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Faridabad News: विपरीत परिस्थितियों से लड़कर बनाई अलग पहचान

Wed, 26 Aug 2026 01:23 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 26 Aug 2026 01:23 AM IST
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Carved out a distinct identity by overcoming adverse circumstances.
महिला समानता दिवस
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शहर की कई महिलाओं ने परिवार और समाज की चुनौतियों को पीछे छोड़कर खुद को मजबूत बनाया

भारती दुबे



फरीदाबाद। महिला समानता दिवस सिर्फ महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने की बात करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन महिलाओं की उपलब्धियों को सामने लाने का अवसर भी है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी अलग पहचान बनाई। शहर में ऐसी कई महिलाएं हैं, जिन्होंने परिवार और समाज की चुनौतियों को पीछे छोड़कर न केवल खुद को मजबूत बनाया, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनीं।

किसी ने पति के निधन के बाद रेलवे में स्टेशन मास्टर की जिम्मेदारी संभाली, तो किसी ने कैंसर पीड़ित महिलाओं का आत्मविश्वास लौटाने का बीड़ा उठाया। किसी ने कारोबार में मुकाम हासिल किया तो किसी ने अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व कर जिले का नाम रोशन किया।
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पति के निधन के बाद संभाली स्टेशन मास्टर की जिम्मेदारी
फरीदाबाद रेलवे स्टेशन पर स्टेशन मास्टर के पद पर कार्यरत नुजहत जहां ने मुश्किल परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी। पति के निधन के बाद करीब पांच वर्ष से वह रेलवे में अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। नुजहत ट्रेनों की ऑपरेटिंग और सिग्नल देने का कार्य करती हैं, जोकि महिलाओं के लिए एक मुश्किल कार्य है। उनके पति भी रेलवे में क्लर्क के पद पर कार्यरत थे। पति के निधन के तीन महीने बाद नुजहत ने बेटी को जन्म दिया। उस समय परिवार की जिम्मेदारी संभालना उनके लिए आसान नहीं था। नुजहत के परिवार में सास-ससुर, एक बेटा और बेटी हैं। उन्होंने अकेले परिवार की जिम्मेदारी संभालने के साथ नौकरी जारी रखी। जब उन्होंने रेलवे में स्टेशन मास्टर की नौकरी करने का फैसला लिया तो कई लोगों ने उन्हें ऐसा नहीं करने की सलाह दी लेकिन नुजहत ने लोगों की बातों को नजरअंदाज कर अपनी राह चुनी। आज वह अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाते हुए दूसरी महिलाओं के लिए मिसाल बनी हुई हैं।
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ट्यूशन से शुरू किया सफर, अब करोड़ों का कारोबार



कल्पना शर्मा ने भी सामाजिक सोच की परवाह किए बिना कारोबार के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। पांच बहनों और एक भाई के परिवार से आने वाली कल्पना ने शुरुआत में ट्यूशन पढ़ाया। घर में छोटी दुकान थी। यहीं से उनके मन में खुद का कारोबार शुरू करने का विचार आया। उन्होंने पास्ता और मैकरोनी बनाने का काम शुरू किया और धीरे-धीरे कारोबार को आगे बढ़ाया। उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया। आज वह सालाना करीब डेढ़ करोड़ रुपये तक का कारोबार कर रही हैं। शादी न करने का फैसला लेकर उन्होंने अपना पूरा ध्यान कारोबार और आत्मनिर्भरता पर केंद्रित किया। शुरुआत में कई लोगों ने उन्हें यह कहकर हतोत्साहित किया कि महिला के लिए कारोबार करना आसान नहीं है, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत से इस सोच को गलत साबित किया।


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी हैं वारुणी


खेल के क्षेत्र में भी शहर की बेटियां अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। वारुणी पर्शवाल जिले की पहली ऐसी महिला खिलाड़ी हैं, जिन्होंने भारत की ओर से दो बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेला है। वह अंडर-17 में चीन और अंडर-19 में जापान में आयोजित प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। हाल ही में 23 अगस्त को हैदराबाद में आयोजित कोटक इंडिया जूनियर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में वारुणी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया। उनकी उपलब्धि ने न केवल परिवार बल्कि जिले और देश का नाम भी रोशन किया है। वारुणी ने अपनी मेहनत से साबित किया है कि अवसर और आत्मविश्वास मिले तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं।




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कैंसर पीड़ित महिलाओं का लौटाया आत्मविश्वास



सामाजिक कार्यकर्ता कविता वैद्य गुप्ता महिला सशक्तीकरण को समाजसेवा के माध्यम से मजबूत कर रही हैं। वह ब्रेस्ट कैंसर से जूझ चुकी महिलाओं को निशुल्क प्रोस्थेटिक ब्रा उपलब्ध करा रही हैं। उनका कहना है कि बीमारी के बाद कई महिलाएं शारीरिक बदलाव के कारण आत्मविश्वास और आत्मसम्मान में कमी महसूस करती हैं और कई बार नौकरी तक छोड़ देती हैं। महिलाओं की इस परेशानी को समझते हुए कविता ने वर्ष 2016 में स्वयं प्रोस्थेटिक ब्रेस्ट ब्रा डिजाइन की। तब से अब तक वह करीब 30 हजार महिलाओं की मदद कर चुकी हैं। दिल्ली एम्स समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में जाकर वह महिलाओं से मिलती हैं और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत रहने के लिए प्रेरित करती हैं। उनकी पहल से कई महिलाएं दोबारा काम पर लौटकर सामान्य जीवन जीने का साहस जुटा चुकी हैं।
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