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Faridabad News: सात साल बाद भी नहीं मिला पशु पालक को बीमा का पैसा
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संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। भैंस की मौत होने के सात साल बाद भी बीमा कंपनी द्वारा पशु पालक को मुआवजा नहीं दिया गया। पशु पालक ने सरकारी योजना के तहत भैंस के पूरे दस्तावेजों को जमा कराया। कोर्ट की ओर से आदेश होने के बाद भी बीमा कंपनी की ओर से मुआवजा नहीं मिला। पीड़ित की शिकायत पर छांयसा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गावं महमदपुर निवासी कमलेश ने बताया कि वह पशुपालक है। वह अपने परिवार का पालन पोषण भैंस का दूध बेचकर करती है। उनके पास तीन भैंस थीं। जिनका हरियाणा सरकार की पशु बीमा योजना के तहत बीमा कराया हुआ था। भैंस का बीमा पशु चिकित्सक अधिकारी मोहना के द्वारा करवाने के बाद उनको रसीद दी गई। बीमा होने के बाद पशु के कान पर एक टैग लगाया गया। भैंस का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा किया गया। सितंबर 2016 में उनकी भैंस बीमार हो गई, जिसकी सूचना उन्होंने हल्का सरकारी पशु चिकित्सक डॉक्टर लेखी को दी। डॉक्टर ने बीमारी का इलाज कर दिया लेकिन 2 अक्तूबर 2016 को उनकी भैंस की मौत हो गई। उस समय भैंस दूध दे रही थी और जिसकी कीमत प्रमाण-पत्र के अनुसार 60 हजार रुपये थी। भैंस की मृत्यु हो जाने के उपरांत इसकी सूचना तुरंत हल्का के वेटनरी डॉक्टर को दी। पशु चिकित्सक डॉक्टर लेखी ने 3 अक्तूबर को भैंस का पोस्टमार्टम करके फोटो खींचकर क्लेम फार्म पर हस्ताक्षर कराए। कोर्ट की ओर से बीमा कंपनी को आदेश दिए गए कि वह भैंस का जो भी मुआवजा बनता है वह उन्हें जल्द से जल्द अदा करें। इसके बाद बीमा कंपनी के अधिकारियों द्वारा उन्हें बार-बार बुलाया जाता रहा। सभी प्रकार के दस्तावेजों को पूरा करने के बावजूद सात साल बाद भी उनको कोई मुआवजा नहीं दिया गया। थाना छांयसा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी है।
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बल्लभगढ़। भैंस की मौत होने के सात साल बाद भी बीमा कंपनी द्वारा पशु पालक को मुआवजा नहीं दिया गया। पशु पालक ने सरकारी योजना के तहत भैंस के पूरे दस्तावेजों को जमा कराया। कोर्ट की ओर से आदेश होने के बाद भी बीमा कंपनी की ओर से मुआवजा नहीं मिला। पीड़ित की शिकायत पर छांयसा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गावं महमदपुर निवासी कमलेश ने बताया कि वह पशुपालक है। वह अपने परिवार का पालन पोषण भैंस का दूध बेचकर करती है। उनके पास तीन भैंस थीं। जिनका हरियाणा सरकार की पशु बीमा योजना के तहत बीमा कराया हुआ था। भैंस का बीमा पशु चिकित्सक अधिकारी मोहना के द्वारा करवाने के बाद उनको रसीद दी गई। बीमा होने के बाद पशु के कान पर एक टैग लगाया गया। भैंस का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा किया गया। सितंबर 2016 में उनकी भैंस बीमार हो गई, जिसकी सूचना उन्होंने हल्का सरकारी पशु चिकित्सक डॉक्टर लेखी को दी। डॉक्टर ने बीमारी का इलाज कर दिया लेकिन 2 अक्तूबर 2016 को उनकी भैंस की मौत हो गई। उस समय भैंस दूध दे रही थी और जिसकी कीमत प्रमाण-पत्र के अनुसार 60 हजार रुपये थी। भैंस की मृत्यु हो जाने के उपरांत इसकी सूचना तुरंत हल्का के वेटनरी डॉक्टर को दी। पशु चिकित्सक डॉक्टर लेखी ने 3 अक्तूबर को भैंस का पोस्टमार्टम करके फोटो खींचकर क्लेम फार्म पर हस्ताक्षर कराए। कोर्ट की ओर से बीमा कंपनी को आदेश दिए गए कि वह भैंस का जो भी मुआवजा बनता है वह उन्हें जल्द से जल्द अदा करें। इसके बाद बीमा कंपनी के अधिकारियों द्वारा उन्हें बार-बार बुलाया जाता रहा। सभी प्रकार के दस्तावेजों को पूरा करने के बावजूद सात साल बाद भी उनको कोई मुआवजा नहीं दिया गया। थाना छांयसा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी है।
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