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Faridabad News: डिपो में मैकेनिक की कमी, सर्विस समय पर नहीं होने से बसें हो रही खराब
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लोगों को करना पड़ता है परेशानी का सामना, नहीं हो रहा समस्या का समाधान
हेमलता रावत
बल्लभगढ़। बस डिपो में मैकेनिक की कमी के कारण बसों की सर्विस समय पर नहीं हो पा रही है। इसी वजह से रोडवेज बसें आए दिन खराबी के कारण रूट पर ही खराब हो जाती हैं। इस समस्या को लेकर वर्क्स मैनेजर की ओर से कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है।
बल्लभगढ़ बस डिपो के पास कुल 158 रोडवेज बसें हैं। जिसमें किलोमीटर स्कीम के अलावा मिनी बसें और एसी बसें भी शामिल हैं। जिसमें से रोजाना करीब 120 बसें विभिन्न रूटों पर संचालित की जाती हैं। लंबे रूटों पर जाने वाली बसों की सर्विस सही से नहीं होने की वजह से आए दिन कोई न कोई खराबी देखने को मिल रही है। जिसका मुख्य कारण मैकेनिक की कमी है। नियम के अनुसार 12 रोडवेज बसों पर 10 मैकेनिक होने चाहिए, लेकिन उनके पास 158 बसों पर मात्र 24 मैकेनिक हैं। जो डिपो में कार्य कर रहे हैं। जिसमें से एक कौशल योजना के तहत कार्य कर रहा है। मैकेनिक की कमी के कारण बसों में छोटे छोटे कार्य समय के अनुसार नहीं हो पाते हैं। इसी वजह से रोजाना दो से तीन बसें रूटों पर खराब हो जाती हैं। जिससे परिवहन विभाग के राजस्व में तो कमी होती है साथ ही यात्रियों को भी परेशानी होती है।
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टाटा की बसों का नहीं है कोई मैकेनिक
डिपो के पास बीएस 6 की टाटा कंपनी की करीब 40 से अधिक बसें हैं। जिनको ठीक करने के लिए उनके पास कोई भी मैकेनिक नहीं है। इस लिए टाटा की बसों में अगर कोई खराबी होती है तो उनको ठीक करने के लिए गुरुग्राम में भेजा जाता है।
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कई बार लिख चुके हैं पत्र
वर्क्स मैनेजर जितेंद्र कुमार ने बताया कि उनके पास मैकेनिक की कमी है। इसको लेकर वह कई बार पत्र के जरिए उच्च अधिकारियों को अवगत करवा चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है। इसी वजह से बसों के छोटे छोटे कार्य समय पर नहीं हो पाते हैं।
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हेमलता रावत
बल्लभगढ़। बस डिपो में मैकेनिक की कमी के कारण बसों की सर्विस समय पर नहीं हो पा रही है। इसी वजह से रोडवेज बसें आए दिन खराबी के कारण रूट पर ही खराब हो जाती हैं। इस समस्या को लेकर वर्क्स मैनेजर की ओर से कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है।
बल्लभगढ़ बस डिपो के पास कुल 158 रोडवेज बसें हैं। जिसमें किलोमीटर स्कीम के अलावा मिनी बसें और एसी बसें भी शामिल हैं। जिसमें से रोजाना करीब 120 बसें विभिन्न रूटों पर संचालित की जाती हैं। लंबे रूटों पर जाने वाली बसों की सर्विस सही से नहीं होने की वजह से आए दिन कोई न कोई खराबी देखने को मिल रही है। जिसका मुख्य कारण मैकेनिक की कमी है। नियम के अनुसार 12 रोडवेज बसों पर 10 मैकेनिक होने चाहिए, लेकिन उनके पास 158 बसों पर मात्र 24 मैकेनिक हैं। जो डिपो में कार्य कर रहे हैं। जिसमें से एक कौशल योजना के तहत कार्य कर रहा है। मैकेनिक की कमी के कारण बसों में छोटे छोटे कार्य समय के अनुसार नहीं हो पाते हैं। इसी वजह से रोजाना दो से तीन बसें रूटों पर खराब हो जाती हैं। जिससे परिवहन विभाग के राजस्व में तो कमी होती है साथ ही यात्रियों को भी परेशानी होती है।
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टाटा की बसों का नहीं है कोई मैकेनिक
डिपो के पास बीएस 6 की टाटा कंपनी की करीब 40 से अधिक बसें हैं। जिनको ठीक करने के लिए उनके पास कोई भी मैकेनिक नहीं है। इस लिए टाटा की बसों में अगर कोई खराबी होती है तो उनको ठीक करने के लिए गुरुग्राम में भेजा जाता है।
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कई बार लिख चुके हैं पत्र
वर्क्स मैनेजर जितेंद्र कुमार ने बताया कि उनके पास मैकेनिक की कमी है। इसको लेकर वह कई बार पत्र के जरिए उच्च अधिकारियों को अवगत करवा चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है। इसी वजह से बसों के छोटे छोटे कार्य समय पर नहीं हो पाते हैं।