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Faridabad News: मुआवजा विवाद, 13 जून तक उपायुक्त को जवाब दाखिल करना होगा
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ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए जमीन की जा रही है अधिग्रहित
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बल्लभगढ़ से जोड़ने वाले ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित की जा रही सोतई गांव की पट्टी शामलात भूमि के मुआवजे को लेकर विवाद गहरा गया है। जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय शर्मा की अदालत ने इस मामले में उपायुक्त आयुष सिन्हा को तलब किया है। अदालत ने उपायुक्त को 13 जून तक अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद ही मुआवजे पर अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।
पट्टी शामलात भूमि पर सोतई गांव के किसान वर्ष 1908-09 के बंदोबस्त के समय से खेती कर रहे हैं। चार मई को हुई सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि वर्ष 2022 में गांव के नगर निगम में शामिल होने के बाद भूमि अर्जन अधिकारी ने मुआवजे की राशि किसानों के बजाय निगम को देने के आदेश जारी कर दिए थे। स्वामित्व को लेकर पैदा हुए इस विवाद के कारण भूमि अर्जन अधिकारी ने मामला अदालत में भेजकर मुआवजे की राशि सरकारी खजाने में जमा करा दी थी।
पूर्व सरपंच दिनेश सिंह के अनुसार, अदालत ने पूर्व में जिला राजस्व अधिकारी से कई बार जवाब मांगा था, लेकिन संतोषजनक उत्तर न मिलने पर अब सीधे उपायुक्त को जवाब देने के लिए कहा गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने पुलिस बल के साथ भूमि पर कब्जा लेने का प्रयास भी किया था, लेकिन किसानों के विरोध और अदालत के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल कब्जा लेने की कार्रवाई पर रोक लगा दी गई है। अब इस पूरे मामले का भविष्य 13 जून को होने वाली अगली सुनवाई और उपायुक्त के जवाब पर टिका है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बल्लभगढ़ से जोड़ने वाले ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित की जा रही सोतई गांव की पट्टी शामलात भूमि के मुआवजे को लेकर विवाद गहरा गया है। जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय शर्मा की अदालत ने इस मामले में उपायुक्त आयुष सिन्हा को तलब किया है। अदालत ने उपायुक्त को 13 जून तक अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद ही मुआवजे पर अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।
पट्टी शामलात भूमि पर सोतई गांव के किसान वर्ष 1908-09 के बंदोबस्त के समय से खेती कर रहे हैं। चार मई को हुई सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि वर्ष 2022 में गांव के नगर निगम में शामिल होने के बाद भूमि अर्जन अधिकारी ने मुआवजे की राशि किसानों के बजाय निगम को देने के आदेश जारी कर दिए थे। स्वामित्व को लेकर पैदा हुए इस विवाद के कारण भूमि अर्जन अधिकारी ने मामला अदालत में भेजकर मुआवजे की राशि सरकारी खजाने में जमा करा दी थी।
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पूर्व सरपंच दिनेश सिंह के अनुसार, अदालत ने पूर्व में जिला राजस्व अधिकारी से कई बार जवाब मांगा था, लेकिन संतोषजनक उत्तर न मिलने पर अब सीधे उपायुक्त को जवाब देने के लिए कहा गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने पुलिस बल के साथ भूमि पर कब्जा लेने का प्रयास भी किया था, लेकिन किसानों के विरोध और अदालत के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल कब्जा लेने की कार्रवाई पर रोक लगा दी गई है। अब इस पूरे मामले का भविष्य 13 जून को होने वाली अगली सुनवाई और उपायुक्त के जवाब पर टिका है।
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