों के बाद प्रभावित हो जाती है।

90 दिनों के अंदर पोर्टल पर करना होगा आवेदन
अब कुत्ते के काटने के मामलों को भी गंभीरता से लिया जा रहा है। इन मामलों में कर्मचारी मुआवजा अधिनियम 1923 के मानकों के अनुसार मुआवजा तय किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए कुछ शर्तें अनिवार्य रखी गई हैं। पीड़ित परिवार का परिवार पहचान पत्र में पंजीकरण होना चाहिए और घटना के 90 दिनों के भीतर ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना होगा।


तीन माह में 6520 लोग बने कुत्तों के हमले का शिकार

फरीदाबाद में लावारिस कुत्तों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकारी अस्पतालों के रेबीज विभाग के आंकड़ों के अनुसार अक्तूबर 2025 में 1979, नवंबर में 2133 और दिसंबर में 2408 मामलों में लोगों को कुत्तों ने काटा। इस तरह केवल तीन महीनों में 6520 लोग कुत्तों के हमले का शिकार हुए। औसतन प्रतिदिन 70 से अधिक लोग इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा है।


काटने के साथ सड़क हादसों की वजह भी बन रहे लावारिस कुत्ते

लावारिस कुत्तों की समस्या सिर्फ काटने तक सीमित नहीं है। शहर के कई इलाकों में अचानक सड़क पर आ जाने से दोपहिया वाहन सवार गिरकर घायल हो रहे हैं। एनआईटी, बल्लभगढ़ और ग्रेटर फरीदाबाद क्षेत्रों में हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें लोगों को गंभीर चोटें आईं। सुबह की सैर पर निकले एनआईटी निवासी रमेश कुमार के अनुसार उनके इलाके में कुत्तों के हमले की घटनाएं आम हो गई हैं।


जानवरों के हमले को लेकर योजना के तहत समिति बना दी गई है। कुत्ते, बंदर व अन्य जानवरों के हमले के मामले में पीड़ित को मुआवजा दिया जाएगा। - सतबीर मान, एडीसी
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