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नागरिकता संशोधन कानून किसी भी भारतीय पर लागू नहीं होता
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फरीदाबाद सेक्टर 11 मिलन वाटिका में भाजपा द्वारा आयोजित जन जागरण अभियान को लेकर प्रैसवार्ता करते क
- फोटो : Faridabad
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बल्लभगढ़। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विपक्षी पार्टी कांग्रेस लोगों में भ्रम व मिथ्या फैला कर राजनीति की रोटी सेंक रही है। जनता को समझना होगा कि आखिर नागरिकता संशोधन कानून क्या है। यह कानून किसी भारतीय पर लागू नहीं होता। यह सिर्फ घुसपैठियों के लिए है। रविवार को बल्लभगढ़ स्थित मिलन वाटिका में पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि यह, वह कानून है जिसके तहत दूसरे राष्ट्रों में आस्था के नाम पर सताए गए लोगों को नागरिकता देकर शरण देना है।
केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इस कानून की सिफारिश कांग्रेस के शासनकाल में ही तैयार की गई थी। कई प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने भी इसकी सिफारिश की थी। वर्तमान समय में जिस प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता है, वहीं प्रदर्शन हो रहे हैं। इसके अलावा जहां कांग्रेस विपक्ष में हैं वहां उपद्रव व आगजनी हो रही है। इस तरह की हरकत कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जानमाल की क्षति पहुंचाने वालों को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह कानून किसी भी भारतीय पर लागू नहीं होता है। यह उन पीड़ित व प्रताड़ित हिंदू, सिख, क्रिश्चियन, पारसी आदि के लिए है जो अपनी आस्था के कारण अफगानिस्तान, पाकिस्तान व बांगलादेश से भागने पर मजबूर हुए हैं। पाकिस्तान धर्म के आधार पर बना था। विभाजन के बाद बहुत से लोग फरीदाबाद व गुरुग्राम में भी आकर बसे हैं। महात्मा गांधी ने भी सितंबर 1947 में कहा था कि हिंदू पाकिस्तान में प्रताड़ित होते हैं तो उन्हें यहां शरण दी जाएगी।
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संविधान सातवीं अनुसूची के प्रथम सूची में जो भी विषय है उस संसद को उस पर कानून बनाने का पूर्ण अधिकार है। सातवीं सूची का जिक्र करते हुए कहा कि सूची 17 में लिखा है कि नागरिकता संबंधित हर विषय पर संसद को ही कानून बनाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि भारत विभाजन के समय पाकिस्तान गए हिंदू व सिख जो प्रताड़ित होकर वापस आ गए हैं, उन्हें शरण देना भी भारत का संवैधानिक दायित्व हैं।
राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जनसंख्या रजिस्टर वह है जिसमें भारत में रहने वाले व्यक्ति की गणना की जाती है। सेंसेक्स एप के मुताबिक देश की जनगणना करते हैं तो जनसंख्या का पता तो चल जाता है मगर डिटेल नहीं मिलती है। इस पर कानून का बंधन है। जनसंख्या रजिस्टर से देश के विकास की नीति बनाने में मदद मिलती है। 15 मार्च 2010 के गजट को पढ़ कर उन्होंने कहा कि नागरिकता नियमावली 2003 के तहत प्रदत्त शक्तियों के आधार केंद्र सरकार देश में जनसंख्या रजिस्टर तैयार करने का निर्णय लेती है। उस समय कांग्रेस सत्ता में थी और मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। अब इस पर भी कांग्रेस हाय-तौबा मचा रही है।
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केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इस कानून की सिफारिश कांग्रेस के शासनकाल में ही तैयार की गई थी। कई प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने भी इसकी सिफारिश की थी। वर्तमान समय में जिस प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता है, वहीं प्रदर्शन हो रहे हैं। इसके अलावा जहां कांग्रेस विपक्ष में हैं वहां उपद्रव व आगजनी हो रही है। इस तरह की हरकत कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जानमाल की क्षति पहुंचाने वालों को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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उन्होंने कहा कि यह कानून किसी भी भारतीय पर लागू नहीं होता है। यह उन पीड़ित व प्रताड़ित हिंदू, सिख, क्रिश्चियन, पारसी आदि के लिए है जो अपनी आस्था के कारण अफगानिस्तान, पाकिस्तान व बांगलादेश से भागने पर मजबूर हुए हैं। पाकिस्तान धर्म के आधार पर बना था। विभाजन के बाद बहुत से लोग फरीदाबाद व गुरुग्राम में भी आकर बसे हैं। महात्मा गांधी ने भी सितंबर 1947 में कहा था कि हिंदू पाकिस्तान में प्रताड़ित होते हैं तो उन्हें यहां शरण दी जाएगी।
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संविधान सातवीं अनुसूची के प्रथम सूची में जो भी विषय है उस संसद को उस पर कानून बनाने का पूर्ण अधिकार है। सातवीं सूची का जिक्र करते हुए कहा कि सूची 17 में लिखा है कि नागरिकता संबंधित हर विषय पर संसद को ही कानून बनाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि भारत विभाजन के समय पाकिस्तान गए हिंदू व सिख जो प्रताड़ित होकर वापस आ गए हैं, उन्हें शरण देना भी भारत का संवैधानिक दायित्व हैं।
राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जनसंख्या रजिस्टर वह है जिसमें भारत में रहने वाले व्यक्ति की गणना की जाती है। सेंसेक्स एप के मुताबिक देश की जनगणना करते हैं तो जनसंख्या का पता तो चल जाता है मगर डिटेल नहीं मिलती है। इस पर कानून का बंधन है। जनसंख्या रजिस्टर से देश के विकास की नीति बनाने में मदद मिलती है। 15 मार्च 2010 के गजट को पढ़ कर उन्होंने कहा कि नागरिकता नियमावली 2003 के तहत प्रदत्त शक्तियों के आधार केंद्र सरकार देश में जनसंख्या रजिस्टर तैयार करने का निर्णय लेती है। उस समय कांग्रेस सत्ता में थी और मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। अब इस पर भी कांग्रेस हाय-तौबा मचा रही है।