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पल्ला पीएचसी से बीके तक कराई जांच, ऑटो में ही हुआ महिला का प्रसव
Updated Mon, 04 Jun 2018 11:39 PM IST
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प्रसव में लापरवाही : ऑटो में महिला ने दिया बच्चे को जन्म
फरीदाबाद। सोमवार सुबह दो सरकारी अस्पतालों की लापरवाही के चलते महिला ने ऑटो में बच्चे को जन्म दिया। पल्ला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर जांच के लिए पहुंची नौ माह की गर्भवती नीतू की प्रसव पीड़ा को हाई रिस्क बताते हुए उसे बीके सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया। बीके सिविल अस्पताल में जांच के दौरान गर्भवती नीतू की सामान्य स्थिती का हवाला देते हुए उसे वापस घर रवाना कर दिया गया। घर जाते वक्त रास्ते में पल्ला चौक के पास महिला को प्रसव पीड़ा उठी और महिला ने ऑटो में ही बच्चे को जन्म दे दिया। महिला के साथ मौजूद उसके पति लक्ष्मण ने उसे पल्ला पीएचसी पहुंचाया, जहां जच्चा बच्चा को भर्ती कर लिया गया। लक्ष्मण का आरोप है कि दोनों अस्पतालों के टाल-मटोल रवैये के कारण उसकी पत्नी की मौत भी हो सकती थी।
सराय निवासी लक्ष्मण ने बताया कि अपनी नौ महीने की गर्भवती पत्नी नीतू को लेकर वह सोमवार सुबह पल्ला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा। स्वास्थ्य केंद्र में महिला के हिमोग्लोबिन जांच की गई तो खून की कमी पाई गई। नीतू की डिलीवरी पर खून चढ़ाए जाने की बात कह कर उसे स्वास्थ्य केंद्र से बीके सिविल अस्पताल में रेफर कर दिया। उधर बीके सिविल अस्पताल में जांच कर नीतू का केस सामान्य बताते हुए उसे वापस घर जाने के लिए कहा गया। डाक्टर की सलाह पर घर के लिए रवाना हुई नीतू की प्रसव पीड़ा ऑटो में इतनी बढ़ गई कि सराय-पल्ला के बीच में ही महिला ने ऑटो में ही बच्चे को जन्म दे दिया। रास्ते में महिला का नवजात आधा बाहर आया तो जल्दबाजी में महिला को फिर से पल्ला प्राथमिक केंद्र ले जाया गया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दाखिल नीतू ने एक लड़की को जन्म दिया है।
नहीं थी डॉक्टर, नर्स ने किया था चेक
लक्ष्मण ने आरोप लगाया कि सुबह करीब सात बजे जब वह अपनी पत्नी को लेकर पीएचसी पहुंचा तो वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं थी। स्वास्थ्य केंद्र में मौजूद नर्स ने ही नीतू की जांच की और खून की कमी बताते हुए उसे बीके अस्पताल ले जाने को कहा। पल्ला पीएचसी से उसे कोई रेफर स्लिप भी नहीं दी गई।
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नीतू को सुबह से ही प्रसव पीड़ा थी। पल्ला प्राथमिक केंद्र पर डाक्टर ने खून की कमी के कारण सिविल अस्पताल में सुरक्षित प्रसव कराने की बात कही। हाई रिस्क डिलीवरी के तौर पर नीतू को रेफर किया गया। लेकिन बीके अस्पताल में केस सामान्य बताकर घर जाने की बात कही गई। पत्नी की डिलीवरी के लिए दो डाक्टरों की राय जानलेवा साबित हो सकती थी। -लक्ष्मण, नीतू का पति
प्रसव पीड़ा में स्वास्थ्य केंद्र पहुंची नीतू में सिर्फ 7 ग्राम हिमोग्लोबिन था ऐसे में सिविल अस्पताल में सुरक्षित डिलीवरी करवाने के लिए ही रेफर किया गया था। बीके सिविल अस्पताल से महिला को वापस घर भेजे जाना रिस्की रहा। -डा. ज्योति, प्रभारी, पल्ला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
मामले की जांच कराई जाएगी। हाई रिस्क गर्भवती को हाई रिस्क टैग के साथ रेफर करना चाहिए था। दो अस्पतालों के बीच की दूरी में खराब हुआ समय घटना का कारण है। जांच के बाद पता चलेगा कि आखिर लापरवाही कहां से हुई है। -डा. विरेंद्र यादव, प्रभारी, बीके सिविल अस्पताल
फरीदाबाद। सोमवार सुबह दो सरकारी अस्पतालों की लापरवाही के चलते महिला ने ऑटो में बच्चे को जन्म दिया। पल्ला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर जांच के लिए पहुंची नौ माह की गर्भवती नीतू की प्रसव पीड़ा को हाई रिस्क बताते हुए उसे बीके सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया। बीके सिविल अस्पताल में जांच के दौरान गर्भवती नीतू की सामान्य स्थिती का हवाला देते हुए उसे वापस घर रवाना कर दिया गया। घर जाते वक्त रास्ते में पल्ला चौक के पास महिला को प्रसव पीड़ा उठी और महिला ने ऑटो में ही बच्चे को जन्म दे दिया। महिला के साथ मौजूद उसके पति लक्ष्मण ने उसे पल्ला पीएचसी पहुंचाया, जहां जच्चा बच्चा को भर्ती कर लिया गया। लक्ष्मण का आरोप है कि दोनों अस्पतालों के टाल-मटोल रवैये के कारण उसकी पत्नी की मौत भी हो सकती थी।
सराय निवासी लक्ष्मण ने बताया कि अपनी नौ महीने की गर्भवती पत्नी नीतू को लेकर वह सोमवार सुबह पल्ला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा। स्वास्थ्य केंद्र में महिला के हिमोग्लोबिन जांच की गई तो खून की कमी पाई गई। नीतू की डिलीवरी पर खून चढ़ाए जाने की बात कह कर उसे स्वास्थ्य केंद्र से बीके सिविल अस्पताल में रेफर कर दिया। उधर बीके सिविल अस्पताल में जांच कर नीतू का केस सामान्य बताते हुए उसे वापस घर जाने के लिए कहा गया। डाक्टर की सलाह पर घर के लिए रवाना हुई नीतू की प्रसव पीड़ा ऑटो में इतनी बढ़ गई कि सराय-पल्ला के बीच में ही महिला ने ऑटो में ही बच्चे को जन्म दे दिया। रास्ते में महिला का नवजात आधा बाहर आया तो जल्दबाजी में महिला को फिर से पल्ला प्राथमिक केंद्र ले जाया गया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दाखिल नीतू ने एक लड़की को जन्म दिया है।
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नहीं थी डॉक्टर, नर्स ने किया था चेक
लक्ष्मण ने आरोप लगाया कि सुबह करीब सात बजे जब वह अपनी पत्नी को लेकर पीएचसी पहुंचा तो वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं थी। स्वास्थ्य केंद्र में मौजूद नर्स ने ही नीतू की जांच की और खून की कमी बताते हुए उसे बीके अस्पताल ले जाने को कहा। पल्ला पीएचसी से उसे कोई रेफर स्लिप भी नहीं दी गई।
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नीतू को सुबह से ही प्रसव पीड़ा थी। पल्ला प्राथमिक केंद्र पर डाक्टर ने खून की कमी के कारण सिविल अस्पताल में सुरक्षित प्रसव कराने की बात कही। हाई रिस्क डिलीवरी के तौर पर नीतू को रेफर किया गया। लेकिन बीके अस्पताल में केस सामान्य बताकर घर जाने की बात कही गई। पत्नी की डिलीवरी के लिए दो डाक्टरों की राय जानलेवा साबित हो सकती थी। -लक्ष्मण, नीतू का पति
प्रसव पीड़ा में स्वास्थ्य केंद्र पहुंची नीतू में सिर्फ 7 ग्राम हिमोग्लोबिन था ऐसे में सिविल अस्पताल में सुरक्षित डिलीवरी करवाने के लिए ही रेफर किया गया था। बीके सिविल अस्पताल से महिला को वापस घर भेजे जाना रिस्की रहा। -डा. ज्योति, प्रभारी, पल्ला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
मामले की जांच कराई जाएगी। हाई रिस्क गर्भवती को हाई रिस्क टैग के साथ रेफर करना चाहिए था। दो अस्पतालों के बीच की दूरी में खराब हुआ समय घटना का कारण है। जांच के बाद पता चलेगा कि आखिर लापरवाही कहां से हुई है। -डा. विरेंद्र यादव, प्रभारी, बीके सिविल अस्पताल