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Faridabad News: 17 राज्यों में 54 साइबर ठगी के मामलों से जुड़े चार आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज
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अदालत ने कहा- गंभीर साइबर अपराधों में पीड़ित से समझौता जमानत का पर्याप्त आधार नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। देश के 17 राज्यों में साइबर ठगी का नेटवर्क चलाने और 54 शिकायतों से जुड़े फर्जी बैंक खाते का इस्तेमाल करने के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने चार आरोपियों ओमकार यादव, राकेश पाल, रौनक पाल और अमन दुबे की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। डिजिटल अरेस्ट का खौफ दिखाकर सेक्टर-85 निवासी राजेंद्र कृष्ण चौधरी से 1.24 करोड़ रुपये की ठगी के इस मामले में अदालत ने पाया कि आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खाते के तार देशव्यापी ठगी से जुड़े हैं। अदालत ने अपराध की गंभीरता और जारी जांच को देखते हुए आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया।
मामले के अनुसार, 30 मार्च को पीड़ित के पास साइबर ठगों की कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को 300 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी के झूठे मामले में फंसाने व तुरंत गिरफ्तार करने की धमकी दी। पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए सुप्रीम कोर्ट, आरबीआई और आयकर विभाग की फर्जी मुहर लगे दस्तावेज व्हाट्सएप पर भेजे गए। इसके बाद डरा-धमकाकर दो से 27 अप्रैल के बीच 1,24,45,000 रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए।
पुलिस जांच में सामने आया कि ठगी की रकम में से 12 लाख रुपये बॉन्ड क्रेज सर्विसेज (ओपीसी) प्रा. लि. नाम की शैल कंपनी के खाते में ट्रांसफर हुए थे। यह खाता आरोपी ओमकार, अमन, रौनक और राकेश ने फर्जी दस्तावेजों के दम पर खुलवाकर मुख्य साइबर ठगों को मुहैया कराया था। इसी खाते के खिलाफ 17 राज्यों में 54 शिकायतें दर्ज हैं। आरोपी राकेश पाल पर यूपी के कुशीनगर में भी धोखाधड़ी के दो मामले दर्ज हैं।
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सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने शिकायतकर्ता से समझौते और सह-आरोपियों को मिली जमानत का हवाला देकर राहत मांगी। हालांकि, अदालत ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट जैसे गंभीर व सुनियोजित साइबर अपराधों में पीड़ित से समझौते की दलील जमानत का आधार नहीं बन सकती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। देश के 17 राज्यों में साइबर ठगी का नेटवर्क चलाने और 54 शिकायतों से जुड़े फर्जी बैंक खाते का इस्तेमाल करने के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने चार आरोपियों ओमकार यादव, राकेश पाल, रौनक पाल और अमन दुबे की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। डिजिटल अरेस्ट का खौफ दिखाकर सेक्टर-85 निवासी राजेंद्र कृष्ण चौधरी से 1.24 करोड़ रुपये की ठगी के इस मामले में अदालत ने पाया कि आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खाते के तार देशव्यापी ठगी से जुड़े हैं। अदालत ने अपराध की गंभीरता और जारी जांच को देखते हुए आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया।
मामले के अनुसार, 30 मार्च को पीड़ित के पास साइबर ठगों की कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को 300 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी के झूठे मामले में फंसाने व तुरंत गिरफ्तार करने की धमकी दी। पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए सुप्रीम कोर्ट, आरबीआई और आयकर विभाग की फर्जी मुहर लगे दस्तावेज व्हाट्सएप पर भेजे गए। इसके बाद डरा-धमकाकर दो से 27 अप्रैल के बीच 1,24,45,000 रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए।
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पुलिस जांच में सामने आया कि ठगी की रकम में से 12 लाख रुपये बॉन्ड क्रेज सर्विसेज (ओपीसी) प्रा. लि. नाम की शैल कंपनी के खाते में ट्रांसफर हुए थे। यह खाता आरोपी ओमकार, अमन, रौनक और राकेश ने फर्जी दस्तावेजों के दम पर खुलवाकर मुख्य साइबर ठगों को मुहैया कराया था। इसी खाते के खिलाफ 17 राज्यों में 54 शिकायतें दर्ज हैं। आरोपी राकेश पाल पर यूपी के कुशीनगर में भी धोखाधड़ी के दो मामले दर्ज हैं।
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सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने शिकायतकर्ता से समझौते और सह-आरोपियों को मिली जमानत का हवाला देकर राहत मांगी। हालांकि, अदालत ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट जैसे गंभीर व सुनियोजित साइबर अपराधों में पीड़ित से समझौते की दलील जमानत का आधार नहीं बन सकती है।