'अजित डोभाल के साथ खुफिया मिशन पर हूं': वैज्ञानिक बनकर 4.59 करोड़ की ठगी, शातिर ऐसे देता था लोगों को झांसा
फरीदाबाद में खुद को वैज्ञानिक बताकर लोगों से ठगी करने वाले आरोपी को कोर्ट ने जमानत नहीं दी है। ये 4.59 करोड़ रुपये की ठगी का मामला है। जो खुद को एनएसए अजीत डोभाल के साथ खुफिया मिशन पर काम करना बताया था।
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खुद को वैज्ञानिक बताकर सरकार की ओर से सस्ते में प्रॉपर्टी मिलने और उसमें पार्टनर बनाने का झांसा देकर 4.59 करोड़ रुपये की ठगी में आरोपी को जमानत नहीं मिली। बल्लभगढ़ आदर्श कॉलोनी निवासी मनीष महावल के अधिवक्ता की ओर से जमानत याचिका दायर की गई। इसमें दलील दी गई कि इन्हें केस में गलत फंसाया गया है। सह-आरोपी देशराज को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। सह-आरोपी कमलेश, सोनम मलिक को भी सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी है। याचिकाकर्ता 29 अगस्त 2024 से हिरासत में है।
वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से याचिका का विरोध करते हुए दलील दी गई कि आरोपी ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर 4.59 करोड़ रुपये की ठगी की है। ऐसे में इसे जमानत नहीं मिलनी चाहिये। सभी पक्षों को सुनकर जिला अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
आदर्श नगर थाना में साजिश के तहत फर्जी दस्तावेज तैयार कर ठगी की धाराओं में ये एफआईआर 1 अगस्त 2024 को दर्ज हुई थी। यशपाल सिंह तंवर ने मामले में पुलिस को शिकायत दी। ये हरियाणा सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें एलआईसी एजेंट, प्रॉपर्टी डीलरों और निवेश सलाहकारों के कॉल आने लगे। आरोप है कि एक दिन मनीष का कॉल आया और इसने खुद को भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड में कार्यरत वैज्ञानिक बताया। मनीष ने व्हाट्सएप पर अपना नियुक्ति पत्र भी भेजा।
आरोप है कि मनीष ने शिकायतकर्ता को बताया कि वो फिलहाल एनएसए अजीत डोभाल के साथ एक खुफिया मिशन पर काम कर रहा है और इसके चलते उनके जीवन को खतरा बना रहता है। इसकी भरपाई के लिए सरकार उन्हें रियायती दरों पर संपत्ति दिलाती है। मनीष ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की नई स्टाफ कॉलोनी में 1100 वर्ग गज का एक विला और एक शोरूम मिलना शिकायतकर्ता को बताया।
इसी तरह कई अन्य सारी प्रॉपर्टी बताई और उनमें पार्टनर बनने और मुनाफा कमाने का झांसा दिया। आरोप है कि मनीष ने वीडियो कॉल पर शिकायतकर्ता से बात की और इसमें अपने माता-पिता, भाई, भाभी को भी जोड़ा। उसने कई सारे दस्तावेज प्रॉपर्टी से संबंधित दिखाए। साल 2022 तक शिकायतकर्ता ने 45959000 रुपये निवेश कर दिए। बाद में जब प्रॉपर्टी से संबंधित दस्तावेज मांगे तो वे बहाने बनाने लगे। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया और अब मनीष की जमानत याचिका जिला अदालत ने खारिज कर दी है।