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Faridabad News: साइबर ठगी के आरोपी को जमानत देने से इन्कार
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फरीदाबाद। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केपी सिंह की अदालत ने एक महिला से करीब दो लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में मुख्य आरोपी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह ठगी इंस्टाग्राम पर घर बैठे काम का लालच देकर की गई थी। अदालत ने दो सह-आरोपियों सूरज कुमार और सिद्धार्थ को जमानत दे दी।
शिकायतकर्ता महिला ने इंस्टाग्राम पर एक रील देखी थी। इसके बाद उन्हें व्हाट्सएप पर घर बैठे काम का प्रस्ताव मिला और टेलीग्राम से जुड़ने को कहा गया। शुरुआत में उन्हें वेतन भी दिया गया और 180 कार्य सौंपे गए। बाद में अलग-अलग कार्यों के नाम पर उनसे पैसे जमा करवाए जाने लगे। जब शिकायतकर्ता ने अपने पैसे निकालने का प्रयास किया तो पोर्टल बंद मिला। इसे खुलवाने के लिए दोबारा रुपये मांगे गए। कुल 1.96 लाख रुपये की ठगी हुई थी। साइबर अपराध थाना बल्लभगढ़ ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी।
अदालत ने मुख्य आरोपी अभिषेक कुमार के बैंक खाते में ठगी की रकम जमा होने और इसी खाते से जुड़े एक अन्य साइबर अपराध की शिकायत का संज्ञान लिया। पुलिस के जवाब के अनुसार, अभिषेक के इंडियन ओवरसीज बैंक खाते में 50 हजार रुपये जमा हुए थे। एक अन्य शिकायत में इसी खाते में 30 हजार रुपये जमा होने का उल्लेख था। जांच पूरी नहीं होने के आधार पर अभिषेक की जमानत याचिका खारिज की गई। अदालत ने सह-आरोपी सूरज कुमार और सिद्धार्थ को जमानत दे दी। अदालत ने पाया कि वे शिकायतकर्ता से सीधे संपर्क करने वाले व्यक्ति नहीं थे। उन्हें इस मामले में लाभार्थी भी नहीं बताया गया था। शिकायतकर्ता ने भी अदालत में समझौता होने की बात कही थी। दोनों के खिलाफ कोई अन्य आपराधिक मामला लंबित नहीं था। ब्यूरो
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शिकायतकर्ता महिला ने इंस्टाग्राम पर एक रील देखी थी। इसके बाद उन्हें व्हाट्सएप पर घर बैठे काम का प्रस्ताव मिला और टेलीग्राम से जुड़ने को कहा गया। शुरुआत में उन्हें वेतन भी दिया गया और 180 कार्य सौंपे गए। बाद में अलग-अलग कार्यों के नाम पर उनसे पैसे जमा करवाए जाने लगे। जब शिकायतकर्ता ने अपने पैसे निकालने का प्रयास किया तो पोर्टल बंद मिला। इसे खुलवाने के लिए दोबारा रुपये मांगे गए। कुल 1.96 लाख रुपये की ठगी हुई थी। साइबर अपराध थाना बल्लभगढ़ ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी।
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अदालत ने मुख्य आरोपी अभिषेक कुमार के बैंक खाते में ठगी की रकम जमा होने और इसी खाते से जुड़े एक अन्य साइबर अपराध की शिकायत का संज्ञान लिया। पुलिस के जवाब के अनुसार, अभिषेक के इंडियन ओवरसीज बैंक खाते में 50 हजार रुपये जमा हुए थे। एक अन्य शिकायत में इसी खाते में 30 हजार रुपये जमा होने का उल्लेख था। जांच पूरी नहीं होने के आधार पर अभिषेक की जमानत याचिका खारिज की गई। अदालत ने सह-आरोपी सूरज कुमार और सिद्धार्थ को जमानत दे दी। अदालत ने पाया कि वे शिकायतकर्ता से सीधे संपर्क करने वाले व्यक्ति नहीं थे। उन्हें इस मामले में लाभार्थी भी नहीं बताया गया था। शिकायतकर्ता ने भी अदालत में समझौता होने की बात कही थी। दोनों के खिलाफ कोई अन्य आपराधिक मामला लंबित नहीं था। ब्यूरो
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