{"_id":"6a15ea611fe1dc74ca062a17","slug":"69-year-old-blood-cancer-patient-undergoes-successful-bone-marrow-transplant-at-private-hospital-faridabad-news-c-26-1-fbd1021-70937-2026-05-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: निजी अस्पताल में 69 वर्षीय ब्लड कैंसर मरीज का सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: निजी अस्पताल में 69 वर्षीय ब्लड कैंसर मरीज का सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शहर के एक निजी अस्पताल में 69 वर्षीय ब्लड कैंसर मरीज का सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया। मरीज मल्टीपल मायलोमा नामक गंभीर ब्लड कैंसर से पीड़ित था और लंबे समय से व्हीलचेयर पर निर्भर था। अस्पताल पहुंचने पर मरीज की हालत काफी कमजोर थी। हड्डियों में तेज दर्द, बार-बार संक्रमण और चलने-फिरने में परेशानी के कारण उसकी दैनिक गतिविधियां प्रभावित हो चुकी थीं।
जांच के दौरान बोन मैरो परीक्षण में मल्टीपल मायलोमा की पुष्टि हुई। मरीज की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए फोर्टिस एस्कॉर्ट अस्पताल के डॉक्टरों ने पारंपरिक कीमोथेरेपी की बजाय टार्गेटेड थेरेपी शुरू की। हालत में सुधार आने के बाद मरीज का बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया।
डॉक्टरों के अनुसार उपचार के बाद मरीज की स्थिति में काफी सुधार हुआ है और अब वह व्हीलचेयर पर निर्भर नहीं है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अधिक उम्र के बावजूद मरीज की मानसिक दृढ़ता और समय पर इलाज से उपचार सफल हो सका।
विज्ञापन
विज्ञापन
फरीदाबाद। शहर के एक निजी अस्पताल में 69 वर्षीय ब्लड कैंसर मरीज का सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया। मरीज मल्टीपल मायलोमा नामक गंभीर ब्लड कैंसर से पीड़ित था और लंबे समय से व्हीलचेयर पर निर्भर था। अस्पताल पहुंचने पर मरीज की हालत काफी कमजोर थी। हड्डियों में तेज दर्द, बार-बार संक्रमण और चलने-फिरने में परेशानी के कारण उसकी दैनिक गतिविधियां प्रभावित हो चुकी थीं।
जांच के दौरान बोन मैरो परीक्षण में मल्टीपल मायलोमा की पुष्टि हुई। मरीज की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए फोर्टिस एस्कॉर्ट अस्पताल के डॉक्टरों ने पारंपरिक कीमोथेरेपी की बजाय टार्गेटेड थेरेपी शुरू की। हालत में सुधार आने के बाद मरीज का बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया।
विज्ञापन
डॉक्टरों के अनुसार उपचार के बाद मरीज की स्थिति में काफी सुधार हुआ है और अब वह व्हीलचेयर पर निर्भर नहीं है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अधिक उम्र के बावजूद मरीज की मानसिक दृढ़ता और समय पर इलाज से उपचार सफल हो सका।
विज्ञापन