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Faridabad News: 1.91 करोड़ धोखाधड़ी केस में अग्रिम जमानत खारिज
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- कोर्ट ने कहा- फर्जी हस्ताक्षर की रिपोर्ट के बावजूद आरोपी के खिलाफ मिली मिलीभगत और पैसों के लेनदेन की परिस्थितियां, राहत देने लायक नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अदालत ने करीब 1.91 करोड़ की कथित धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के मामले में आरोपी अजय सोनी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने माना कि मामले में साजिश, आर्थिक लेनदेन और परिस्थितिजन्य साक्ष्य आरोपी की भूमिका की ओर इशारा करते हैं, इसलिए उसे राहत नहीं दी जा सकती है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने आठ मई 2026 को यह आदेश पारित किया। मामला थाना सूरजकुंड में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता राजेश कुमार ने आरोप लगाया था कि अजय सोनी और सह-आरोपी कृष्ण कुमार ने खुद को बिल्डर बताकर ग्रीन फील्ड कॉलोनी के प्लॉटों में फ्लैट निर्माण और मुनाफा बांटने का झांसा देकर उससे 1,91,84,909 की रकम ले ली।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि संबंधित एग्रीमेंट पर अजय सोनी के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए हैं। आरएफएसएल भोंडसी की रिपोर्ट में भी हस्ताक्षर जाली बताए गए थे। वहीं अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी और सह-आरोपी की मिलीभगत से पूरी साजिश रची गई व सह-आरोपी के खाते से अजय सोनी को पांच लाख ट्रांसफर होने का रिकॉर्ड भी मौजूद है।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि साजिश जैसे अपराध प्रत्यक्ष सबूतों से नहीं बल्कि परिस्थितिजन्य तथ्यों और आरोपियों के आपसी सहयोग से साबित होते हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि यदि आरोपी को कथित सौदों की जानकारी नहीं थी तो 2016 से 2018 के बीच प्लॉटों पर चल रहे निर्माण कार्य को उसने क्यों नहीं रोका। कोर्ट ने कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और उपलब्ध रिकॉर्ड प्रथम दृष्टया आरोपी की संलिप्तता दर्शाते हैं। इसी आधार पर अजय सोनी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अदालत ने करीब 1.91 करोड़ की कथित धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के मामले में आरोपी अजय सोनी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने माना कि मामले में साजिश, आर्थिक लेनदेन और परिस्थितिजन्य साक्ष्य आरोपी की भूमिका की ओर इशारा करते हैं, इसलिए उसे राहत नहीं दी जा सकती है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने आठ मई 2026 को यह आदेश पारित किया। मामला थाना सूरजकुंड में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता राजेश कुमार ने आरोप लगाया था कि अजय सोनी और सह-आरोपी कृष्ण कुमार ने खुद को बिल्डर बताकर ग्रीन फील्ड कॉलोनी के प्लॉटों में फ्लैट निर्माण और मुनाफा बांटने का झांसा देकर उससे 1,91,84,909 की रकम ले ली।
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सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि संबंधित एग्रीमेंट पर अजय सोनी के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए हैं। आरएफएसएल भोंडसी की रिपोर्ट में भी हस्ताक्षर जाली बताए गए थे। वहीं अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी और सह-आरोपी की मिलीभगत से पूरी साजिश रची गई व सह-आरोपी के खाते से अजय सोनी को पांच लाख ट्रांसफर होने का रिकॉर्ड भी मौजूद है।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि साजिश जैसे अपराध प्रत्यक्ष सबूतों से नहीं बल्कि परिस्थितिजन्य तथ्यों और आरोपियों के आपसी सहयोग से साबित होते हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि यदि आरोपी को कथित सौदों की जानकारी नहीं थी तो 2016 से 2018 के बीच प्लॉटों पर चल रहे निर्माण कार्य को उसने क्यों नहीं रोका। कोर्ट ने कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और उपलब्ध रिकॉर्ड प्रथम दृष्टया आरोपी की संलिप्तता दर्शाते हैं। इसी आधार पर अजय सोनी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई।