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Faridabad News: पड़ताल- अवैध जच्चा-बच्चा केंद्रों पर प्रशासन का ढीला हुआ शिकंजा
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-कार्रवाई के बाद फिर खुल रहे दरवाजे, बिना प्रशिक्षित स्त्री रोग विशेषज्ञ व उपकरणों के करा रहे डिलीवरी
संवाद न्यूज एजेंसी
पुन्हाना। उपमंडल पुन्हाना में अवैध रूप से संचालित जच्चा-बच्चा केंद्रों का नेटवर्क प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे केंद्रों के संचालन की चर्चाएं हैं, जहां बिना वैध अनुमति, प्रशिक्षित स्त्री रोग विशेषज्ञ और आवश्यक उपकरणों के प्रसव कराए जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि समय-समय पर छापेमारी और मुकदमा दर्ज होने के बावजूद ये केंद्र कुछ ही दिनों में फिर से सक्रिय हो जाते हैं।
नाम बदला, काम वही:
पड़ताल के दौरान सामने आया कि शहर के होडल-नगीना रोड सहित कई स्थानों पर ऐसे केंद्र संचालित हैं, जिन पर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। विभागीय छापेमारी के बाद कुछ अस्पतालों ने नाम बदलकर दोबारा संचालन शुरू कर दिया। अस्पतालों के बोर्ड पर बड़े शहरों के नामी डॉक्टरों के नाम अंकित हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि वे डॉक्टर कभी यहां आते ही नहीं। दस दिनों पहले पुरानी सब्जीमंडी स्थित एक जच्चा बच्चा केंद्र पर विभाग ने छापेमारी कर मुकदमा दर्ज कराया था जो अब बदस्तूर संचालित है।
एमटीपी किट बरामद, फिर भी ढिलाई:
सूत्रों के अनुसार, पूर्व में की गई छापेमारी के दौरान कई केंद्रों से एमटीपी किट बरामद हुई थी, जो अवैध गर्भपात की आशंका को बल देती है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि गर्भपात के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है। जटिल प्रसव की स्थिति में मरीजों को अंतिम समय में बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है, जिससे मां और नवजात दोनों की जान जोखिम में पड़ जाती है।
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गरीब परिवार बन रहे शिकार:
ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार सस्ती सुविधा और नजदीकी के कारण इन केंद्रों का रुख करते हैं। उन्हें कम खर्च में सुरक्षित प्रसव का भरोसा दिया जाता है, लेकिन वहां बुनियादी चिकित्सा मानकों तक का पालन नहीं होता। स्वच्छता, आपातकालीन सुविधा और प्रशिक्षित स्टाफ का अभाव आम बात है। कुछ जच्चा बच्चा केंद्र संचालको ने अपने एजेंट गांव गांव में बनाए हुए है जो भोले भाले लोगों को सस्ते में प्रसव कराने का लालच देकर उन्हें ऐसे जच्चा बच्चा केंद्र तक लाते है जहां उनसे मनमानी फीस वसूली जाती है।
विधानसभा तक गूंजा मुद्दा, फिर भी ढिलाई
फिरोजपुर झिरका के विधायक ने पिछले दिनों विधानसभा सत्र के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की थी। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात में खास सुधार नहीं दिख रहा। बल्कि पहले से अधिक अवैध जच्चा बच्चा केन्द्रों की तादाद बढी है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि क्षेत्र के सभी जच्चा-बच्चा केंद्रों का सर्वे कर उनकी वैधता की जांच की जाए, अवैध केंद्रों को तत्काल सील किया जाए और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो। साथ ही गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं के प्रति जागरूक करने की जरूरत भी जताई गई है।
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“शिकायत मिलते ही छापेमारी की जाती है और मुकदमा दर्ज कराया जाता है। यदि इसके बाद भी अवैध केंद्र चल रहे हैं तो जल्द कार्रवाई की जाएगी।”
डॉ मान सिंह, प्रवर चिकित्सा अधिकारी पुन्हाना
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संवाद न्यूज एजेंसी
पुन्हाना। उपमंडल पुन्हाना में अवैध रूप से संचालित जच्चा-बच्चा केंद्रों का नेटवर्क प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे केंद्रों के संचालन की चर्चाएं हैं, जहां बिना वैध अनुमति, प्रशिक्षित स्त्री रोग विशेषज्ञ और आवश्यक उपकरणों के प्रसव कराए जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि समय-समय पर छापेमारी और मुकदमा दर्ज होने के बावजूद ये केंद्र कुछ ही दिनों में फिर से सक्रिय हो जाते हैं।
नाम बदला, काम वही:
पड़ताल के दौरान सामने आया कि शहर के होडल-नगीना रोड सहित कई स्थानों पर ऐसे केंद्र संचालित हैं, जिन पर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। विभागीय छापेमारी के बाद कुछ अस्पतालों ने नाम बदलकर दोबारा संचालन शुरू कर दिया। अस्पतालों के बोर्ड पर बड़े शहरों के नामी डॉक्टरों के नाम अंकित हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि वे डॉक्टर कभी यहां आते ही नहीं। दस दिनों पहले पुरानी सब्जीमंडी स्थित एक जच्चा बच्चा केंद्र पर विभाग ने छापेमारी कर मुकदमा दर्ज कराया था जो अब बदस्तूर संचालित है।
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एमटीपी किट बरामद, फिर भी ढिलाई:
सूत्रों के अनुसार, पूर्व में की गई छापेमारी के दौरान कई केंद्रों से एमटीपी किट बरामद हुई थी, जो अवैध गर्भपात की आशंका को बल देती है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि गर्भपात के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है। जटिल प्रसव की स्थिति में मरीजों को अंतिम समय में बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है, जिससे मां और नवजात दोनों की जान जोखिम में पड़ जाती है।
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गरीब परिवार बन रहे शिकार:
ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार सस्ती सुविधा और नजदीकी के कारण इन केंद्रों का रुख करते हैं। उन्हें कम खर्च में सुरक्षित प्रसव का भरोसा दिया जाता है, लेकिन वहां बुनियादी चिकित्सा मानकों तक का पालन नहीं होता। स्वच्छता, आपातकालीन सुविधा और प्रशिक्षित स्टाफ का अभाव आम बात है। कुछ जच्चा बच्चा केंद्र संचालको ने अपने एजेंट गांव गांव में बनाए हुए है जो भोले भाले लोगों को सस्ते में प्रसव कराने का लालच देकर उन्हें ऐसे जच्चा बच्चा केंद्र तक लाते है जहां उनसे मनमानी फीस वसूली जाती है।
विधानसभा तक गूंजा मुद्दा, फिर भी ढिलाई
फिरोजपुर झिरका के विधायक ने पिछले दिनों विधानसभा सत्र के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की थी। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात में खास सुधार नहीं दिख रहा। बल्कि पहले से अधिक अवैध जच्चा बच्चा केन्द्रों की तादाद बढी है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि क्षेत्र के सभी जच्चा-बच्चा केंद्रों का सर्वे कर उनकी वैधता की जांच की जाए, अवैध केंद्रों को तत्काल सील किया जाए और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो। साथ ही गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं के प्रति जागरूक करने की जरूरत भी जताई गई है।
“शिकायत मिलते ही छापेमारी की जाती है और मुकदमा दर्ज कराया जाता है। यदि इसके बाद भी अवैध केंद्र चल रहे हैं तो जल्द कार्रवाई की जाएगी।”
डॉ मान सिंह, प्रवर चिकित्सा अधिकारी पुन्हाना