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Faridabad News: फतेहपुर बिल्लौच में 95% एम्स तैयार, दिसंबर से शुरू होगी ओपीडी
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18 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा भवन
हेमलता
बल्लभगढ़। गांव फतेहपुर बिल्लौच में एम्स की ओर से प्रस्तावित अस्पताल का सपना करीब 14 साल बाद साकार होने जा रहा है। करीब 18 करोड़ रुपये की लागत से अस्पताल का भवन लगभग 95 फीसदी तैयार हो चुका है। अब अंतिम चरण का काम तेजी से चल रहा है। दिसंबर 2026 से अस्पताल में कई बीमारियों की ओपीडी शुरू करने की तैयारी है। अस्पताल शुरू होने से फतेहपुर बिल्लौच सहित आसपास के 12 से अधिक गांवों के हजारों लोगों को घर के नजदीक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।
फतेहपुर बिल्लौच गांव की सरपंच सरोज सैनी ने बताया कि वर्ष 2008 में एम्स की ओर से फतेहपुर बिल्लौच में 30 बेड का अस्पताल बनाने की योजना तैयार की गई थी। इसके लिए तत्कालीन पंचायत ने करीब 6.5 एकड़ जमीन एम्स प्रबंधन को दी थी। वर्ष 2008 से 2010 के बीच जमीन एम्स के नाम की गई। वर्ष 2012 में एम्स प्रबंधन ने जमीन की चारदीवारी कराई और सुरक्षा के लिए कर्मचारियों की तैनाती की, लेकिन अस्पताल का निर्माण शुरू नहीं हो सका।
वर्ष 2012 में अस्पताल की जगह पहले पीएचसी बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया था, लेकिन यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद सीपीडब्ल्यूडी ने सितंबर 2024 में अस्पताल भवन का निर्माण शुरू किया। अब भवन का करीब 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
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दो ऑपरेशन थियेटर और 20 बेड की सुविधा
अस्पताल में ओपीडी के अलावा पैथोलॉजी लैब, दो ऑपरेशन थियेटर और 20 बेड की सुविधा होगी। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के रहने तथा खान-पान की व्यवस्था भी अस्पताल परिसर में की जाएगी। दिव्यांग मरीजों की सुविधा के लिए भवन में रैंप बनाए गए हैं। दिसंबर तक ओपीडी शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
30 हजार की आबादी को मिलेगा सीधा लाभ
फतेहपुर बिल्लौच की आबादी करीब 30 हजार है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में एमबीबीएस डॉक्टर की सुविधा नहीं होने के कारण गंभीर बीमारी या रात के समय मरीजों को बल्लभगढ़ और फरीदाबाद के अस्पतालों में ले जाना पड़ता है। अस्पताल शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों को प्राथमिक और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। अस्पताल का लाभ लहड़ोली, पन्हैड़ा कलां, जवां, ककड़ीपुर, मांदकौल, शाहपुर कलां, डीग और प्रहलादपुर माजरा समेत आसपास के गांवों के लोगों को भी मिलेगा। प्रसव के मामलों में भी मरीजों को सीधे बल्लभगढ़ या बादशाह खान अस्पताल ले जाने की परेशानी कम होने की उम्मीद है।
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हेमलता
बल्लभगढ़। गांव फतेहपुर बिल्लौच में एम्स की ओर से प्रस्तावित अस्पताल का सपना करीब 14 साल बाद साकार होने जा रहा है। करीब 18 करोड़ रुपये की लागत से अस्पताल का भवन लगभग 95 फीसदी तैयार हो चुका है। अब अंतिम चरण का काम तेजी से चल रहा है। दिसंबर 2026 से अस्पताल में कई बीमारियों की ओपीडी शुरू करने की तैयारी है। अस्पताल शुरू होने से फतेहपुर बिल्लौच सहित आसपास के 12 से अधिक गांवों के हजारों लोगों को घर के नजदीक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।
फतेहपुर बिल्लौच गांव की सरपंच सरोज सैनी ने बताया कि वर्ष 2008 में एम्स की ओर से फतेहपुर बिल्लौच में 30 बेड का अस्पताल बनाने की योजना तैयार की गई थी। इसके लिए तत्कालीन पंचायत ने करीब 6.5 एकड़ जमीन एम्स प्रबंधन को दी थी। वर्ष 2008 से 2010 के बीच जमीन एम्स के नाम की गई। वर्ष 2012 में एम्स प्रबंधन ने जमीन की चारदीवारी कराई और सुरक्षा के लिए कर्मचारियों की तैनाती की, लेकिन अस्पताल का निर्माण शुरू नहीं हो सका।
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वर्ष 2012 में अस्पताल की जगह पहले पीएचसी बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया था, लेकिन यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद सीपीडब्ल्यूडी ने सितंबर 2024 में अस्पताल भवन का निर्माण शुरू किया। अब भवन का करीब 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
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दो ऑपरेशन थियेटर और 20 बेड की सुविधा
अस्पताल में ओपीडी के अलावा पैथोलॉजी लैब, दो ऑपरेशन थियेटर और 20 बेड की सुविधा होगी। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के रहने तथा खान-पान की व्यवस्था भी अस्पताल परिसर में की जाएगी। दिव्यांग मरीजों की सुविधा के लिए भवन में रैंप बनाए गए हैं। दिसंबर तक ओपीडी शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
30 हजार की आबादी को मिलेगा सीधा लाभ
फतेहपुर बिल्लौच की आबादी करीब 30 हजार है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में एमबीबीएस डॉक्टर की सुविधा नहीं होने के कारण गंभीर बीमारी या रात के समय मरीजों को बल्लभगढ़ और फरीदाबाद के अस्पतालों में ले जाना पड़ता है। अस्पताल शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों को प्राथमिक और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। अस्पताल का लाभ लहड़ोली, पन्हैड़ा कलां, जवां, ककड़ीपुर, मांदकौल, शाहपुर कलां, डीग और प्रहलादपुर माजरा समेत आसपास के गांवों के लोगों को भी मिलेगा। प्रसव के मामलों में भी मरीजों को सीधे बल्लभगढ़ या बादशाह खान अस्पताल ले जाने की परेशानी कम होने की उम्मीद है।