फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Faridabad News ›   Children unable to speak even at the age of two.

Faridabad News: दो साल की उम्र में भी नहीं बोल पा रहे बच्चे

Tue, 16 Jun 2026 12:27 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jun 2026 12:27 AM IST
विज्ञापन
Children unable to speak even at the age of two.
स्पीच थेरेपी के लिए रोज 10 बच्चे पहुंच रहे जिला अस्पताल
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। फरीदाबाद। जिला नागरिक अस्पताल में छोटे बच्चों में बोलने की समस्या के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 10 बच्चे स्पीच थेरेपी के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें कई बच्चे ऐसे हैं जो दो साल की उम्र पूरी होने के बाद भी स्पष्ट रूप से बोलना शुरू नहीं कर पाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य तौर पर दो साल की उम्र तक बच्चे करीब 50 शब्द बोलने लगते हैं और छोटे-छोटे वाक्यों का प्रयोग भी शुरू कर देते हैं। ऐसे में बोलने में देरी अभिभावकों के लिए चिंता का विषय हो सकती है।

अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचीं अनीता चौहान ने बताया कि उनका बेटा आयुष जल्द ही दो साल का होने वाला है, लेकिन वह अभी तक बोलने की कोशिश भी नहीं करता। उन्होंने कहा कि पड़ोसियों से जानकारी मिलने के बाद उन्हें पता चला कि इस समस्या का इलाज और स्पीच थेरेपी भी होती है। इसके बाद वह बेटे को लेकर अस्पताल पहुंचीं, जहां उसकी थेरेपी शुरू कराई गई।
विज्ञापन


वहीं मोहिनी अस्थाना ने बताया कि उनकी बेटी डेढ़ साल से अधिक उम्र की हो चुकी है, लेकिन वह बोलने का प्रयास नहीं करती थी। पहले उन्हें स्पीच थेरेपी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। एक रिश्तेदार से जानकारी मिलने पर वह जिला नागरिक अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने बताया कि नियमित थेरेपी के बाद बच्ची में काफी सुधार देखने को मिल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


स्पीच थेरेपिस्ट डॉ. अर्जुन ने कही कि बच्चों में बोलने में देरी के कई कारण हो सकते हैं। कम सुनाई देना या कान से जुड़ी समस्याएं बच्चों के भाषा विकास को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, ओरल-मोटर समस्याएं तथा तंत्रिका तंत्र या विकासात्मक देरी भी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।


डॉ. अर्जुन ने बताया कि यदि बच्चा दो साल की उम्र तक भी बोलना शुरू नहीं करता है तो अभिभावकों को तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर स्पीच थेरेपिस्ट से मूल्यांकन कराना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि माता-पिता बच्चों से लगातार बातचीत करें, चित्रों वाली किताबें पढ़कर सुनाएं और मोबाइल व टीवी का उपयोग सीमित रखें। समय पर पहचान और उपचार से अधिकांश बच्चों में सुधार संभव है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed