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Faridabad News: दूषित पानी और खराब भोजन के कारण पेट संबंधी बीमारियों के मामले बढ़े
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एहतियात के तौर पर बीके नागरिक अस्पताल में हेपेटाइटिस-ए की जांच भी शुरू हुई
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शहर में बारिश के बाद बिगड़ी पेयजल व्यवस्था और जगह-जगह सीवर ओवरफ्लो की समस्या अब लोगों की सेहत पर असर डालने लगी है। दूषित पानी और खराब भोजन के कारण पेट संबंधी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। एहतियात के तौर पर बीके नागरिक अस्पताल में हेपेटाइटिस-ए की जांच भी शुरू कर दी गई है। फिलहाल किसी मरीज में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
जिला नागरिक अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि इन दिनों ओपीडी में प्रतिदिन 20 से 25 मरीज उल्टी, दस्त, पेट दर्द, मतली, भूख कम लगना, थकान, हल्का बुखार और गहरे रंग के पेशाब जैसी शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं। ऐसे मरीजों के लक्षणों को देखते हुए जरूरत पड़ने पर हेपेटाइटिस-ए की जांच कराई जा रही है, ताकि संक्रमण की समय रहते पहचान हो सके। हालांकि इस मानसून सीजन में अभी तक एक भी हेपेटाइटिस-ए के मामले की पुष्टि नहीं हुई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई के पहले सप्ताह में लगातार हुई बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में जलभराव और सीवर का पानी सड़कों पर फैल गया। कुछ स्थानों पर पेयजल पाइपलाइन में दूषित पानी मिलने की आशंका भी है। ऐसे हालात में जल जनित रोगों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
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डॉक्टरों के मुताबिक मानसून के दौरान नमी अधिक होने से भोजन जल्दी खराब हो जाता है। यदि लोग बासी खाना खाते हैं या बिना शुद्ध किए पानी का सेवन करते हैं तो हेपेटाइटिस-ए समेत कई संक्रमण होने की आशंका रहती है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
स्वच्छ और फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचें, ताजा भोजन करें, खाने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं और फल-सब्जियों को साफ पानी से धोकर ही इस्तेमाल करें। यदि लगातार उल्टी, दस्त, पीलिया, गहरे रंग का पेशाब या तेज कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल पहुंचकर जांच कराएं। -डॉ. योगेश गुप्ता, सामान्य रोग विशेषज्ञ
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शहर में बारिश के बाद बिगड़ी पेयजल व्यवस्था और जगह-जगह सीवर ओवरफ्लो की समस्या अब लोगों की सेहत पर असर डालने लगी है। दूषित पानी और खराब भोजन के कारण पेट संबंधी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। एहतियात के तौर पर बीके नागरिक अस्पताल में हेपेटाइटिस-ए की जांच भी शुरू कर दी गई है। फिलहाल किसी मरीज में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
जिला नागरिक अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि इन दिनों ओपीडी में प्रतिदिन 20 से 25 मरीज उल्टी, दस्त, पेट दर्द, मतली, भूख कम लगना, थकान, हल्का बुखार और गहरे रंग के पेशाब जैसी शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं। ऐसे मरीजों के लक्षणों को देखते हुए जरूरत पड़ने पर हेपेटाइटिस-ए की जांच कराई जा रही है, ताकि संक्रमण की समय रहते पहचान हो सके। हालांकि इस मानसून सीजन में अभी तक एक भी हेपेटाइटिस-ए के मामले की पुष्टि नहीं हुई है।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई के पहले सप्ताह में लगातार हुई बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में जलभराव और सीवर का पानी सड़कों पर फैल गया। कुछ स्थानों पर पेयजल पाइपलाइन में दूषित पानी मिलने की आशंका भी है। ऐसे हालात में जल जनित रोगों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
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डॉक्टरों के मुताबिक मानसून के दौरान नमी अधिक होने से भोजन जल्दी खराब हो जाता है। यदि लोग बासी खाना खाते हैं या बिना शुद्ध किए पानी का सेवन करते हैं तो हेपेटाइटिस-ए समेत कई संक्रमण होने की आशंका रहती है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
स्वच्छ और फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचें, ताजा भोजन करें, खाने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं और फल-सब्जियों को साफ पानी से धोकर ही इस्तेमाल करें। यदि लगातार उल्टी, दस्त, पीलिया, गहरे रंग का पेशाब या तेज कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल पहुंचकर जांच कराएं। -डॉ. योगेश गुप्ता, सामान्य रोग विशेषज्ञ