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Faridabad News: आपातकाल का गुस्सा, कांग्रेस को पहली लोकसभा में किया धराशायी
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1977 में फरीदाबाद सीट पर पहली बार हुआ था लोकसभा का चुनाव
निभा रजक
फरीदाबाद। 25 जून 1975 एक ऐसा दिन जब भारत में आपातकाल लागू किया गया, जो 21 मार्च 1977 तक चला। देश में 21 महीने तक चले आपातकाल का गुस्सा फरीदाबादवासियों ने जाहिर करते हुए कांग्रेस पार्टी को पहले ही लोकसभा चुनाव में झेलना पड़ा। कांग्रेस प्रत्याशी तयैब हुसैन को शहर से केवल 58079 (13.91 प्रतिशत) वोट मिले थे। लोगों के मुताबिक, उस दौरान सरकार के खिलाफ बोलने वालों को जेल में बंद कर दिया जाता था।
एक नवंबर 1966 को हरियाणा को अलग राज्य बनाया गया और उसके बाद 1967 में हुए चौथी लोकसभा के चुनावों के दौरान हरियाणा की लोकसभा सीटों के लिए मतदान किया गया। उस समय हरियाणा में नौ लोकसभा सीटें थीं। इनमें अंबाला, करनाल, कैथल, रोहतक, झज्जर, गुड़गांव, महेंद्रगढ़, हिसार और सिरसा शामिल थे। फरीदाबाद के लिए पहले और देश के छठे लोकसभा चुनावों के दौरान फरीदाबाद सीट से सात उम्मीदवारों ने सांसद का चुनाव लड़ा था। पहले लोकसभा चुनाव में इस सीट पर 70.81 प्रतिशत वोटिंग हुई। भारतीय लोक पार्टी के धर्मवीर वशिष्ठ को 44.30 प्रतिशत, निर्दलीय के खुरशिद अहमद को 37.75, कांग्रेस पार्टी के तैयब हुसैन को 13.91 प्रतिशत, निर्दलीय टीबी कामले भोला कामले को 1.84 प्रतिशत, निर्दलीय करण सिंह को 1.70 प्रतिशत, सीपीएम पार्टी के इस्लाम अलियस इस्लामुद्दीन 0.27 प्रतिशत और निर्दलीय वीर सिंह डागर को 0.23 प्रतिशत वोट मिले। भारतीय लोक पार्टी के उम्मीदवार धर्मवीर वशिष्ठ इस चुनाव को जीत कर फरीदाबाद से पहले सांसद बने थे। उन्होंने एक लाख 84 हजार 948 वोट हासिल किये थे।
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अचानक मिली थी सूचना
उस दौरान के मतदाताओं और लोगों की मानें तो इंदिरा गांधी ने अपने राजनीतिक विरोधियों को जेल में बंद करवा दिया था। देश के लोगों ने रेडियो पर देश में आपातकाल की घोषणा सुनीं। सालों बाद भले ही देश के लोकतंत्र की गरिमामयी तस्वीर दुनिया को दिखाई देती है। तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत देश में आपातकाल लागू कर दिया, इसका असर चुनाव में नजर आया। लोगों ने वोट के माध्यम से अपना गुस्सा जाहिर किया।
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लोगों से बातचीत
उस दौरान मैं 23 वर्ष का था। रेडियो पर अचानक आपातकाल की सूचना से लोग स्तब्ध हो गए। पहली बार इस तरह का कुछ हुआ था। राजनीतिक पार्टियों ने विरोध शुरू कर दिया। डर के कारण उन दिनों आम लोगों का घर से बाहर निकलना बंद कर दिया गया था। सरकार के खिलाफ बोलने वालों को महीनों जेल में बंद किया गया था। यह भारतीय इतिहास में हमेशा काला अध्याय के रूप में जाना जाएगा।
-सुरेंद्र सिंह, स्थानीय निवासी सेक्टर-21 डी-
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आपातकाल के दौरान लगभग 20 साल उम्र होगी। उस समय सरकार के खिलाफ गीत, फिल्म कुछ भी नहीं बना सकते थे। खबरें सेंसर कर दी गई थीं। राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों ने भी घरों से निकलना बंद कर दिया था। अधिकारी भी समय पर कार्यालय पहुंचने लगे थे। मनमानी का असर ये हुआ कि चुनाव में सरकार धराशायी हो गई।
-रविंद्र चावला, स्थानीय निवासी एनआईटी-
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निभा रजक
फरीदाबाद। 25 जून 1975 एक ऐसा दिन जब भारत में आपातकाल लागू किया गया, जो 21 मार्च 1977 तक चला। देश में 21 महीने तक चले आपातकाल का गुस्सा फरीदाबादवासियों ने जाहिर करते हुए कांग्रेस पार्टी को पहले ही लोकसभा चुनाव में झेलना पड़ा। कांग्रेस प्रत्याशी तयैब हुसैन को शहर से केवल 58079 (13.91 प्रतिशत) वोट मिले थे। लोगों के मुताबिक, उस दौरान सरकार के खिलाफ बोलने वालों को जेल में बंद कर दिया जाता था।
एक नवंबर 1966 को हरियाणा को अलग राज्य बनाया गया और उसके बाद 1967 में हुए चौथी लोकसभा के चुनावों के दौरान हरियाणा की लोकसभा सीटों के लिए मतदान किया गया। उस समय हरियाणा में नौ लोकसभा सीटें थीं। इनमें अंबाला, करनाल, कैथल, रोहतक, झज्जर, गुड़गांव, महेंद्रगढ़, हिसार और सिरसा शामिल थे। फरीदाबाद के लिए पहले और देश के छठे लोकसभा चुनावों के दौरान फरीदाबाद सीट से सात उम्मीदवारों ने सांसद का चुनाव लड़ा था। पहले लोकसभा चुनाव में इस सीट पर 70.81 प्रतिशत वोटिंग हुई। भारतीय लोक पार्टी के धर्मवीर वशिष्ठ को 44.30 प्रतिशत, निर्दलीय के खुरशिद अहमद को 37.75, कांग्रेस पार्टी के तैयब हुसैन को 13.91 प्रतिशत, निर्दलीय टीबी कामले भोला कामले को 1.84 प्रतिशत, निर्दलीय करण सिंह को 1.70 प्रतिशत, सीपीएम पार्टी के इस्लाम अलियस इस्लामुद्दीन 0.27 प्रतिशत और निर्दलीय वीर सिंह डागर को 0.23 प्रतिशत वोट मिले। भारतीय लोक पार्टी के उम्मीदवार धर्मवीर वशिष्ठ इस चुनाव को जीत कर फरीदाबाद से पहले सांसद बने थे। उन्होंने एक लाख 84 हजार 948 वोट हासिल किये थे।
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अचानक मिली थी सूचना
उस दौरान के मतदाताओं और लोगों की मानें तो इंदिरा गांधी ने अपने राजनीतिक विरोधियों को जेल में बंद करवा दिया था। देश के लोगों ने रेडियो पर देश में आपातकाल की घोषणा सुनीं। सालों बाद भले ही देश के लोकतंत्र की गरिमामयी तस्वीर दुनिया को दिखाई देती है। तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत देश में आपातकाल लागू कर दिया, इसका असर चुनाव में नजर आया। लोगों ने वोट के माध्यम से अपना गुस्सा जाहिर किया।
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लोगों से बातचीत
उस दौरान मैं 23 वर्ष का था। रेडियो पर अचानक आपातकाल की सूचना से लोग स्तब्ध हो गए। पहली बार इस तरह का कुछ हुआ था। राजनीतिक पार्टियों ने विरोध शुरू कर दिया। डर के कारण उन दिनों आम लोगों का घर से बाहर निकलना बंद कर दिया गया था। सरकार के खिलाफ बोलने वालों को महीनों जेल में बंद किया गया था। यह भारतीय इतिहास में हमेशा काला अध्याय के रूप में जाना जाएगा।
-सुरेंद्र सिंह, स्थानीय निवासी सेक्टर-21 डी-
आपातकाल के दौरान लगभग 20 साल उम्र होगी। उस समय सरकार के खिलाफ गीत, फिल्म कुछ भी नहीं बना सकते थे। खबरें सेंसर कर दी गई थीं। राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों ने भी घरों से निकलना बंद कर दिया था। अधिकारी भी समय पर कार्यालय पहुंचने लगे थे। मनमानी का असर ये हुआ कि चुनाव में सरकार धराशायी हो गई।
-रविंद्र चावला, स्थानीय निवासी एनआईटी-