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Faridabad News: आईवीएफ असफल होने पर पीड़ित दंपती को मिलेगी 1.20 लाख की राशि
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मानसिक परेशानी और कानूनी खर्च के लिए भी अतिरिक्त भुगतान मिलेगा
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। आईवीएफ उपचार के बाद गर्भधारण नहीं होने और दोबारा उपचार के लिए 1.50 लाख रुपये मांगे जाने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अस्पताल, डॉक्टर और बीमा कंपनी को शिकायतकर्ता को 1.20 लाख रुपये छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज समेत लौटाने के आदेश दिए हैं। आयोग ने मानसिक उत्पीड़न और वाद व्यय के लिए 5500-5500 रुपये अलग से देने के निर्देश दिए हैं।
अध्यक्ष अमित अरोड़ा और सदस्य इंदिरा भड़ाना की पीठ ने यह आदेश दिया। मामला अगस्त 2021 का है। एक महिला ने निसंतानता के उपचार के लिए मेडिचेक अस्पताल में आईवीएफ प्रक्रिया शुरू कराई थी। अस्पताल ने उपचार का पैकेज 1.50 लाख रुपये बताया था। महिला के अनुसार, उसने उपचार पर करीब 1.41 लाख रुपये और दवाओं पर 29,529 रुपये खर्च किए। डॉक्टर के निर्देशों और सावधानियों का पालन करने के बावजूद अक्तूबर 2021 में प्रक्रिया सफल नहीं हुई और गर्भधारण नहीं हुआ।
इसके बाद दोबारा अस्पताल पहुंचने पर उपचार की प्रक्रिया फिर शुरू करने के लिए 1.50 लाख रुपये मांगे गए। महिला ने नौ नवंबर 2021 को अस्पताल और डॉक्टर को कानूनी नोटिस भेजा। समाधान नहीं होने पर उसने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दी। अस्पताल और डॉक्टर की ओर से आयोग में कहा गया कि मरीज को आईवीएफ प्रक्रिया से जुड़े जोखिमों की जानकारी दी गई थी और सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए थे। उनका तर्क था कि चिकित्सा विज्ञान में आईवीएफ से गर्भधारण की शत-प्रतिशत गारंटी नहीं होती।
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आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलों और मेडिकल रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद शिकायत पर निर्णय सुनाया। आयोग ने सेवा में कोताही मानते हुए अस्पताल, डॉक्टर और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से 1.20 लाख रुपये छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज समेत लौटाने का आदेश दिया। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न और वाद व्यय के लिए 5500-5500 रुपये देने के निर्देश दिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। आईवीएफ उपचार के बाद गर्भधारण नहीं होने और दोबारा उपचार के लिए 1.50 लाख रुपये मांगे जाने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अस्पताल, डॉक्टर और बीमा कंपनी को शिकायतकर्ता को 1.20 लाख रुपये छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज समेत लौटाने के आदेश दिए हैं। आयोग ने मानसिक उत्पीड़न और वाद व्यय के लिए 5500-5500 रुपये अलग से देने के निर्देश दिए हैं।
अध्यक्ष अमित अरोड़ा और सदस्य इंदिरा भड़ाना की पीठ ने यह आदेश दिया। मामला अगस्त 2021 का है। एक महिला ने निसंतानता के उपचार के लिए मेडिचेक अस्पताल में आईवीएफ प्रक्रिया शुरू कराई थी। अस्पताल ने उपचार का पैकेज 1.50 लाख रुपये बताया था। महिला के अनुसार, उसने उपचार पर करीब 1.41 लाख रुपये और दवाओं पर 29,529 रुपये खर्च किए। डॉक्टर के निर्देशों और सावधानियों का पालन करने के बावजूद अक्तूबर 2021 में प्रक्रिया सफल नहीं हुई और गर्भधारण नहीं हुआ।
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इसके बाद दोबारा अस्पताल पहुंचने पर उपचार की प्रक्रिया फिर शुरू करने के लिए 1.50 लाख रुपये मांगे गए। महिला ने नौ नवंबर 2021 को अस्पताल और डॉक्टर को कानूनी नोटिस भेजा। समाधान नहीं होने पर उसने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दी। अस्पताल और डॉक्टर की ओर से आयोग में कहा गया कि मरीज को आईवीएफ प्रक्रिया से जुड़े जोखिमों की जानकारी दी गई थी और सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए थे। उनका तर्क था कि चिकित्सा विज्ञान में आईवीएफ से गर्भधारण की शत-प्रतिशत गारंटी नहीं होती।
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आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलों और मेडिकल रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद शिकायत पर निर्णय सुनाया। आयोग ने सेवा में कोताही मानते हुए अस्पताल, डॉक्टर और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से 1.20 लाख रुपये छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज समेत लौटाने का आदेश दिया। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न और वाद व्यय के लिए 5500-5500 रुपये देने के निर्देश दिए।