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हड्डी रोग विशेषज्ञ को दिखाना है तो ओपीडी कार्ड नहीं बनेगा
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फरीदाबाद। बीके सिविल अस्पताल में इन दिनों हड्डी रोगियों को खासी मुसीबत झेलनी पड़ रही है। औपचारिक रूप से अस्पताल में दो हड्डी रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। लेकिन इन में से एक डॉक्टर 6 माह के प्रशिक्षण पर एम्स शाखा में हैं। दूसरे डॉक्टर को प्रतिनियुक्ति पर चार दिन के लिए बीके में तैनात किया गया है। ऐसे में मरीजों को बिना ओपीडी कार्ड ही या तो इमरजेंसी या फिर सीधे ऑपरेशन थिएटर में भेजा जा रहा है
दरअसल बीके में डॉ. आरएस गौड़ और सतीश वर्मा दो हड्डी रोग विशेषज्ञ कार्यरत हैं। इनमें से सतीश वर्मा प्रतिनियुक्ति पर चार दिन अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं। इसमें से दो दिन ओपीडी और दो दिन ऑपरेशन थिएटर में कार्यरत होते हैं जबकि दूसरे डॉक्टर रवि शंकर गौड़ छह माह के प्रशिक्षण पर एम्स में सेवाएं दे रहे हैं। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को तत्काल ही या तो ऑपरेशन थिएटर में भेज दिया जाता है या रेफर कर दिया जाता है जबकि मंगलवार और शुक्रवार को ओपीडी पूरी तरह ठप पड़ी रहती है।
इन दिनों मरीजों के ओपीडी कार्ड नहीं बनाए जाते। ऐसे में या तो मरीजों को अन्य दिन आने के लिए बोल दिया जाता है या फिर उन्हें किसी अन्य डॉक्टर के पास परामर्श के लिए भेज दिया जाता है। बुजुर्ग मरीजों को इस दौरान अपने हड्डी रोग के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। जोड़ों के दर्द, सूजन व अन्य किसी हड्डी रोग से पीड़ित मरीजों को समय से इलाज नहीं मिल पा रहा है। उधर अस्पताल प्रबंधन सहायक डॉ. धीमन का कहना है कि मरीजों को डॉक्टर की कमी के कारण कोई परेशानी नहीं हो रही है। मरीजों को सीधे इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर देख लेते हैं। चार दिन में साधारण मरीजों को परामर्श दिया जा रहा है।
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दरअसल बीके में डॉ. आरएस गौड़ और सतीश वर्मा दो हड्डी रोग विशेषज्ञ कार्यरत हैं। इनमें से सतीश वर्मा प्रतिनियुक्ति पर चार दिन अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं। इसमें से दो दिन ओपीडी और दो दिन ऑपरेशन थिएटर में कार्यरत होते हैं जबकि दूसरे डॉक्टर रवि शंकर गौड़ छह माह के प्रशिक्षण पर एम्स में सेवाएं दे रहे हैं। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को तत्काल ही या तो ऑपरेशन थिएटर में भेज दिया जाता है या रेफर कर दिया जाता है जबकि मंगलवार और शुक्रवार को ओपीडी पूरी तरह ठप पड़ी रहती है।
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इन दिनों मरीजों के ओपीडी कार्ड नहीं बनाए जाते। ऐसे में या तो मरीजों को अन्य दिन आने के लिए बोल दिया जाता है या फिर उन्हें किसी अन्य डॉक्टर के पास परामर्श के लिए भेज दिया जाता है। बुजुर्ग मरीजों को इस दौरान अपने हड्डी रोग के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। जोड़ों के दर्द, सूजन व अन्य किसी हड्डी रोग से पीड़ित मरीजों को समय से इलाज नहीं मिल पा रहा है। उधर अस्पताल प्रबंधन सहायक डॉ. धीमन का कहना है कि मरीजों को डॉक्टर की कमी के कारण कोई परेशानी नहीं हो रही है। मरीजों को सीधे इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर देख लेते हैं। चार दिन में साधारण मरीजों को परामर्श दिया जा रहा है।
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