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Faridabad News: बीएलओ ड्यूटी से प्रभावित हो रहीं पशु स्वास्थ्य सेवाएं
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फरीदाबाद जिला प्रशासन ने पशुपालन विभाग के कर्मचारियों को चुनाव आयोग के तहत बूथ लेवल ऑफिसर की ड
- फोटो : इकौना के मैनिहवा गांव में हुई मारपीट में घायल लोग।
वीएलडीए की गैर-विभागीय ड्यूटी लगाए जाने से राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान पर असर
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। पशुपालन विभाग के पशु चिकित्सा पशुधन विकास सहायक (वीएलडीए) कर्मचारियों की गैर-विभागीय ड्यूटी लगाए जाने से जिले में पशु स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगी हैं। कर्मचारियों का कहना है कि पहले से चल रहे राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान और अन्य विभागीय जिम्मेदारियों के बीच बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की ड्यूटी सौंपे जाने से कार्यभार अत्यधिक बढ़ गया है, जिसका असर जिले के करीब डेढ़ लाख पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
वर्तमान में पशुपालन विभाग द्वारा संक्रामक रोगों से बचाव के लिए घर-घर जाकर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत वीएलडीए कर्मचारी गांवों में जाकर पशुओं का टीकाकरण, टैगिंग और डाटा अपलोड करने का कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा कृत्रिम गर्भाधान, पशुओं का उपचार और विभागीय योजनाओं को पशुपालकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी इन्हीं कर्मचारियों पर है।
कर्मचारियों का कहना है कि विभागीय कार्यों के साथ-साथ पहले एग्री स्टैक और जनगणना जैसे कार्यों में भी उनकी ड्यूटी लगाई गई थी। अब प्रशासन ने उन्हें बीएलओ की जिम्मेदारी भी सौंप दी है। इससे पशु अस्पतालों और डिस्पेंसरियों में नियमित सेवाएं प्रभावित हो रही हैं तथा ओपीडी पर भी असर पड़ रहा है।
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वेटरिनरी सर्विसेज एसोसिएशन फरीदाबाद के जिला प्रधान राजबेल देशवाल ने कहा कि वीएलडीए कर्मचारी पशुपालन विभाग की रीढ़ हैं। एक कर्मचारी पर कई गांवों और हजारों पशुओं की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग द्वारा पशुपालन विभाग के कर्मचारियों को चुनावी ड्यूटी से छूट प्रदान की गई है, इसके बावजूद उनकी बीएलओ ड्यूटी लगाई गई है।
एसोसिएशन ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पशुधन के स्वास्थ्य और टीकाकरण अभियान की सफलता को देखते हुए वीएलडीए कर्मचारियों को बीएलओ ड्यूटी से तत्काल मुक्त किया जाए, ताकि पशु स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रूप से जारी रह सकें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। पशुपालन विभाग के पशु चिकित्सा पशुधन विकास सहायक (वीएलडीए) कर्मचारियों की गैर-विभागीय ड्यूटी लगाए जाने से जिले में पशु स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगी हैं। कर्मचारियों का कहना है कि पहले से चल रहे राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान और अन्य विभागीय जिम्मेदारियों के बीच बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की ड्यूटी सौंपे जाने से कार्यभार अत्यधिक बढ़ गया है, जिसका असर जिले के करीब डेढ़ लाख पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
वर्तमान में पशुपालन विभाग द्वारा संक्रामक रोगों से बचाव के लिए घर-घर जाकर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत वीएलडीए कर्मचारी गांवों में जाकर पशुओं का टीकाकरण, टैगिंग और डाटा अपलोड करने का कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा कृत्रिम गर्भाधान, पशुओं का उपचार और विभागीय योजनाओं को पशुपालकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी इन्हीं कर्मचारियों पर है।
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कर्मचारियों का कहना है कि विभागीय कार्यों के साथ-साथ पहले एग्री स्टैक और जनगणना जैसे कार्यों में भी उनकी ड्यूटी लगाई गई थी। अब प्रशासन ने उन्हें बीएलओ की जिम्मेदारी भी सौंप दी है। इससे पशु अस्पतालों और डिस्पेंसरियों में नियमित सेवाएं प्रभावित हो रही हैं तथा ओपीडी पर भी असर पड़ रहा है।
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वेटरिनरी सर्विसेज एसोसिएशन फरीदाबाद के जिला प्रधान राजबेल देशवाल ने कहा कि वीएलडीए कर्मचारी पशुपालन विभाग की रीढ़ हैं। एक कर्मचारी पर कई गांवों और हजारों पशुओं की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग द्वारा पशुपालन विभाग के कर्मचारियों को चुनावी ड्यूटी से छूट प्रदान की गई है, इसके बावजूद उनकी बीएलओ ड्यूटी लगाई गई है।
एसोसिएशन ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पशुधन के स्वास्थ्य और टीकाकरण अभियान की सफलता को देखते हुए वीएलडीए कर्मचारियों को बीएलओ ड्यूटी से तत्काल मुक्त किया जाए, ताकि पशु स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रूप से जारी रह सकें।