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Faridabad News: मिलावट का जाल, दूध, पनीर और देसी घी के 70% नमूने फेल

Sat, 20 Jun 2026 12:29 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jun 2026 12:29 AM IST
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70% samples of milk, cheese and desi ghee fail due to adulteration
मिलावट का जाल: दूध, पनीर और देसी घी के 70% नमूने फेल, लोगों की सेहत से हो रहा खिलवाड़। एनआईटी प - फोटो : 1
एनआईटी, ओल्ड फरीदाबाद और बल्लभगढ़ में सबसे ज्यादा मिलावटखोरी, लोगों की सेहत से हो रहा खिलवाड़
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5 वर्षों में 120 में से 83 नमूने फेल

संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में खाद्य पदार्थों में मिलावट का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। मुनाफाखोरी के चक्कर में मिलावटखोर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की हालिया रिपोर्ट ने शहर में बिक रहे दूध, पनीर, देसी घी और मिठाइयों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग द्वारा पिछले कुछ महीनों में लिए गए नमूनों में बड़ी संख्या फेल पाई गई है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि बाजार में मिलावटी खाद्य पदार्थों की भरमार है।

विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों का लगातार सेवन पेट, लिवर, किडनी और हृदय संबंधी बीमारियों का कारण बन सकता है। वहीं खाद्य सुरक्षा विभाग लोगों से संदिग्ध खाद्य पदार्थों की शिकायत करने की अपील कर रहा है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार पिछले पांच वर्षों में लिए गए 120 नमूनों में से 83 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं।
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दूध, पनीर और देसी घी में सबसे ज्यादा मिलावट

एफडीए की रिपोर्ट के अनुसार विभाग ने दूध, पनीर और देसी घी के कुल 30 नमूने लिए थे, जिनमें से 21 नमूने फेल पाए गए। यानी करीब 70 प्रतिशत नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतर सके। जांच में सामने आया कि एनआईटी, ओल्ड फरीदाबाद और बल्लभगढ़ क्षेत्रों में मिलावट के मामले अधिक पाए गए हैं। कई कारोबारी ब्रांडेड कंपनियों के नाम और पैकेजिंग का इस्तेमाल कर नकली या निम्न गुणवत्ता वाले उत्पाद बेच रहे हैं। कम कीमत के लालच में उपभोक्ता भी ऐसे उत्पाद खरीद रहे हैं, जिससे मिलावटखोरों का कारोबार फल-फूल रहा है।
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रिफाइंड और वनस्पति घी से तैयार हो रहा नकली देसी घी

खाद्य विभाग की जांच में यह भी सामने आया है कि रिफाइंड तेल, वनस्पति घी और कृत्रिम खुशबू मिलाकर नकली देसी घी तैयार किया जा रहा है। कई मामलों में इसमें थोड़ा सा शुद्ध देसी घी मिलाकर उसे ब्रांडेड डिब्बों में पैक कर बाजार में उतारा जाता है। यह मिलावटी घी 250 से 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक बेचा जा रहा है, जबकि शुद्ध देसी घी की कीमत 800 से 1000 रुपये प्रति किलोग्राम तक है। कम कीमत के कारण बड़ी संख्या में उपभोक्ता इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं।

मिठाइयों में भी मिलावट, कार्रवाई जारी

मिठाइयों के लिए लिए गए 38 नमूनों में से 12 नमूने फेल पाए गए हैं। त्योहारों के दौरान ऐसे मामलों में बढ़ोतरी देखी जाती है। फरवरी 2026 में डबुआ स्थित एक किराना स्टोर पर सीएम फ्लाइंग और फूड सेफ्टी विभाग की संयुक्त टीम ने छापा मारकर बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दूध, दही और पैकेट बंद खाद्य सामग्री बरामद की थी। इससे पहले वर्ष 2022 में इंदिरा कॉलोनी और बल्लभगढ़ में बिना फूड लाइसेंस पनीर निर्माण का मामला सामने आया था, जहां विभाग ने छापेमारी कर नमूने लिए थे। खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



विभाग लगातार खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर उनकी जांच कर रहा है। मिलावट पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है। मिलावट की आशंका होने पर विभाग को सूचना दें और खाद्य पदार्थ खरीदते समय सतर्क रहें।-पृथ्वी सिंह, वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी
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