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Faridabad News: ढाई लाख ऐंठने के बाद सीबीआई से दी थी अनन्या को डिजिटल जमानत
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फरीदाबाद। साइबर ठगी के पैंतरों में सबसे अलग और अनोखे तरीके ''''''''डिजिटल अरेस्ट'''''''' ने जिले के साइबर क्राइम थाना पुलिस को भी सकते में डाल रखा है। आरोपियों ने जिस तरीके से अपराध को अंजाम दिया है वह पुलिस के लिए भी एकदम नया है। आरोपियों ने सीबीबाई के नाम पर ठगी की। ढाई लाख रुपये लेने के बाद आरोपियों ने उसे बाकायदा रसीद भेजी और सीबीआई से अग्रिम जमानत के बेल ऑर्डर भेजे।
ठगों ने जिसे झांसे में लिया वह बीबीए के बाद आगे की पढ़ाई के लिए कनाडा जाने की तैयारी कर रही थी। छात्रा करीब दो साल तक पीएमओ में डेटा एनालिस्ट का काम संभाल चुकी है। जी-20 में भी छात्रा ने अपना योगदान दिया था। इतनी जानकारी होने के बाद भी वह ठगों के जाल में फंस गई। दरअसल ठगों ने जिस तरह से कागजात उसे दिखाए। उससे यकीन करना मुश्किल था कि यह असली हैं या नकली। ठगों ने पीड़िता को पुलिस कर्मी बनकर फोन किया और अदालत संबंधी कागजात भेजे। इनमें पीड़िता का आधार नंबर और नाम के साथ उसे गिरफ्तार दिखाया गया था। कागजात को पढ़ने के बाद वह परेशान हो गई और घर में बातचीत करने की बजाए मुसीबत से निकलने के लिए पैसे देना ही बेहतर समझा। ढाई लाख रुपये लेने के बाद आरोपियों ने उसे बाकायदा रसीद भेजी और सीबीआई से अग्रिम जमानत के बेल ऑर्डर भेजे। ठगी होने के बाद पता लगा सब फर्जी था।
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भाई से पहले कर लेती बात तो ठगी से बच सकती थी छात्रा
पीडिता की मां ने बताया अनन्या अपनी भाई से सारी बातें साझा कर लेती है। वह पिछले साल ही कनाडा गया था। उसी के पास जाकर वह आगे की पढ़ाई करना चाहती थी। उसे डर था कि केस के चक्कर में फंस गई तो वीजा कैंसल हो सकता है। इसलिए उसने ढ़ाई लाख देने के बाद भाई से फोन पर बात की और बताया वह काफी खुश है। अब जल्दी के कनाडा आ जाएगी। भाई ने खुशी का कारण पूछा तो छात्रा ने कहा वह डिजिटल अरेस्ट थी आज ही जमानत मिली है। भाई ने कहा ऐसा कुछ होता ही नहीं है। तुम्हारे साथ ठगी हुई है। हालांकि आरोपियों ने अनन्या को विश्वास दिलाया था कि पांच हजार रुपये काटकर सारे पैसे वापस मिल जाएंगे। फोन मिलाने पर आरोपियों के नंबर बंद थे। तब जाकर उसे ठगी का अहसास हुआ।
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यह है पूरा मामला
ह्यूमन ट्रैफिकिंग का डर दिखाकर साइबर ठगों ने बीबीए की छात्रा से ढाई लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने उसे 18 दिन तक स्काइप पर डिजिटली अरेस्ट रखा और ऐप से आउट नहीं होने दिया। एनआईटी साइबर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर रखा है। पीड़िता ने शिकायत में बताया उसने कनाडा स्थित एक विश्वविद्यालय में पिछले दिनों दाखिला लिया है। 12 अक्तूबर को उसके पास उत्तर प्रदेश लखनऊ में स्थित कस्टम विभाग का अधिकारी बनकर एक युवक का फोन आया। आरोपी ने कहा एक पार्सल कंबोडिया जा रहा है। उसके आधार कार्ड नंबर से बनाए गए कई पासपोर्ट वहां भेजे जा रहे हैं। आरोपी ने उसे स्काईप ऐप वीडियो कॉल की जिसमे एक थाना दिख रहा था। आरोपियों ने छात्रा पर ह्यूमन ट्रैफिकिंग का आरोप लगाया। सीबीआई अधिकारी बनकर अरेस्ट वारंट जारी होने की भी कही। डर के कारण छात्रा ने ढाई लाख रुपये ठगों को दे दिए।
-- संवाद--
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ठगों ने जिसे झांसे में लिया वह बीबीए के बाद आगे की पढ़ाई के लिए कनाडा जाने की तैयारी कर रही थी। छात्रा करीब दो साल तक पीएमओ में डेटा एनालिस्ट का काम संभाल चुकी है। जी-20 में भी छात्रा ने अपना योगदान दिया था। इतनी जानकारी होने के बाद भी वह ठगों के जाल में फंस गई। दरअसल ठगों ने जिस तरह से कागजात उसे दिखाए। उससे यकीन करना मुश्किल था कि यह असली हैं या नकली। ठगों ने पीड़िता को पुलिस कर्मी बनकर फोन किया और अदालत संबंधी कागजात भेजे। इनमें पीड़िता का आधार नंबर और नाम के साथ उसे गिरफ्तार दिखाया गया था। कागजात को पढ़ने के बाद वह परेशान हो गई और घर में बातचीत करने की बजाए मुसीबत से निकलने के लिए पैसे देना ही बेहतर समझा। ढाई लाख रुपये लेने के बाद आरोपियों ने उसे बाकायदा रसीद भेजी और सीबीआई से अग्रिम जमानत के बेल ऑर्डर भेजे। ठगी होने के बाद पता लगा सब फर्जी था।
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भाई से पहले कर लेती बात तो ठगी से बच सकती थी छात्रा
पीडिता की मां ने बताया अनन्या अपनी भाई से सारी बातें साझा कर लेती है। वह पिछले साल ही कनाडा गया था। उसी के पास जाकर वह आगे की पढ़ाई करना चाहती थी। उसे डर था कि केस के चक्कर में फंस गई तो वीजा कैंसल हो सकता है। इसलिए उसने ढ़ाई लाख देने के बाद भाई से फोन पर बात की और बताया वह काफी खुश है। अब जल्दी के कनाडा आ जाएगी। भाई ने खुशी का कारण पूछा तो छात्रा ने कहा वह डिजिटल अरेस्ट थी आज ही जमानत मिली है। भाई ने कहा ऐसा कुछ होता ही नहीं है। तुम्हारे साथ ठगी हुई है। हालांकि आरोपियों ने अनन्या को विश्वास दिलाया था कि पांच हजार रुपये काटकर सारे पैसे वापस मिल जाएंगे। फोन मिलाने पर आरोपियों के नंबर बंद थे। तब जाकर उसे ठगी का अहसास हुआ।
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यह है पूरा मामला
ह्यूमन ट्रैफिकिंग का डर दिखाकर साइबर ठगों ने बीबीए की छात्रा से ढाई लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने उसे 18 दिन तक स्काइप पर डिजिटली अरेस्ट रखा और ऐप से आउट नहीं होने दिया। एनआईटी साइबर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर रखा है। पीड़िता ने शिकायत में बताया उसने कनाडा स्थित एक विश्वविद्यालय में पिछले दिनों दाखिला लिया है। 12 अक्तूबर को उसके पास उत्तर प्रदेश लखनऊ में स्थित कस्टम विभाग का अधिकारी बनकर एक युवक का फोन आया। आरोपी ने कहा एक पार्सल कंबोडिया जा रहा है। उसके आधार कार्ड नंबर से बनाए गए कई पासपोर्ट वहां भेजे जा रहे हैं। आरोपी ने उसे स्काईप ऐप वीडियो कॉल की जिसमे एक थाना दिख रहा था। आरोपियों ने छात्रा पर ह्यूमन ट्रैफिकिंग का आरोप लगाया। सीबीआई अधिकारी बनकर अरेस्ट वारंट जारी होने की भी कही। डर के कारण छात्रा ने ढाई लाख रुपये ठगों को दे दिए।